देवदूत प्रार्थना में पोप : येसु हमारी आध्यात्मिक प्यास बुझाते है
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, रविवार, 8 मार्च 2026 (रेई) : वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में चालीसा काल के तीसरे रविवार 8 मार्च को, पोप लियो 14वें ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, शुभ रविवार।
येसु और समारितानी स्त्री के बीच बातचीत, जन्म से अंधे की चंगाई और लाजरूस का जी उठना, कलीसिया के इतिहास में पहली शताब्दी से ही उन लोगों के रास्ते को आलोकित करते हैं जो पास्का में बपतिस्मा ग्रहण करेंगे और नये जीवन की शुरूआत करेंगे। सुसमाचार के ये महान पृष्ट जिसको हम इस रविवार से पढ़ना शुरू कर रहे हैं, नवदीक्षार्थियों के लिए हैं ताकि उन्हें ख्रीस्तीय बनने की उनकी यात्रा में मदद दिया जा सकें। लेकिन ये परिच्छेद पूरे विश्वासी समुदाय द्वारा भी सुने जाते हैं ताकि उन्हें अधिक सच्चे और प्रसन्नचित ख्रीस्तीय बनने में मदद दे सकें।
जीवन के स्रोत से मुलाकात
संत पापा ने कहा, “येसु हमारी प्यास बुझाते हैं। जिस प्रकार उन्होंने समारितानी स्त्री को सुझाव दिया था, उनसे मुलाकात हरेक इंसान के अंतरतम में "अनंत जीवन के लिए जल का एक स्रोत" प्रस्फूटित करता है।” (यो. 4:14)
लेकिन उस जल स्रोत तक पहुँचने में बहुत सारी बाधाएँ हैं। संत पापा ने कहा, “कितने लोग पूरी दुनिया में आज इस आध्यात्मिक स्रोत की खोज कर रहे हैं। इटी हिलेसन अपनी डायरी में लिखते हैं, “कभी-कभी मैं भी वहाँ पहुँच जाता हूँ।” लेकिन अक्सर कंकड़ और पत्थर कुँआ को बंद कर देते हैं और ईश्वर उसमें दब जाते हैं। इसलिए उसे फिर खोदना है।”
संत पापा ने चालीसा काल के इस समय में अपने दिल पर ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा, “प्यारे दोस्तो, अपने दिल को मुक्त करने में लगाई गई ऊर्जा से बढ़कर कोई ऊर्जा नहीं है। यही कारण है कि चालीसा काल एक वरदान है: हम तीसरा सप्ताह शुरू कर रहे हैं और अब हम इस यात्रा को और तेज कर सकते हैं!”
सुसमाचार में यह भी लिखा है कि उनके शिष्य आये और वे हैरान थे कि वे (येसु) एक महिला से बात कर रहे थे। (यो. 4:27) उनके मिशन को अपनाने में वे हिचकिचाते हैं, इसलिए प्रभु को उन्हें कहना पड़ता है: “क्या तुम नहीं कहते हो, ‘चार महीने और, फिर फसल आएगी’? लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ, अपने आस-पास देखो, और देखो कि खेत कटाई के लिए कैसे पक गए हैं।” (यो. 4:35)
सेवा का निमंत्रण
प्रभु अपनी कलीसिया से कहते हैं, “अपनी आँखें ऊपर उठाओ और ईश्वर के आश्चर्य को पहचानो!” खेतों में, कटाई से चार महीने पहले, लगभग कुछ भी नहीं दिखता। लेकिन जहाँ हम कुछ नहीं देखते, वहाँ कृपा पहले से ही काम कर रही होती है और उसके फसल तैयार होते हैं। फसल तो बहुत है: लेकिन मजदूर थोड़े हैं क्योंकि वे दूसरे कामों में व्यस्त हैं।
जबकि येसु ध्यान दे रहे हैं। रिवाज के अनुसार, उन्हें उस सामरी औरत को नजरअंदाज कर देना चाहिए था; इसके बजाय, येसु उससे बात करते हैं, उसकी बात सुनते हैं, और उसका सम्मान करते हैं – बिना किसी छिपे हुए मकसद और बिना किसी नफरत के।
महिला सुसमाचार प्रचारक
संत पापा ने कहा, “कलीसिया में कितने लोग इसी संवेदनशीलता, इसी तत्परता की तलाश करते हैं! और यह कितना सुंदर है जब हम उस व्यक्ति पर ध्यान देने के लिए समय का ध्यान नहीं रखते जिससे हम मिल रहे होते हैं, जैसा कि हम इस पाठ में देखते हैं। लोगों के अंदर तक जाने की ईश्वर की इच्छा से येसु आध्यात्मिक रूप से इतने भरे थे कि वे खाना भी भूल गए (यो. 4:34)। इस तरह, समारितानी स्त्री कई महिला सुसमाचार प्रचारकों में से पहली बनीं। उनकी गवाही के कारण, उनके गाँव के कई लोग, जिन्हें नफरत और वंचित किया गया था, येसु से मिलने आए, और उनमें भी विश्वास शुद्ध पानी की तरह उमड़ पड़ा।
शांति और एकता का आह्वान
संत पापा ने माता मरियम की याद करते हुए कहा, आज हम कलीसिया की माता मरियम से प्रार्थना करें कि हम येसु के साथ और येसु की तरह उन पुरुषों और महिलाओं की सेवा कर सकें जो सच्चाई और न्याय के प्यासे हैं। यह एक कलीसिया और दूसरी कलीसिया के बीच, “हमारे” और “उनके” बीच विरोध का समय नहीं है: जो लोग ईश्वर की उपासना करते हैं, वे शांति के पुरुष और महिला बनना चाहते हैं, जो आत्मा और सच्चाई से उनकी उपासना करते हैं (यो. 4:23-24)।
इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।
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