संत पापा लियोः बपतिस्मा प्राप्त ख्रीस्त का साक्ष्य दें
वाटकिन सिटी
संत पापा लियो 14वें अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह अवसर के पर वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात और सुस्वागतम्।
आज मैं पुनः लुमेन जेन्सियुम के दूसरे अध्याय पर चिंतन करना चाहूँगा जहाँ कलीसिया को हम ईश प्रजा के लिए समर्पित पाते हैं।
मुक्तिविधान की प्रजा, येसु ख्रीस्त की पुरोहिताई, नबूवत और राजकीय मनोभावों को अपने में धारण करते हुए उनके मुक्तिदायी कार्यों में सहभागी होती है। धर्मसभा के आचार्यो हमें यह शिक्षा देते हैं कि ख्रीस्त ने अपने नये और दिव्य विधान के द्वारा, याजकीय राज्य की स्थापना की है, जहाँ उनके शिष्य राजकीय पुरोहिताई का निर्माण करते हैं। विश्वासियों के लिए यह सामान्य पुरोहिताई बपतिस्मा के द्वारा प्राप्त होती है, जो हमें ईश्वर की आराधना आत्मा और सच्चाई में करने के योग्य बनाती है, और जिसके फलस्वरुप हम खुले रुप में यह घोषित करते हैं कि ईश्वर में विश्वास का दान हमें कलीसिया के द्वारा प्राप्त हुआ है। उससे भी बढ़कर, दृढ़करण संस्कार के द्वारा, सभी बपतिस्मा प्राप्त “और अधिक पूर्णतः में कलीसिया से संयुक्त होते हैं...और पवित्र आत्मा हमें एक विशेष शक्ति से पोषित करते हैं जिससे हम अपने विश्वास को, अपने कर्म और शब्दों, दोनों में सुरक्षित रखते हुए, ख्रीस्त के सच्चे साक्षी स्वरुप उसे अति निष्ठा में प्रसारित कर सकें।” यह अभियंजन हमारे सामान्य प्रेरिताई की आधारशिला है जो अभिषिक्तों और लोकधर्मियों की प्रेरिताई को एकता में पिरोती है।
बपतिस्मा और पवित्र आत्मा
इस संदर्भ में, संत पापा फ्रांसिस ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराया है, “ईश प्रजा की ओर देखना हमें इस बात की याद दिलाती है कि हम सभी लोकधर्मियों की तरह ईशमंदिर में प्रवेश करते हैं। यह प्रथम संस्कार है, जो सदैव हमारी पहचान बनती है, और जिसके लिए हमें सदैव गर्व करने की जरुरत है, और यह हमारे लिए बपतिस्मा है।” बपतिस्मा और पवित्र आत्मा में विलेपन द्वारा विश्वासी आध्यात्मिक निवास और एक पवित्र पुरोहिताई से अभियंजित होते हैं, जिसके द्वारा हममें से हर कोई ईश्वर की पवित्र विश्वासनीय प्रजा बनते हैं।
संत पापा लियो ने कहा कि राजकीय पुरोहिताई का कार्य कई रूपों में होता है, जिसका लक्ष्य हमारे पवित्रिकरण से है, जो सर्वप्रथम यूखारीस्तीय धर्मविधि में हमारी सहभागिता के द्वारा होती है। अपने प्रार्थना, उपवास और सक्रिय प्रेमपूर्ण कार्यों द्वारा हम इस भांति एक नये जीवन का साक्ष्य देते हैं जो ईश्वरीय कृपा में होता है। धर्मसभा जैसे इसे संक्षेप में प्रस्तुत करती है,“संस्कारों और सद्गुणों के माध्यम से ही पुरोहिताई समुदाय की पवित्र प्रकृति और सजीव संरचना को क्रियाशील किया जाता है”।
आस्था का अर्थ
धर्मसभा के आचार्य इसके बाद हमें इस बात की शिक्षा देते हैं कि कि ईश प्रजा ख्रीस्त के नबूवत प्रेरिताई में भी सहभागी होती है। इस संदर्भ में, महत्वपूर्ण विषय आस्था का अर्थ और विश्वासियों की आस्था को हमारे लिए परिभाषित किया जाता है। धर्मसभा में धर्मसिद्धांत हेतु गठित समिति, आस्था के अर्थ को सुस्पष्ट करते हुए कहती है, कि यह “कलीसिया की सम्पूर्ण योग्यता की भांति है, जिसके द्वारा, वह अपने विश्वास में, रहस्य की अभिव्यक्त को पहचानती है जो उसे मिली है, वह विश्वास के संबंध में सत्य और झूठ के बीच अंतर स्थापित कर सकती है, इसके साथ ही वह उसकी गहराई में जाती और उसे पूर्णरूपेण अपने जीवन में लागू करती है।” आस्था का अर्थ इस भांति व्यक्तिगत रुप में विश्वासियों से संबंधित है जो उनके स्वयं का अधिकार स्वरूप नहीं, बल्कि यह एक सम्पूर्ण ईश प्रजा के सद्स्यों का स्वरूप है।
विश्वास के संदर्भ में कलीसिया अभ्रमित है
लुमेन जेन्सियुम पहले भाग पर नहीं बल्कि पिछले तथ्य पर ध्यान केन्द्रित करते हुए, उसे कलीसिया की अचूकता से संदर्भित करता है जो रोम के परमाधिकारी संत पापा में अंतर्निहित है जिसके द्वारा उसकी सेवा की जाती है। “विश्वासियों का पूरा समुदाय, जो अपने अभियंजन में पवित्र हैं, अपने विश्वास के संबंध में चूक नहीं सकते हैं, वे इस विशेषत को सम्पूर्ण ईश प्रजा की दिव्य आस्था में अभिव्यक्त करते हैं, जहाँ हम धर्माध्यक्ष से लेकर लोकधर्मियों में अंतिम विश्वासी को, विश्वास और नौतिकता से संबंधित सार्वभौमिक सहमति में पाते हैं।” कलीसिया, इस भांति, विश्वासियों की एकता का स्वरुप- जिसमें पुरोहित स्वाभाविक रुप में शामिल हैं-विश्वास के संदर्भ में भम्रित नहीं हो सकती है। यह पवित्र आत्मा के अभिषेक पर आधारित है, जो ईश प्रजा में विश्वास की अलौकिक भावना है, जो विश्वासियों की आम सहमति में व्यक्त होती है। इस एकता में, जिसे कलीसियाई धर्मसिद्धांत अपने में सुरक्षित रखती है, यह पता चलता है कि हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति सुसमाचार प्रचार का एक सक्रिय सदस्य है, जो निरंतर ख्रीस्त का साक्ष्य देने हेतु बुलाया गया है, उसी अनुरूप में जैसे कि ख्रीस्त ने पूरी कलीसिया को प्रेरितिक उपाहर से भर दिया है।
पवित्र आत्मा का उपहार
संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा, जो हमारे लिए पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त से आते हैं, हर विश्वासी के लिए उसकी क्षमता अनुरूप विशेष उपहारों को प्रदान करते हैं। उन उपहारों के माध्यम से वे उन्हें विभिन्न कार्यों और उत्तरदायित्वों को वहन करने के योग्य बनाते हैं जो कलीसिया में नवीनता लाती और उसके निर्माण हेतु मदद करती है। इस करिश्माई ज़िंदादिली को हम एक खास रुप में समर्पित जीवन में पाते हैं, जो कृपा के कार्य में लगातार बढ़ती और फलता-फूलती है। कलीसिया के संगठन भी, आध्यात्मिक फलों की विभिन्नता और फलदायी होने का एक शानदार उदाहरण हैं, जो ईश प्रजा को प्रेरित करता है।
प्रिय मित्रो, आइए हम कृतज्ञता के भाव में, इस बात का एहसास करें कि ईश्वर ने हमें लोगों के जीवन का अंग बनने का उपहार दिया है, और साथ ही इस तोहफ़े के संग जुड़ी ज़िम्मेदारी भी।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here
