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अंगोला में संत पापा लियो का पवित्र मिस्सा अंगोला में संत पापा लियो का पवित्र मिस्सा  (@Vatican Media)

संत पापा लियोः जीवन की निराशा में येसु हमारे संग रहते हैं

संत पापा लियो ने अंगोला के किलांबा में पवित्र मिस्सा बलिदान अर्पित करते हुए एम्माऊस के मार्ग में दो शिष्यों की मनोदशा पर चिंता करते हुए पुनर्जीवित येसु में सदैव आशा में बनने रहने का आहृवान किया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरितिक यात्रा के तीसरे चरण में अंगोला के किलांबा में यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

संत पापा लियो ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन में कहा कि इस यूखारीस्तीय बलिदान को मैं आप सबों के संग कृतज्ञतापूर्ण एक हृदय से अर्पित करता हूँ। इस उपहार के लिए ईश्वर का धन्यवाद और साथ ही आप सबों के गर्मजोशी स्वागत के लिए भी।

पास्का के तीसरे रविवार, सुसमाचार के माध्यम ईश्वर हमें एम्माऊस की राह में चल रहे शिष्यों के बारे कहता है। आइए हम अपने को उनके जीवन वचनों के द्वारा आलोकित होने दें।

शिष्यों की निराशा

संत पापा लियो ने कहा कि येसु के दो शिष्य, टूटे और उदास हृदय से, येरुसालेम छोड़कर एम्माऊस, गाँव लौटने को निकल पड़ते हैं। उन्होंने येसु की मृत्यु को देखा था जिनका उन्होंने निष्ठा में अनुसरण किया था। वे निराश और उदास अपने गाँव को लौट रहे थे। राह में, वे “येसु के ऊपर घटी सारी घटनाओं का जिक्र कर रहे थे।” (लूका. 24.14)  वे उन सारी बातों का जिक्र करने में बाध्य थे, उस सारी घटनाओं की चर्चा जिसका अनुभव उन्होंने किया था। यद्यपि ऐसा करते हुए वे अपने को उदासी का शिकार और आशाहीनता से ग्रस्ति पाते हैं।

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (@Vatican Media)

अंगोला का संदर्भ

प्रिय भाइयो और बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि सुसमाचार के इस प्ररांभिक दृश्य में, मैं अंगोला के इतिहास की झलक पाता हूँ, इस सुदंर अपितु घायल देश, जो आशा, शांति और भ्रातृत्व की भूखी और प्यासी है। वास्तव में, मार्ग में दो शिष्यों के बीच वार्ता, जो अपने स्वामी में बीते दुःखों पर चिंतन करते हैं, इस देश में हुई दुखद घटनाओं को हमारे जेहन में लाती है- एक लम्बा गृह युद्ध, जिसके बाद दुश्मनी और विभाजन, संसाधनों की बर्बादी और और गरीबी।

चिंता का प्रभाव

संत पापा ने कहा कि कोई जब अपने इतिहास के दुःखों में लम्बे समय तक इस तरह डूबा रहता है, तो वह अपनी आशा को खोने की जोखिम में पड़ जाता है और अपने में बने रहने वाली निराश के कारण पंगु हो जाता है, जैसा कि वे दो शिष्यगण थे। वास्तव में, वे चल रहे थे, यद्यपि वे तीन दिन पूर्व हुई घटनाओं में फँसे हुए थे जहाँ उन्होंने येसु की मौत को देखा था। वे एक दूसरे से बातें कर रहते थे लेकिन समाधान हेतु बिना किसी आशा के। वे अतीत की घटनाओं के बारे में बातें करना जारी रखते हैं, वे उन लोगों की तरह चिंता से ग्रस्ति थे जो यह नहीं जानते कि नये सिरे से पुनः कैसे शुरू किया जाये या क्या ऐसा करना संभव हो सकता है।

अंगोला के विश्वासी भक्त
अंगोला के विश्वासी भक्त   (@Vatican Media)

येसु जिंदा हैं

प्रिय मित्रों, संत पापा लियो ने कहा कि ईश्वर की खुश खबरी हमारे लिए आज भी विशेष रुप ये यही है कि वे जिंदा हैं, वे जी उठे हैं, और वे हमारे जीवन के दुःखद और कटुता भरी यात्रा में हमारी बगल में चलते हैं, वे हमारी आँखें को खोलते हैं जिससे हम उनके कार्य को पहचान सकें और वे हमें अपनी कृपा प्रदान करते हैं जिससे हम नये सिरे से शुरू करें और अपने भविष्य का पुनर्निमाण करें।

येसु दो निराश शिष्यों के संग चलते हैं, जो आशाहीनता में भागते हैं। राह में उनके मित्र स्वरुप, वे उन्हें टूटी हुए कहानी को जोड़ने में मदद करते हैं, वे उन्हें दुःख से परे देखने, इस बात का पता लाना में कि वे अपनी यात्रा में अकेले नहीं हैं और ईश्वर के प्रेम, एक भविष्य जो अब भी उनका इंतजार कर रहा है। जब वे उनके साथ खाने के लिए रूकते हैं, मेज में बैठते और रोटी तोड़ते हैं तो “उनकी आंखें खुल जाती और वे उन्हें पहचाते हैं।” (लूका. 24.31)

मिस्सा बलिदान में संत पापा लियो
मिस्सा बलिदान में संत पापा लियो   (@Vatican Media)

येसु हमारे संग चलते

संत पापा ने कहा कि अंगोला के भाइयो और बहनों, यह हमारे लिए भी नये रुप में शुरू करने के मार्ग को प्रस्तुत करता है। वहीं एक ओर हम इस निश्चिता को पाते हैं कि येसु हमारे संग चलते हैं, उनकी करूणा हमारे साथ है, तो दूसरी ओर वे हमारी ओर से निष्ठा की मांग करते हैं।

कलीसिया के प्रति निष्ठावान  

हम इन सारी चीजों से बढ़कर अपने संबंध में ईश्वर से मित्रता का अनुभव करते हैं, प्रार्थना में, उनके शब्दों को सुनने में जो हमारे हृदयों को उदीप्त करता है जैसे कि उन दो शिष्यों के हृदय में हुआ। यह हमारे लिए विशेष रुप से यूखारीस्तीय बलिदान में होता है। यहाँ हम ईश्वर से मुलाकात करते हैं। यही कारण है कि हमें हमेशा पारंपरिक धार्मिकता के उन रूपों के बारे में सावधान रहना चाहिए जो निश्चित रूप से संस्कृति की जड़ों से जुड़ी हैं, लेकिन साथ ही जादुई और अंधविश्वासी चीज़ें जो भ्रमित करने और मिलाने की जोखिम भी उत्पन्न करते हैं, जो आध्यात्मिक यात्रा में मददगार नहीं होते हैं। संत पापा ने कहा कि हम कलीसिया की शिक्षा के प्रति निष्ठावान बने रहें, पुरोहितों में विश्वास करें और अपनी निगाहें येसु की ओर गड़ायें रखें, जो हमें अपने को वचनों और यूखारीस्तीय में प्रकट करते हैं। इन दोनों में हम पुनर्जीवित को अपनी बगल में चलता, उनसे जुड़ा हुआ अनुभव करते हैं, जो हमें भी भिन्न प्रकार के “मरणों” से मुक्त करता और “जीवित” के रुप में जीने को मदद करता है।

अंगाोला में विश्वासीगण
अंगाोला में विश्वासीगण   (@Vatican Media)

हमें अकेले नहीं हैं

यह निश्चित रुप में हमें इस बात का एहसास दिलाता है कि हम अपनी यात्रा में अकेले नहीं हैं, यह हमसे एक उदारतापूर्ण निष्ठा की मांग करता है जिससे हमारे घावाओं की चंगाई और आशा जागृत हो सकें। वास्तव में, यदि दो शिष्यों ने एम्माऊस के मार्ग में येसु को रोटी तोड़ते हुए पहचाना तो इसका अर्थ यह है कि हमें भी उन्हें उसी रुप में पहचाने की जरुरत है- केवल यूखारीस्त में नहीं बल्कि उन स्थानों में भी जहाँ एक जीवन है जो हमारे लिए रोटी तोड़ने के समान होता है, जहाँ कहीं भी कोई अपने को उनके समान ही एक करूणा के उपहार स्वरुप प्रदान करता है।

संत पापा लियो का अंगोला में मिस्सा

एक उत्तरदायी कलीसिया

संत पापा लियो ने कहा कि आपके देश का इतिहास, आप जो मुश्किल नतीजे झेल रहे हैं, सामाजिक और आर्थिक समस्याएं और गरीबी के अलग-अलग रूप, ये सारी चीजें एक ऐसे कलीसियाई परिस्थिति की मांग करती है जो आपके साथ चलना और अपने बच्चों की पुकार पर ध्यान देना जानती हो। एक कलीसिया, शब्द के प्रकाश में यूख्रारीस्त से पोषित आशा को प्रज्वलित करना जानती हो। एक कलीसिया जो आप जैसे लोगों से निर्मित हो जो अपने को वैसे ही समर्पित करते हैं जैसे येसु ने उन दो शिष्यों को रोटी तोड़ते हुए एम्माउस के मार्ग में दिया। अंगोला को धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, प्रेरितों, समर्पित नर और नारियों तथा लोकधर्मियों की जरुरत है जो अपने “हृदय” में दूसरों के लिए अपने को तोड़ने के भाव रखते हैं, अपने को प्रेम में समर्पित करने, क्षमादान, भ्रातृत्व और शांति का स्थल निर्माण करने और अति जरुरमंदों के संग करूणा और एकता के कार्य करते हैं।

रोटी स्वरूप अपने को तोड़ें

पुनर्जीवित ख्रीस्त की कृपा से हम तोड़ी हुई रोटी की भांति बन सकते हैं जो सच्चाई को बदलती है। य़ूखारीस्त जिस भांति हमें यह याद दिलती है कि हम सभी एक शरीर और एक आत्मा स्वरूप येसु में संयुक्त हैं, अतः एक साथ मिलकर हमारे लिए यह संभव है कि हम एक देश के पुराने विभाजन को सदैव के लिए खत्म कर उसका निर्माण कर सकते हैं, जहाँ घृणा और हिंसा खत्म होती है, जहाँ  भ्रष्टचार का दंश एक न्याय और साझा करने की संस्कृति के चंगाई प्राप्त करता है। केवल ऐसा करने के द्वारा एक भविष्य की परिकल्पना की जा सकती है विशेषकर उन बहुत सारे युवाओं के लिए जिन्होंने अपनी आशा खो दी है।

मिस्सा बलिदान में पुरोहितगण
मिस्सा बलिदान में पुरोहितगण   (@Vatican Media)

नायक बनें

प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि आज हमें आशा से भविष्य की ओर देखने और भविष्य की आशा का निर्माण करने की जरुरत है। ऐसा करने से न डरें। पुनर्जीवित येसु, जो आप के संग मार्ग में चलते और रोटी के रूप में अपने को आप के लिए तोड़ते हैं, आप को पुनरूत्थान का साक्ष्य और एक नई मानवता तथा एक नये समाज के नायक होने हेतु प्रोत्साहित करते हैं। 

इस यात्रा में, प्रिय मित्रों, आप संत पापा की निकटता और उनकी प्रार्थना पर भरोसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी आप सभों पर विश्वास करता हूँ और सभों के प्रति कृतज्ञता के भाव प्रकट करता हूँ। मैं आप सभों को कुंवारी मरियम, मुकसीमा की मरियम की मध्यस्थता में सुपुर्द करता हूँ, जिससे वे आप को सदैव विश्वास, भरोसा और प्रेम में सुदृढ़ बनाये।

 

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19 अप्रैल 2026, 14:08