पोप लियो 14वें पोप लियो 14वें   (ANSA)

पोप लियो : अमाजोन की कलीसिया विविधता में एकता का चिन्ह

पोप लियो 14वें ने अमाजोन क्षेत्र में कलीसिया के कार्यों को सुसमाचार के संस्कृतीकरण का प्रोत्साहन दिया है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 17 मार्च 2026 (रेई) : पोप लियो 14वें ने मंगलवार को कोलंबिया के बोगोटा में हो रही अमाजोन (CEAMA) के कलीसियाई सम्मेलन की 6वीं सभा को एक वीडियो संदेश भेजा।

उन्होंने धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मसंघियों और लोकधर्मियों को पवित्र आत्मा को सुनने के इस विशेष समय में भाग लेने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया है, ताकि उस इलाके में बसे समुदायों के रास्ते को समझा जा सके।

अमाजोन में लोगों के भौतिक और आध्यात्मिक संघर्षों को याद करते हुए, पोप ने उन सभी लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया है जिनके साथ कलीसिया है।

उन्होंने कलीसियाई सभा को स्थानीय कलीसिया को आगे बढ़ाने के लिए सिनॉडल प्रेरितिक क्षितिज बनाने के मिशन का प्रोत्साहन दिया।

पोप लियो ने शिहुआहुआको पेड़ की तस्वीर दिखाई, जो बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है लेकिन दर्जनों मीटर ऊंचा होता है, एक हजार साल से ज्यादा जी सकता है, और जीव-जन्तुओं के जीवन के लिए एक पर्यावरण प्रदान करता है।

उन्होंने कहा, "इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि कलीसिया कैसा बनना चाहती है: विविधता में एकता का चिन्ह और एक सुरक्षित जगह जो जीवन देता और उसकी रक्षा करता है।"

पोप ने अमाजोन की कलीसिया को ख्रीस्त और उनके प्यार में विश्वास बनाए रखने के लिए आमंत्रित किया, जिसपर चिंतन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आज की परिस्थिति में अमाजोन में मौजूद कई सामाजिक, पर्यावरणीय, सांस्कृतिक और कलीसिया से जुड़ी चुनौतियों का सही जवाब देने की जरूरत है, जो गलत इस्तेमाल और शोषण की स्थिति से खतरे में हैं।”

चुनौतियों के बीच, कलीसिया को केरिग्मा (ख्रीस्त की मृत्यु एवं पुनरूत्थान द्वारा मुक्ति की घोषणा) और ख्रीस्त में नए जीवन की घोषणा करना है, क्योंकि वह उन लोगों के साथ है जो दुःख झेल रहे हैं और सृष्टि की रक्षा करना और जीवन का सम्मान करना चाहती है, खासकर मानव जीवन का।

पोप लियो ने स्थानीय संस्कृतियों में सुसमाचार को अपनाने की अहमियत पर जोर दिया, ताकि ख्रीस्त के रहस्य को और पूरी तरह से दिखाया और मनाया जा सके।

उन्होंने कहा, “संस्कृतिकरण एक मुश्किल लेकिन जरूरी रास्ता है।” उन्होंने क्वेरिदा अमाजोनिया का जिक्र करते हुए कहा, “‘हमें आत्मा की नवीनता को साहस के साथ स्वीकार करना चाहिए, जो हमेशा येसु ख्रीस्त के कभी न खत्म होनेवाले खजाने से नया बनाने में सक्षम है।”

अंत में, पोप लियो 14वें ने अमाजोन क्षेत्र के काथलिकों से कहा कि वे मसीह के मिशनरी शिष्यों के रूप में अपनी पहचान मजबूत करें।

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17 मार्च 2026, 16:59