पोप लियो 14वें लेबनान में अंतिम ख्रीस्तयाग के दौरान पोप लियो 14वें लेबनान में अंतिम ख्रीस्तयाग के दौरान   (ANSA)

पोप ने लेबनान के ख्रीस्तीयों को भाईचारा व शांति की खोज का प्रोत्साहन दिया

बेरूत वॉटरफ्रंट में ख्रीस्तयाग के अंत में पोप लियो 14वें ने लेबनान एवं मध्यपूर्व में शांति की की तथा लेबनान के विश्वासियों को प्रोत्साहन दिया कि वे अस्थिरता एवं पीड़ा के सामने साहसी बने रहें।

वाटिकन न्यूज

बेरूत, मंगलवार, 2 दिसंबर 2025 (रेई) : अपनी प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर विदा लेने से पहले पोप लियो 14वें ने मंगलवार सुबह बेरूत में ख्रीस्तयाग के अंत में, सभी से शांति के लिए काम करने की अपील की।

यह याद करते हुए कि वे आशा के तीर्थयात्री के तौर पर लेबनान आए थे, पोप ने “इस प्यारी भूमि, जो अस्थिरता, युद्धों और दुःखों से भरी है” के लिए शांति के वरदान के लिए प्रार्थना की।

उन्होंने कहा, “इस जुबली वर्ष में की गई मेरी पहली प्ररितिक यात्रा के इन दिनों में, मैं मध्यपूर्व में आशा के एक तीर्थयात्री के रूप में आना चाहता था, और ईश्वर से इस प्यारी भूमि के लिए शांति का वरदान माँगना चाहता था, जो अस्थिरता, युद्धों और दुखों से भरी है।”

प्यारे ख्रीस्तीयो, जब शांति के लिए आपकी कोशिशों के नतीजे आने में देर हो, तो मैं आपको आने वाले प्रभु की ओर अपनी नज़रें उठाने के लिए आमंत्रित करता हूँ! आइए हम उम्मीद और हिम्मत के साथ उनकी ओर देखें, और सभी को साथ रहने, भाईचारे और शांति के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करें। शांति के कारीगर बनें, शांति के संदेशवाहक बनें, शांति के गवाह बनें!

मध्यपूर्व को बदले और हिंसा की सोच को छोड़ने, राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक मतभेदों को दूर करने और मेल-मिलाप एवं शांति के नाम पर नया अध्याय खोलने हेतु नए तरीकों की जरूरत है। युद्ध के डर में आपसी दुश्मनी और तबाही का रास्ता बहुत लंबा हो चुका है, जिसके बुरे नतीजे सबकी आँखों के सामने हैं। हमें रास्ता बदलने की जरूरत है, हमें शांति के लिए अपने दिलों को तैयार करने की आवश्यकता है।

विश्वभर में पीड़ित लोगों की याद करते हुए संत पापा ने कहा, इस चौराहे से, मैं मध्यपूर्व और युद्ध की वजह से परेशान सभी लोगों के लिए प्रार्थना करता हूँ। मैं गिनी-बिसाऊ में मौजूदा राजनीतिक झगड़ों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भी उम्मीद भरी प्रार्थना करता हूँ। मैं हांगकांग में लगी आग के पीड़ितों और उनके प्यारे परिवारों को भी नहीं भूलता हूँ।

मैं विशेषकर, प्यारे लेबनान के लिए प्रार्थना करता हूँ! मैं एक बार फिर अंतराष्ट्रीय समुदाय से गुज़ारिश करता हूँ कि वे बातचीत और मेल-मिलाप की प्रक्रिया को बढ़ावा देने में कोई कसर न छोड़ें। मैं यहाँ और उन सभी देशों में जहाँ युद्ध और हिंसा है: राजनीतिक और सामाजिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से दिल से अपील करता हूँ कि अपने लोगों की पुकार सुनें जो शांति की मांग कर रहे हैं! आइए, हम सब खुद को जीवन, आम भलाई और लोगों के पूरे विकास की सेवा में लगाएँ।

अंत में, संत पापा ने लेबनान के सभी ख्रीस्तीयों एवं नागरियों से कहा: हिम्मत रखें! पूरी कलीसिया आपको प्यार करती और सराहना के साथ देखती है। धन्य कुँवारी मरियम, हरिसा की हमारी माता, हमेशा आपकी रक्षा करें।

इन्हीं आशा एवं प्रोत्साहन भरे शब्दों के साथ संत पापा लियो 14वें ने तुर्की और लेबनान की अपनी पहली प्रेरितिक यात्रा समाप्त की। उसके बाद बेरूत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा गये। जहाँ लेबनान के राष्ट्रपति एवं अन्य अधिकारियों ने उन्हें बिदाई दी। पोप लेबनान से विदा होकर लगभग 4.10 बजे रोम पहुँच रहे हैं।

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02 दिसंबर 2025, 15:51