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संत पापा कैमरून में संत पापा कैमरून में 

संत पापा लियोः हम शांति का आलिंगन करें

संत पापा ने अफ्रीकी देशों की अपने प्रेरितिक यात्रा के दूसरे पड़ाव, तीसरे दिन कैमरून पहुँचे। वहाँ उन्होंने देश के राजनायिकों से भेंट करते हुए उन्हें अपने संदेश दिया।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने अफ्रीकी देशों की अपने प्रेरितक यात्रा के तीसरे दिन कैमरून के याऊंदे में प्रधानमंत्री और देश के राजनायिकों से मुलाकात की।

संत पापा ने देश के राजनायिकों को उनके गर्मजोशी स्वागत के लिए कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि कैमरून आना मुझे आनंद से भर देता है जो अपनी समृद्धि, संस्कृतियों, भाषा और परंपराओं के कारण बहुधा अपने में “सुक्ष्म अफ्रीका” कहलाती है। यह विविधता हमारे लिए कमजोरी नहीं बल्कि एक निधि है। यह अपने में भातृत्व की प्रतिज्ञा और हमेशा बने रहने वाली शांति की एक मज़बूत नींव है।

प्रेरितिक यात्रा का सार

संत पापा ने कहा, “मैं आप के बीच में एक चरवाहे और वार्ता, भ्रातृत्व और शांति के सेवक स्वरूप आता हूँ।” मेरी यह यात्रा पूरे कैमरूनवासियों के लिए संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के प्रेम की एक अभिव्यक्ति है, इसके साथ ही आप को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना की आप उत्साह और धैर्य में जन सामान्य की भलाई हेतु आगे बढ़ते जायें। वास्तव में, हम उस परिस्थिति में जीवनयापना करते हैं जहाँ निराशा और शक्तिहीनता की भावना हमारी चाहतों को कोढ़ग्रस्त कर देती है। हम अपने में न्याय की एक बड़ी भूख और प्यास को पाते हैं। यह हममें शांति स्थापना की प्यास उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि मेरी चाह आप सबों के हृदयों में पहुँचने की है विशेष कर युवाओं के निकट, जो अपने में एक अधिक न्यायपूर्ण विश्व का निर्माण करने की तमन्ना रखते हैं जो राजनीति को अपने में सम्माहित करता है। मैं वाटिकन और कैमरून के बीच सहयोगपूर्ण संबंध बढ़ने की चाह रखता हूँ जो आपसी सम्मान में स्थापित है, जिसमें हर मानव का सम्मान और धार्मिकता की स्वतंत्रता है। कैमरून अब भी मेरे पूवर्ती परमाधिकारियों द्वारा की गई प्रेरितिक यात्राओं की यादों को संजोये रखती है। संत पापा योहन पौल द्वितीय ने अफ्रीका के लोगों को आशा का संदेश दिया तो वहीं संत पापा बेनेदिक्त 16वें मेल-मिलाप, न्याय और शांति पर बल देने के साथ सरकार का ध्यान नैतिक उत्तरदायित्व की ओर कराया। संत पापा ने कहा कि मैं जानता हूँ कि ये आप के देश के इतिहास में महत्वपूर्ण क्षण हैं जो सेवा, एकता न्याय की स्थापना हेतु प्रेरित करते हैं। “हम अपने में इस भांति पूछ सकते हैं- अभी हम किस स्थिति में हैंॽ वे बातें जो कही गई थीं कहाँ तक फलहित हुई हैंॽ हमारे लिए क्या करना बाकी रह गया हैॽ”

संत पापा लियो का स्वागत
संत पापा लियो का स्वागत   (ANSA)

सेवा की प्रधानता

संत पापा लियो ने कहा कि सोलह सौ साल पहले, संत अगुस्टीन ने जिन बातों की चर्चा की वे आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं- “वे जो शासन करते हैं, वे उसकी सेवा करते हैं जो उन्हें आज्ञा देते प्रतीत होते हैं, क्योंकि वे शक्ति की चाह हेतु शासन नहीं करते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि वे दूसरों के प्रति अपने उत्तरदायित्व का एहसास करते हैं- इसलिए नहीं की उन्हें अपने अधिकार का घमंड होता है बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें दया से प्रेम है।” इस संदर्भ में, देश की सेवा करने का अर्थ है अपने को समर्पित करना, एक शुद्ध विचार और एक स्वच्छ चेतना में, जिससे देश में जन सामान्य की भलाई होती हो। यह अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों दोनों के लिए समर्पण और इसके साथ ही उनमें आपसी एकता को सम्माहित करता है।

संत पापा की अपील   

संत पापा ने कहा कि आज, बहुत सारे देशों की भांति, आप का देश भी जटिल समस्याओं का सामना कर रहा है। तनावों और हिंसा जिनके कारण उत्तरी-पश्चिम, दक्षिणी-पश्चिम और सदूर उत्तर के कई निश्चित प्रांत घोर तकलीफों- जान-माल की क्षति, परिवारों का विस्थापन, बच्चों का विद्यालय से वंचित होना और युवाओं की भविष्यहीन जिंदगी का सामना करते हैं। इन सारी संख्याओं के पीछे हम चेहरों, कहानियों और लोगों की टूटी आशाओं को पाते हैं। उन्होंने कहा कि इन नाटकीय परिस्थितियों में इस साल के शुरू में मैंने मानव परिवार को हिंसा के तर्क और युद्ध का परित्याग करते हुए शांति का आलिंगन करने का आहृवान किया जो प्रेम और न्याय में स्थापित है। एक शांति जो हथियारविहीन है, अर्थात जो भय, धमकी या हथियारों में आधारित नहीं है क्योंकि हम इसमें युद्धों के समाधान की योग्यता को पाते हैं, हृदयों को खोलना और विश्वास, संवेदना और आशा उत्पन्न करना। शांति को हम नारे तक ही सीमित नहीं रख सकते हैं- इसे हमारे जीवन का अंग होने की जरूरत है जहाँ हम सभी तरह की हिंसाओं, व्यक्तिगत और संस्थागत हिंसाओं का परित्याग करते हैं। यही कारण है, मैं इस बात पर जोर देता हूँ, “विश्व को शांति की प्यास है... युद्ध बहुत हुए, यह दर्दनाक रूप में मौत, विनाश और विस्थापन लेकर आता है।” यह पुकार हमारे लिए एक अपील के रूप में है जो किसी स्वार्थपूर्ण विभाजन के बदले एक सच्ची शांति प्रयास का स्वरुप है।

कैमरून के उत्साही निवासी
कैमरून के उत्साही निवासी   (ANSA)

शांति आलिंगन की मांग करती है

संत पापा ने कहा कि शांति, वास्तव में, आदेशित नहीं की जा सकती है बल्कि हमें इसका आलिंगन करते हुए जीने की जरुरत है। यह ईश्वर की ओर से एक उपहार है जो धैर्य और सभों के प्रयास से स्थापित किया जाता है। यह हरएक का उत्तरदायित्व है जिसकी शुरूआत नागर अधिकारियों से होती है। शासन करने का अर्थ अपने देश को साथ ही अपने पड़ोसी देशों को प्रेम करना है, “अपने पड़ोसी को अपने समान प्रेम करो” यह नियम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मामले में भी लागू होता है। शासन करने का अर्थ नागरिकों को सुनना है, उनकी बुद्धि तथा समस्याओं के निराकरण में दिये गये मदद का सम्मान करना। संत पापा फ्रांसिस ने इस संबंध में हमारा ध्यान इससे परे जाने की ओर इंगित कराया है, “सामाजिक नीतियों का लक्ष्य गरीबों के लिए एक नीति होनी चाहिए, लेकिन कभी भी गरीबों के साथ और कभी भी गरीबों के लिए नहीं, और ऐसे परियोजना का हिस्सा तो बिल्कुल नहीं जो लोगों को एक साथ मिलाता हो।”

नारियों की भूमिका

इस तरह के बदलाव का अनुपालन करना हमें नागर समाज को देश की एकता हेतु एक ज़रूरी ताकत स्वरूप पहचान देने की मांग करता है। कैमरून इस बदलाव के लिए तैयार है। संघों, महिला और युवा संगठन, व्यपार यूनियन, मानवीय राष्ट्रीय सरकारी संगठनों के साथ-साथ पारंपरिक और धार्मिक नेता, सभी सामाजिक शांति का ताना-बाना बुनने में अहम भूमिका निभाते हैं। वे पहले हैं जो तनाव उत्पन्न होने की स्थिति में उसका सामना करते हैं, वे विस्थापितों की देख-रेख करते हैं, उनकी सहायता करते, वार्ता और स्थानीय मध्यस्थता हेतु पहल को प्रोत्साहन देते हैं। स्थानीय समुदायों से उनका जुड़ा होना संघर्षों के कारणों का पता लगाने और उनके उचित निदान की पहचान करने में मदद करते हैं। नागर समाज हमारे लिए चेतना लाने, वार्ता की संस्कृति को प्रोत्साहित करने और विभिन्नताओं का सम्मान करने में सहायता करते हैं। ऐसा करने के द्वारा नागर समाज भविष्य की अनिश्चितता का सामना करने के लिए तैयार होता है। संत पापा ने इस संबंध में नारियों की भूमिका की प्रशंसा की। “वे बहुधा, दुर्भाग्यवश, पूर्वाग्रह और हिंसा के सर्वप्रथम भुक्तभोगी होते हैं, इसके बावजूद वे बिना थके शांति स्थापक हैं। शिक्षा, मध्यस्थता और सामाजिक ताने-बाने को पुनः स्थापित करने हेतु उनकी निष्ठा बेमिसाल है, और यह भ्रष्टाचार तथा सत्ता के गलत इस्तेमाल को रोकने में मदद करता है।” यह भी एक कारण है, कि हमें निर्णय लेने के संबंध में पूर्णरूपेण पहचान प्रदान करने की जरुरत है।

सैन्य द्वारा संत पापा का स्वागत
सैन्य द्वारा संत पापा का स्वागत   (ANSA)

अंतरात्मा की आवाज सुनें

समाज में इस उदारता भरे समर्पण की स्थिति में, हमें चाहिए कि हम जनसामान्य संसाधन के प्रबंधन में पारदर्शित और कानूनों का सम्मान करें जो भरोसा स्थापित करने हेतु जरूरी है। हमारे लिए अंतरात्मा की आवाज़ सुनने और एक साहसपूर्ण कदम बढ़ाने का समय आ गया है। सरकारी अधिकारियों को चाहिए कि वे सेतु का निर्माण करें न की विभाजन का कारण बनें, उन परिस्थितियों में भी जब असुरक्षा की बातें सामने आती हैं। सुरक्षा एक प्राथमिकता है, लेकिन इसे हमेशा मानव अधिकारों का सम्मान करते हुए, सख्ती और उदारता के साथ, सबसे कमज़ोर लोगों पर खास ध्यान देते हुए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सच्ची शांति तब आती है जब हर कोई सुरक्षित महसूस करता है, उसकी बात सुनी जाती है और विशेष कर अति संवेदनशीलों का सम्मान किया जाता है, जब कानून अमीर और ताकतवर लोगों की मनमानी के खिलाफ एक सुरक्षा का काम करता है।

अधिकारियों का दो साक्ष्य

भाइयो और बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि आप जो ऊँचे पदों पर आसीन हैं, आप से दो साक्ष्यों की मांग की जाती है। पहला, लोगों की सेवा, खासकर गरीबों की, राज्य के अलग-अलग संगठनों और प्रबंधनों के स्तर में सहयोग से हासिल होता है। दूसरा, यह अपनी संस्थागत और व्यवसायिक ज़िम्मेदारियों को ईमानदारी और सही व्यवहार के साथ निभाने से होता है। वास्तव में, शांति और न्याय कायम रखने के लिए, भ्रष्टाचार की ज़ंजीरों को तोड़ना होगा – जो अधिकारियों को बदनाम करती है और उसकी साख छीन लेती है। हृदयों को चाहिए कि वे मुनाफे की भावना से मुक्त हों, सच्चा मुनाफा पूरी मानवता के विकास से आता है, अर्थात उन सभी पहलुओं का संतुलित विकास जो इस धरती पर जीवन को एक वरदान बनाते हैं।

संंत पापा लियो और  कैमरून के प्रधानमंत्री
संंत पापा लियो और कैमरून के प्रधानमंत्री

युवा आशा की निशानी

संत पापा ने कहा कि कैमरून अपने में मानवीय, संस्कृति और आध्यात्मिक संसाधनों को वहन करता है जो मुसीबतों और संघर्षों पर विजय होने के लिए जरूरी है जिससे हम एक स्थायी भविष्य और समृद्धि की ओर बढ़ सकें। वार्ता, न्याय और समग्र विकास हेतु मिलकर प्रयास अतीत के घावों की चंगाई करते हुए लोगो में नवीनता लाये। “युवा देश और कलीसिया के लिए आशा की निशानी हैं। उनकी शक्ति और सृजनात्मकता अपने में अद्वितीय निधि है।” निश्चित रूप में जब बेरोजगारी और सामाजिक रूप में परित्याग किया जाना निराशा को जन्म देती जो हिंसी की ओर ले चलती है। इसलिए, युवाओं की शिक्षा, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में व्यय करना शांति के लिए एक उपयुक्त चुनाव करना है। यह दुनिया के दूसरे हिस्सों में शानदार हुनरों के पलायन को रोकने का एकमात्र तरीका है। यह एक मात्र साधन है जिसके द्वारा हम मादक प्रदार्थों, देह व्यपार और उदासीनता के संकटों से लड़ सकते हैं, जो बहुत से युवाओं की ज़िंदगी को नटकीय ढ़ंग से बर्बाद कर रहे हैं।

कैमरून के राजनायिकों संग संत पापा लियो 14वें

युवाओं की आध्यात्मिकता

संत पापा ने कैमरून के युवाओं में गहरी आध्यात्मिकता के लिए प्रशंसा के भाव व्यक्त किये जो बाज़ार की एकरूपता का विरोध करते हैं। यह शक्ति की एक निशानी है जो उनके सपनों को मूल्यवान बनता है, जो उन भविष्यवाणियों में निहित है जो उनकी प्रार्थनाओं और उनके हृदयों को पोषित करती है। जब वे कट्टरपंथ के ज़हर से प्रभावित नहीं होते हैं, तो धार्मिक परंपराएँ शांति, न्याय, माफ़ी और एकजुटता की प्रेरिताई उन्हें प्रेरित करती है। अलग-अलग धर्मों के बीच वार्ता को बढ़ावा और धार्मिक नेताओं के बीच मध्यस्थता द्वारा सुलह की पहल, राजनीति और कूटनीति नैतिक ताकतों को आकर्षित कर सकती है जो तनाव कम करने, कट्टरपंथ को रोकने और आपसी सम्मान और आदर की संस्कृति को बढ़ावा देने में सक्षम है। शिक्षा, स्वास्थ्य  और करूणा के कार्यों द्वारा काथलिक कलीसिया कैमरून में बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों की सेवा करना जारी रखना चाहती है। कलीसिया नागर अधिकारियों और मानवीय सम्मान और सुलह को बढ़ावा देने की कोशिशों में शामिल सभी लोगों के साथ नेक विचारों से से काम करने की भी चाहती है। जहाँ कहीं संभव हो, कलीसिया दूसरे देशों के साथ सहयोग को आसान बनाने और दुनिया भर में कैमरून के लोगों और उनके मूल समुदायों के बीच संबंधों को मज़बूत करने की चाह रखती है।

संत पापा ने कैमरून के लिए ईश्वर से आशीष की कामना करते हुए कहा कि वे नेताओं, सामाजिक नेतृत्वकर्ताओं की सहायता करें, राजनायिकों और पूरे देशवासियों को – ख्रीस्तीय गैर-ख्रीस्तीय नागरिकों को- ज्योति प्रदान करें, जिससे वे ईश्वर के राज्य का स्वागत कर सकें और एक साथ मिलकर न्याय और शांति की स्थापना कर सकें।

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15 अप्रैल 2026, 19:04