2026.04.18 Viaggio Apostolico in Camerun - Santa Messa presso lâ  Aeroporto di Yaoundé-Ville

संत पापा लियोः जीवन के हर मोड़ में येसु हमारे संग हैं

संत पापा लियो 14वें ने कैमरून की प्रेरितिक यात्रा के अंतिम पड़ाव में, योऊंदे के भिल्ले हवाई अड्डे पर पवित्र यूखारीस्तीय बलिदान अर्पित करते हुए येसु को अपने विश्वास का आधार बनाने का संदेश दिया जो सदैव हमारे जीवन में आते और हमारे संग चलते हैं।

वाटिकन सिटी

संत पापा लियो ने अफ्रीकी देशों की अपनी प्रेरित यात्रा के छटवें दिन याऊंदे के हवाई अड्डे में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत पापा लियो ने अपने प्रवचन में कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, आप सभों को शांति मिले। यह ख्रीस्त की शांति है जिनकी उपस्थिति हमारे जीवन की राह को प्रज्वलित करती और जीवन के तूफानों को शांत करती है।

यह ख्रीस्तयाग कैमरून में मेरी प्रेरितिक यात्रा का अंतिम पड़ाव है, अतः मैं आपके स्वागत और विश्वास की अभिव्यक्ति हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट करता हूँ जिसका अनुभव हमने एक साथ मिलकर किया।

संत पापा कैमरून में मिस्मा बलिदान के दौरान
संत पापा कैमरून में मिस्मा बलिदान के दौरान   (@Vatican Media)

ईश्वर हमें नहीं छोड़ते हैं

संत पापा लियो ने कहा कि जैसे कि हमने सुसमाचार में सुना, विश्वास हमें उथल-पुथल और क्लेशों से नहीं बचाता है। कभी-कभी, हम इसमें भय को अपने ऊपर हावी पाते हैं। यद्यपि, हम जानते हैं कि उन परिस्थितियों में भी, येसु हमें नहीं छोड़ते हैं, जैसे कि उन्होंने अपने शिष्यों को गलीलिया के समुद्र में नहीं छोड़ा।

चारों में से तीन सुसमाचार लेखक आज की घटना का जिक्र अपने तरीके से करते हैं, जो सुनने वालों को एक उपयुक्त संदेश देता है। संत मारकुस हमें कहते हैं कि येसु शिष्यों के पास उस घड़ी आते हैं जब वे तेज आंधी के कारण नाव खेने में कठिनाई का अनुभव करते हैं जबकि येसु का नाव में सवार होते ही तूफान थम जाता है। संत मत्ती इसमें कुछ जोड़ते हुए कहते हैं कि पेत्रुस लहरों पर चल कर येसु के पास आना चाहते हैं। वह नाव से निकलते लेकिन भय के कारण डूबने लगते हैं। येसु ख्रीस्त अपना हाथ बढ़ाते और उसे डूबने से बचाते हुए उन्हें अविश्वास के कारण फटकारते हैं।

कैमरून के विश्वासीगण
कैमरून के विश्वासीगण   (@Vatican Media)

येसु हमारे जीवन में आते हैं    

संत पापा ने संत योहन के सुसमाचार का जिक्र करते हुए कहा कि येसु पानी पर चलते हुए अपने शिष्यों के पास आते हैं, वे उन्हें कहते हैं “मैं ही हूँ, डरो मत।” सुसमाचार लेखक इस बात जोर देते हैं कि “रात हो चली थी”। यहूदी परंपरा के अनुसार “पानी” अपने गहरे और रहस्य रूप में पाताल लोक, अव्यवस्था, खतरे और मौत को हमारे लिए प्रस्तुत करता है। अंधरे के साथ, यह हमारे लिए बुरी शक्तियों को भी लाता है जिसे मानव अपनी शक्ति से विजय हासिल नहीं कर सकते हैं। वहीं यद्यपि मरूभूमि के चमत्कारों को याद करें, तो पानी से होकर पार होने को हम समझ सकते हैं, जहाँ ईश्वर अपने लोगों को गुलामी से मुक्त करते हैं।

मैं तुम्हारे साथ हूँ, डरो मत

सारी सदियों में, कलीसिया को हम कई तूफानों और तेज आधियों में पाते हैं। हम स्वयं तेबेरियस झील को पार करने में शिष्यों के भय और शांका का अनुभव कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में हम अपने को डूबता पाते हैं, जहाँ विपत्ति हममें हावी जान पड़ती है और सारी चीजें धूमिल नजर आती और हम अपने को कमजोर और अकेला पाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। येसु सदैव हमारे संग रहते हैं, वे बुराई की किसी भी शक्ति से शक्तिशाली हैं। हर तूफान में वे हमारे पास आते और इस बात को दुहराते हैं, “मैं तुम्हारे साथ हूँ, डरो मत।” यही कारण है कि हम अपने हर गिरने के बाद भी पुनः उठते, और कोई भी तूफान हमें नहीं रोक सकती है। इससे भी बढ़कर हम सदैव साहस और विश्वास में आगे बढ़ते हैं। इसके लिए हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं जैसे संत पापा फ्रांसिस कहते हैं, बहुत से “नर और नारियाँ...जो हमारे लोगों का सम्मान करते... कलीसिया का सम्मान करते...वे अपने जीवन, परिवार,कार्यों और विश्वास को आगे ले जाने में मजबूत हैं”।(धर्मशिक्षा, 14 मई 2014)

कैमरून के विश्वासीगण
कैमरून के विश्वासीगण   (@Vatican Media)

येसु का सहचर्य

येसु हमारे निकट आते हैं। वे तुरंत हमारी जीवन के तूफान को शांत नहीं करते बल्कि जोखिम की घड़ी में हमारे बीच आते हैं, वे हमें निमंत्रण देते हैं, हमारी खुशी और दुःखों में हमारे संग रहते, जैसे कि उन्होंने शिष्यों के संग उस नाव में किया। वे हमें निमंत्रण देते हैं कि हम दुःख सहने वालों के संग हम अपने को दूर न करें, बल्कि उनके निकट रहें, उनका आलिंगन करें। कोई भी अकेला अपने विपत्तियों का सामना करने हेतु न छोड़ा जाये। यही कारण है कि हर समुदाय को अपने में जरूरी एकता और सेवा की संरचनाओं का निर्माण करने की आवश्यकता है- चाहे वे सामाजिक, राजनीति, स्वास्थ्य या आर्थिक ही क्यों न हो- संकट की स्थिति में हर कोई अपनी ओर से अपनी योग्यता अनुसार जरूरतमंद चीजों की मांग कर सकता और सहायता दे सकता है। येसु के शब्द “यह मैं ही हूँ”, हमें इस बात की याद दिलाती है कि हरएक समाज जो मानवीय सम्मान पर आधारित है, हर किसी का योगदान मूल्यवान, महत्वपूर्ण और अद्वितीय होता है, चाहे दुनिया में उसका स्तर या परिस्थिति कैसी भी क्यों न हो।

संत पापा लियो का प्रवचन
संत पापा लियो का प्रवचन   (ANSA)

डरो मत

संत पापा ने कहा कि “डरो मत”, यह घोषणा, इस भांति हमारे लिए एक बड़े अर्थ को व्यक्त करता है, सामाजिक और राजनैतिक स्तर पर भी, यह हमारे लिए मुसीबतों और चुनौतियों का सामना करने हेतु एक प्रोत्साहन है-विशेषकर उनके लिए जो गरीबी और अन्याय से जुड़े हैं- इसके साथ ही एक सामाजिक उत्तरदायित्व के अर्थ में भी। विश्वास हमारे आध्यात्मिक जीवन को सामाजिक जीवन से अलग नहीं करता है। वास्तव में, यह ख्रीस्तीयों को दुनिया के संग वार्ता करने हेतु शक्ति प्रदान करता है, दूसरों की जरुरतों का प्रत्युत्तर देने, विशेष कर जो कमजोर हैं। एक समुदाय की मुक्ति हेतु व्यक्तिगत रुप में किया गया हमारा प्रयास काफी नहीं है, इसके बदले हमें एक सामुदायिक निष्ठा की जरुरत है, जिसमें हम आध्यात्मिक और सुसमाचार के नौतिक आयामों को स्थानीय संस्थानों और संरचनाओं में पाते हैं, जो दूसरों के लिए भलाई के साधन बनते हैं न कि युद्ध, स्वार्थ या संघर्षों के स्थल।

बलिपरिवर्तन की धर्मविधि
बलिपरिवर्तन की धर्मविधि   (@Vatican Media)

समस्या का समाधान-विचार-विमार्श से

संत पापा लियो ने कहा कि आज का पहला पाठ इसकी चर्चा करता है। हम कलीसिया के विकासित होने पर उसे संकट का सामना करता हुआ पाते हैं। शिष्यों की संख्या में तेजी से वृद्धि होती जा रही थी, जो करूणा से संबंधित  कार्यों में नई चुनौतियाँ उत्पन्न करती है, जिसका सामना प्रेरित स्वयं करने में अयोग्य होते हैं। भोजन के वितरण में कुछ लोगों की अवहेलना के कारण शिकायत में वृद्धि होती है, और अन्याय की अनुभूति एकता को प्रभावित करती है। गरीबों के लिए दैनिक सेवा शुरूआती कलीसिया के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य था, जिसका तत्पर्य सबसे कमजोर खास कर विधवाओं और अनाथों की सहायता करना था। यद्यपि, सेवा और अन्य सुसमाचार की घोषणा और शिक्षण के कार्यों में संतुलन बनाये रखने की जरूरत थी। इसके लिए एक समाधान अपने में सहज नहीं था। प्रेरितगण, इस तरह अपने में विचारमंथन करने को जमा होते और येसु की शिक्षा अनुसार मुद्दों पर वाद-विवाद करते हैं। वे प्रार्थना में एकजुट होते जिससे वे समस्याओं और नसमझी को जो अपने में बढ़ती जान पड़ रही थी समाधान कर सकें। इस भांति, वे एक नई चीज को लाते हैं, “अच्छे व्यक्तियों का चुनाव जो पवित्र आत्मा और प्रज्ञा से पोषित थे” वे उन पर हाथ रखते हुए उन्हें आध्यात्मिक प्रेरिताई हेतु नियुक्त करते हैं।” पवित्र आत्मा और प्रभावितों की बातों को ध्यान से सुनते हुए वे न केवल समुदाय के अंदर हुए विभाजन को दूर करते बल्कि उसे नयी चीजों से सुसज्जित करते हैं, जो संकट को समृद्धि और हरएक के लिए विकास के अवसर में बदल देती है।

संत पापा लियोः ईश्वर सदैव हमारे साथ हैं

संत पापा ने कहा कि कभी-कभी, परिवार और सामाजिक जीवन हम से साहसपूर्वक मानसिकता और संचरनाओं को बदलने की मांग करती है जिससे मानवीय सम्मान को सदैव प्राथमिकता दी जा सके और असमानता तथा परित्याग करने की स्थिति पर विजय प्राप्त की जा सके। क्योंकि, ईश्वर ने मनुष्य का रूप धारण करते हुए अपने को सबसे कमजोरों के संग खड़ा किया, यह गरीबों की देख-रेख हेतु एक विकल्प बनती है जो ख्रीस्तीय पहचान का एक मूलभूत भाग है। (एभेंजेली गैदियुम 198, प्रेरितिक पत्र, दिलएक्सित ते, 16-17)

ईश्वर को सदैव स्थान दें

प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि आज हम एक दूसरे को अलविदा कहते हैं। हर कोई अपने-अपने कामों में लौटता है और कलीसिया रूपी नाव अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ती है, हम ईश्वर की कृपा और हर व्यक्ति के निष्ठा हेतु कृतज्ञ व्यक्त करते हैं। हम सुन्दर अनुभूतियों के क्षणों को जिसे हमने एक दूसरे के संग रहते हुए अनुभव किया है, अपने हृदयों में सजीव बनाये रखें। यहाँ तक की कठिनाइयों के बीच में भी, हम येसु के लिए स्थान बनाना सदैव जारी रखें, उन्हें अपने को प्रज्वलित और प्रतिदिन के जीवन में उनकी उपस्थिति से नवीन बनने दें। कैमरून की कलीसिया सजीव, युवा और उपहारों तथा उत्साह से भरी है, यह अपनी विविधता में जोशीली और एकता में शानदार है। कुंवारी मरियम की सहायता से जो हमारी माता हैं, आप की खुशी सदैव फलदायी होती रहे। और आंधी, जो हमारे जीवन में कभी कम नहीं होती है, ईश्वर की आनंदमयी सेवा में विकसित होने का अवसर बने। आप अपने को एक दूसरे के लिए दें, सुनें, प्रार्थना करते हुए निरंतर विकसित होते रहें।

संत पापा का आशीर्वाद
संत पापा का आशीर्वाद   (@Vatican Media)

 

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18 अप्रैल 2026, 12:06