मार्गदर्शक सिद्धांत रोगी की भलाई हो, सन्त पापा लियो 14वें
वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 27 मार्च 2026 (रेई, वाटिकन सिटी): वाटिकन में गुरुवार को इताली राष्ट्रीय प्रत्यारोपण केंद्र विशेषज्ञों को सम्बोधित कर सन्त पापा लियो 14 वें ने स्मरण दिलाया कि उनका मार्गदर्शक सिद्धांत' सदैव रोगी की भलाई होना चाहिये।
डॉन न्योखी का अंगदान
इटली के राष्ट्रीय प्रत्यारोपण केंद्र का आम सभा के लिये रोम में एकत्र विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए सन्त पापा लियो ने कहा कि उनकी उपस्थिति उन अनेक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं और स्वयं सेवकों के समर्पण की गवाही देती है, जो योग्यता और लगन के साथ, सबसे नाजुक पलों में मानव जीवन की सेवा करते हैं।
सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि राष्ट्रीय प्रत्यारोपण केंद्र के सदस्य इटली में पहले अंग दान के 70 साल पूरे होने का जश्न मना रहे थे, "जब धन्य डॉन कार्लो न्योखी ने कहा था कि उनकी मौत के बाद उनका कॉर्निया निकालकर उनके काम से जुड़े दो बहुत कम उम्र के लोगों को ट्रांसप्लांट कर दिया जाए, जिससे वे फिर से देख सकें।"
सन्त पापा ने कहा कि यह नेक कृत्य ऐसे समय में किया गया जब इस बारे में कानून की कमी थी, इसके बाद इताली समाज में बड़े पैमाने पर सोच-विचार हुआ और कानूनी परिभाषा की ओर एक रास्ता शुरू करने में मदद मिली।
सन्त पापा ने याद किया कि डॉन न्योखी के इस कदम के कुछ ही सप्ताह बाद सन्त पापा पियुस 12 वें ने इन मुद्दों पर शुरुआती नैतिक सोच पेश की, जिसमें उपचार के मकसद से अंग निकालने को सही माना गया तथा साथ ही मानवीय शरीर के सम्मान और इसमें शामिल लोगों के अधिकारों का भी ध्यान रखा गया।
कलीसिया की परम्परा
सन्त पापा लियो 14 वें ने कहा कि आरम्भ ही से कलीसिया का विचार ट्रांसप्लांट चिकित्सा के विकास के साथ-साथ रहा है तथा इसके मूल्य को पहचानते हुए ज़रूरी नैतिक मानदंडों को भी बताया गया है। उन्होंने याद किया कि तब से वैज्ञानिक अनुसन्धान और मानवीय लगन के बड़े विकास ने इताली प्रत्यारोपण नेटवर्क को अत्यधिक आवश्यक नतीजे हासिल करने में मदद की है, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिली। उन्होंने कहा कि कि इन नतीजों के साथ बहुत सारी विशेषज्ञताएं, ज़िम्मेदारी और भरोसे की संस्कृति जुड़ी हुई है जिसे बरकरार रखना और समर्थन दिया जाना अनिवार्य है।
सन्त पापा लियो याद किया कि सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने अपने विश्व पत्र "इवान्जेलियुम वीते" में कहा है कि जीवन की संस्कृति को प्रोत्साहन देने वाले कामों में से, "नैतिक रूप से सही तरीके से किया गया अंगदान विशेष सराहना का हकदार है।" उन्होंने आगे कहा, वास्तव में यह एक ऐसा काम है जो देने की उदारता के साथ जुड़ी नैतिक ज़िम्मेदारी से जोड़ता है। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा “मरणोपरान्त अंग दान को एक नेक और पुण्य का काम निरूपित करती है जिसे उदार एकजुटता दिखाने के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए,” तथापि, उन्होंने कहा कि इस कार्य में व्यक्तियों की सहमति और गरिमा के सम्मान की ज़रूरत को भी याद किया जाना चाहिये।
निरंतर सतर्कता
सन्त पापा लियो ने कहा, "मानव शरीर के किसी भी तरह के व्यापारीकरण से बचने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि अंग प्रत्यारोपण सही और पारदर्शी मानदण्डों के हिसाब से हो इसके लिये निरंतर सतर्कता और सावधानी की ज़रूरत है।" उन्होंने कहा कि प्रत्यारोपण चिकित्सा हमें याद दिलाती है कि प्रत्यारोपण के लिए देखभाल, भरोसा और आपसी ज़िम्मेदारी का रिश्ता एक ज़रूरी शर्त है। उन्होंने कहा कि यह भी याद रखा जाना चाहिये कि प्रत्यारोपण के ज़रिए जान बचाने की पूरी संभावना अंग दान करनेवाले की उदारता और दरियादिली पर निर्भर करती है" अस्तु, सभी कुछ को कीमत, कुशलता या स्वार्थ के तर्क पर न तोला जाये।
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