द्वाला के ख्रीस्तयाग में पोप : अफ्रीकी युवा हिंसा और भ्रष्टाचार को नकारें
कैमरून, शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 (रेई) : कैमरून की प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा लियो 14वें ने शुक्रवार को, द्वाला के जापोमा स्टेडियम के पास पावन ख्रीस्तयाग अर्पित किया। जहाँ करीब 600,000 विश्वासियों ने ख्रीस्तयाग में भाग लेकर अपने विश्वास की खुशी व्यक्त की।
सुसमाचार पाठ जिसे संत योहन रचित सुसमाचार के अध्याय 6 से लिया गया था जहाँ येसु ने पाँच रोटियों और 2 मछलियों से पाँच हजार लोगों को खिलाया।
पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने अपने उपदेश में कहा, “हमने जो सुसमाचार पाठ सुना है” (यो. 6:1-15) वह पूरी मानव जाति के लिए मुक्ति का वचन है। यह शुभ समाचार पाठ आज पूरी दुनिया में सुनाया जा रहा है; कैमरून की कलीसिया के लिए, यह ईश्वर के प्यार और हमारी संगति की एक ईश्वरीय घोषणा के तौर पर गूंज रही है।
प्रेरित संत योहन एक बड़ी भीड़ के बारे बताते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हम अभी यहाँ पर हैं। लेकिन, उन लोगों के लिए बहुत कम खाना था: सिर्फ “जौ की पाँच रोटियाँ और दो मछलियाँ थीं।” (पद 9)। इस कमी को देखकर, येसु आज हमसे पूछते हैं, जैसे उन्होंने तब अपने शिष्यों से पूछा था: तुम इस समस्या का कैसे हल करोगे? इन सभी भूखे लोगों को देखो, जो थकान से दबे हुए हैं। तुम क्या करोगे?
यह सवाल हम सभी से किया जा रहा है। यह उन पिताओं और माताओं के लिए है जो अपने परिवारों की देखभाल करते हैं। यह कलीसिया के चरवाहों के लिए है, जो प्रभु के झुंड की देखभाल करते हैं, और उन लोगों के लिए भी जो जनता के लिए सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी उठाते हैं और उनकी भलाई चाहते हैं। ख्रीस्त यह सवाल ताकतवर और कमजोर, अमीर और गरीब, जवान और बुजुर्ग सभी से पूछते हैं, क्योंकि हम सभी एक ही तरह से भूखे हैं। हमारी जरूरत हमें याद दिलाती है कि हम प्राणी हैं। हमें जीने के लिए खाने की जरूरत है। हम ईश्वर नहीं हैं: लेकिन लोगों की भूख के सामने ईश्वर कहाँ हैं?
हमारे उत्तर का इंतजार करते हुए, येसु अपना जवाब देते हैं: “येसु ने रोटियाँ लीं, और धन्यवाद की प्रार्थना करने के बाद उन्हें बैठे हुए लोगों में बाँट दिया; और इसी तरह मछलियाँ भी।” (पद.11) जो थोड़ा खाना था, उसे आशीष देने और सभी भूखे लोगों के साथ बाँटने से एक गंभीर समस्या हल हो गई। रोटियों और मछलियों की संख्या बाँटने के दौरान बढ़ गई: यही चमत्कार है! अगर सबको रोटी दी जाए तो सबके लिए रोटी है। रोटी सबके लिए है, इसलिए उसे, उस हाथ से न लिया जो छीनता है, बल्कि उस हाथ से जो देता है। आइए हम येसु के मनोभाव को ध्यान से देखें: जब ईश्वर के पुत्र ने रोटी और मछली ली, तो उन्होंने सबसे पहले धन्यवाद दिया। वह पिता के प्रति आभारी थे, जो सभी लोगों के लिए एक वरदान और आशीर्वाद बन गया।
इस तरह, खाना बहुत ज्यादा था। इसे जरूरत के कारण राशन के रूप में नहीं किया गया था। इसे लड़ाई-झगड़े में चुराया नहीं गया था। यह उन लोगों द्वारा बर्बाद नहीं किया गया जिन लोगों ने पेट भरकर खाया, और जिनके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। ख्रीस्त के हाथों से उनके चेलों के हाथों में जाते हुए, खाना सबके लिए बढ़ गया; सचमुच, यह बहुत ज्यादा था (12-13)। येसु के चमत्कार से आश्चर्य चकित होकर लोगों ने ऊंचे स्वर से कहा, “निश्चय ही वे एक नबी हैं!” (14), यानी, वे ईश्वर के नाम पर, सर्वशक्तिमान के वचन से बोलते हैं। यह सच था! लेकिन, येसु ने उन शब्दों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं किया। वे राजा नहीं बनना चाहते थे, क्योंकि वे प्यार से सेवा करने आए थे, शासन करने के लिए नहीं।
उन्होंने जो चमत्कार किये वह उनके प्यार की निशानी है। यह हमें न सिर्फ यह दिखाता है कि ईश्वर मानव को जीवन की रोटी देते हैं, बल्कि यह भी कि हम इस रोटी को उन सभी पुरूषों और महिलाओं के साथ कैसे बाँटते हैं, जो हमारी तरह शांति, स्वतंत्रता और न्याय के भूखे हैं। एकता और क्षमा का हर काम, हर अच्छी कोशिश, जरूरतमंद व्यक्ति के लिए रोटी का एक टुकड़ा बन जाती है। फिर भी, सिर्फ इतना ही काफी नहीं है: जो खाना शरीर को पोषण देता है, उसके साथ, उतनी ही दया से, आत्मा को भी पोषण देना चाहिए — एक ऐसा पोषण जो हमारे अंतःकरण को बनाए रखे और डर के अंधेरे घंटों में और दुःख की परछाइयों के बीच हमें मजबूत करे। यह भोजन खुद ख्रीस्त हैं, जो हमेशा अपनी कलीसिया को भरपूर पोषण देते हैं और हमें अपना यूखरीस्तीय शरीर देकर हमारी यात्रा में मजबूत करते हैं।
बहनों और भाइयों, हम जो ख्रीस्तयाग मना रहे हैं, वह नवीनीकृत विश्वास का स्रोत है, क्योंकि येसु हमारे बीच उपस्थित होते हैं। संस्कार सिर्फ एक दूर की याद को ताजा नहीं करता बल्कि यह एक "साथ" लाता है, जो हमें बदल देता क्योंकि यह हमें पवित्र करता है। धन्य हैं वे जो प्रभु के भोज में बुलाये गये हैं! यही वेदी, जिसके चारों ओर हम यूखारिस्त के लिए एकत्रित होते हैं, इतिहास की मुश्किलों और हमारे आस-पास होनेवाले अन्याय के बीच उम्मीद की घोषणा बन जाती है। यह ईश्वर के प्यार का चिन्ह है; ख्रीस्त में, पिता हमें बुलाते हैं कि जो हमारे पास है उसे बाँटें, ताकि यह कलीसिया की संगति में और बढ़ सके।
प्रभु स्वर्ग और धरती का आलिंगन करते हैं। वे हमारे दिलों को और उन सभी परिस्थितियों को जानते हैं – चाहे खुशी हो या दुःख – जिनका हम अनुभव करते हैं। हमें बचाने के लिए इंसान बनकर, उन्होंने मानव की सबसे सहज और दैनिक आवश्यकताओं में हिस्सा लेना चुना। इस तरह भूख हमें न सिर्फ हमारी गरीबी के बारे में बताती है, बल्कि सबसे बढ़कर, उनके प्यार के बारे में भी बताती है। जब भी हम किसी भाई या बहन को देखें जिसके पास जीवन की जरूरतों की कमी हो, तो हमें इसे याद रखना चाहिए। उनकी आँखों से, येसु वही सवाल दोहराते हैं जो उन्होंने अपने चेलों से पूछा था: “तुम इन लोगों के लिए क्या करनेवाले हो?” ख्रीस्त के साक्षी बनने और उनके प्यार भरे कामों की नकल करने में मुश्किलें और रुकावटें आवश्य आती हैं, बाहर से और अंदर से भी, जहाँ घमंड दिल को खराब कर सकता है। लेकिन, उन परिस्थितियों में, हम भजनकार के साथ दोहराएँ: “प्र प्रभु मेरी ज्योति और मुक्ति है; तो मैं किससे डरूँ?” (भजन 27:1) भले ही हम कभी-कभी लड़खड़ा जाएं, ईश्वर हमेशा हमें हिम्मत देते हैं। “प्रभु की प्रतीक्षा करो, दृढ़ रहो, साहस रखो। प्रभु की प्रतीक्षा करो।” (पद 14)
संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित कर कहा, प्यारे युवाओ, मैं यह निमंत्रण खास तौर पर आपको देना चाहता हूँ, क्योंकि आप अफ्रीकी महाद्वीप के प्यारे बच्चे हैं! येसु के भाई-बहनों के रूप में, अपनी क्षमता को उस विश्वास, लगन और मित्रता से बढ़ाएँ जो आपको प्रेरणा देती है। अपने पड़ोसियों तक जीवन की रोटी पहुँचानेवाले पहले चेहरे और हाथ बनें, उन्हें प्रज्ञा का भोजन दें और उन सभी चीजों से छुटकारा दिलाएँ जो उन्हें पोषण नहीं देतीं, बल्कि अच्छी इच्छाओं को दबाती हैं और उनकी इज्जत छीन लेती हैं। कैमरून की भूमि की समृद्धि के बावजूद, बहुत से लोग भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की गरीबी का अनुभव करते हैं। अविश्वास और निराशा के आगे न झुकें। हर तरह के गलत व्यवहार या हिंसा को नकारें, जो सहज फायदा का वादा करके धोखा देती लेकिन दिल को कठोर और बेपरवाह बना देती है। यह न भूलें कि आपके लोग इस भूमि से भी अधिक समृद्ध हैं, क्योंकि आपका खजाना आपके मूल्यों में है: विश्वास, परिवार, अतिथि सत्कार और काम। इसलिए, भविष्य के हीरो बनें, उस बुलावे को स्वीकार करें जो ईश्वर आप में से हरेक को देते हैं। खुद को उन लालचों से भ्रष्ट होने न दें जो आपकी शक्ति बर्बाद करते हैं और समाज की तरक्की में मदद नहीं करते।
अपनी नेक भावना को एक नई दुनिया की भविष्यवाणी करनेवाली आवाज बनाने के लिए, उस उदाहरण से सीखें जिसको हमने अभी अभी प्रेरित चरित से सुना है। आरम्भिक ख्रीस्तीयों ने मुश्किलों और धमकियों का सामना करते हुए भी साहस के साथ प्रभु येसु की गवाही दी, और जुल्म के बीच भी डटे रहे ( प्रेरित चरित 5:40-41)। शिष्यों ने “हर दिन मंदिर में और घर पर… येसु को प्रभु के रूप में बतलाना और घोषणा करना बंद नहीं किया” (पद 42), उन्हें मसीह, दुनिया के मुक्तिदाता घोषित किया। सचमुच, प्रभु हमें पाप और मौत से मु्क्त करते हैं। इस सुसमाचार की घोषणा निरंतर करते रहना हर ख्रीस्तीय का मिशन है, और यह एक ऐसा मिशन है जिसे मैं खास तौर पर आप पर, प्यारे युवाओं पर, और कैमरून की पूरी कलीसिया पर डालता हूँ। अपने देश के लिए शुभ समाचार बनें, जैसे धन्य फ्लोरिबर्ट बवाना चुई कोंगो के लोगों के लिए हैं। भाइयो और बहनो, शिक्षा एक निशान छोड़ती है, जैसे खेत में किसान के हल का निशान, जिसमें बोया गया बीज फल देता है। इसी तरह, ख्रीस्तीय घोषणा हमारा जीवन बदल देता है, मन और हृदय बदल देता है। पुनर्जीवित येसु की घोषणा करने का अर्थ है दुःख और जुल्म से भरी भूमि पर न्याय का निशान छोड़ना, दुश्मनी और भ्रष्टाचार के बीच शांति का चिन्ह, विश्वास का चिन्ह जो हमें अंधविश्वास और उदासीनता से मुक्त करते हैं। अपने दिलों में सुसमाचार के इस संदेश के साथ, हम कुछ ही देर में यूखरिस्त की रोटी बाटेंगे जो हमें अनन्त जीवन के लिए पोषण प्रदान करती है। आनन्दित विश्वास के साथ, आइए हम प्रभु से प्रार्थना करें कि वे सबकी भलाई के लिए हमारे बीच अपने वरदान को बढ़ाए।
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