संत पापाः ख्रीस्त जयंती- विश्वास, करूणा और आशा का पर्व
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो ने ख्रीस्त जयंती महापर्व का जागरण मिस्सा बलिदान वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में अर्पित किया।
पृथ्वी के लोगों ने, हजारों वर्षों से आकाश की ओर निगाहें फेरते हुए, शांत तारों को नाम दिया और उन पर निशानियों की खोज की है। अपनी आशा में उन्होंने आकाश में भविष्य की घटनाओं को पढ़ने की कोशिश की, एक उस सच्चाई की खोज करते हुए जो नीचे उनके घरों में अनुपस्थित था। फिर भी, अपने में खोये, मानो वे अंधकार को समझ रहें हो, वे अपने ही भविष्यवाणियों में भ्रामित रहे। इस रात में, यद्यपि “अंधेरे में चलने वालों ने एक ज्योति देखी है, अंधकारमय प्रदेश में रहने वालों में एक ज्योति का उदय हुआ है।” (इसा.9.2)
तारे में नये जीवन की ज्योति
संत पापा लियो ने कहा कि वह तारा जो दुनिया को आश्चर्यचकित करता है, एक नई चिंगारी जो जीवन से जगमगा रही है: “आज दाऊद के घराने में तुम्हारे लिए एक मुक्तिदाता का जन्म हुआ है, (लूका.2.11)। समय और स्थान में, जहाँ हम रहते हैं, वे हमारे बीच वे आते हैं जिनके बिना हम जीवित नहीं रह सकते हैं। वे जो हमें जीवन देते हैं हमारे बीच में निवास करते हैं। वे अपनी मुक्ति की ज्योति से रात को प्रकाशित करते हैं। ऐसा कोई भी अंधकार नहीं जिसे वह तारा प्रकाशित नहीं करता हो, क्योंकि उसकी ज्योति से सारी मानवता एक नये जीवन के उदय और अनंत जीवन को प्राप्त करती है।
यह एम्मानुएल येसु का जन्म है। पुत्र के मानव बनने में ईश्वर हमें और कुछ नहीं बल्कि स्वयं अपने आप को देते हैं, जिससे वे हमें सारी बुराइयों से बचा सकें और शुद्ध करते हुए खुद अपना बना सकें। रात्रि के अंधेरे में जिसका जन्म होता है वह हमें अंधकार से मुक्ति दिलाते हैं। सुबह की ज्योति को अब पृथ्वी से दूर नहीं, बल्कि पास के अस्तबल में झुककर खोजा जा सकता है।
बालक स्वरुप येसु हमारे बीच में
संत पापा ने कहा कि अंधेरी दुनिया के लिए एक स्पष्ट निशानी वास्तव में, “एक बालक है जो कपड़ों में लपेटा चरनी में लेटा है।” मुक्तिदाता को खोजने हेतु एक व्यक्ति को ऊपर देखने की जरुरत नहीं बल्कि नीचे देखने की आवश्यकता है, सर्वशक्तिमान ईश्वर शक्तिहीनता में नवजात बालक स्वरुप हमारे बीच में आते हैं दिव्य वचन की वाक्पटुता एक बच्चे की पहली चीख में गूंजती है; आत्मा की पवित्रता उस छोटे से शरीर में चमकती है, जो ताज़े धुले और कपड़ों में लिपटे हुए हैं। उसे देखभाल और सेवा की ज़रूरत है जिसे पिता ईश्वर इतिहास में हम सभी भाइयों और बहनों के साथ साझा करते हैं जो ईश्वरीय दिव्यता है। इस बच्चे से निकलने वाली दिव्य ज्योति हमें हर नए जीवन में मानवता को पहचानने में मदद करती है।
लोगों को स्थान, येसु को स्थान
हमारी दृष्टिहीनता की चंगाई हेतु ईश्वर अपने को हर मानव में व्यक्त करने का चुनाव करते हैं, वे अपने असल रुप को व्यक्त करते हैं जो उस प्रेम की योजना अनुरूप दुनिया की सृष्टि से शुरू हुई। जब तक गलती की रात में ईश्वर की दिव्य सच्चाई छिपती रहेगी, तब तक “दूसरों के लिए भी कोई जगह नहीं होगा, बच्चों के लिए, गरीबों के लिए, अजनबियों के लिए”। संत पापा बेनेदिक्त 16वें के ये वचन पृथ्वी पर हमारे समय में इस बात को उजागर करते हैं कि ईश्वर के लिए कोई स्थान नहीं रहता यदि हम मानव को कोई स्थान नहीं देते हैं- एक को अस्वीकार करना दूसरे को अस्वीकार करना है। फिर भी, जहाँ मानव के लिए जगह है, वहाँ हम ईश्वर के लिए जगह को पाते हैं, इस भांति एक गौशाला भी मंदिर से अधिक पवित्र स्थल बनता है, और मरियम का गर्भ नये विधान का संदूक बना जाता है।
येसु में आशा के शब्द
प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा ने कहा कि हम ख्रीस्त जयंती की प्रज्ञा पर आश्चर्य करें। बालक येसु में, ईश्वर दुनिया को एक नया जीवन प्रदान करते हैं- अपना जीवन जो सबों के लिए है। वे हमें हर समस्या के लिए एक बेहतर समाधान नहीं देते हैं,बल्कि एक प्रेम कहनी जो हमें अपनी ओर खींचती है। लोगों की प्रतीक्षा के उत्तर में, वे एक बालक को भेजते हैं जो उनके लिए आशा का शब्द बने। गरीबों के दुःखों के सामने, वे एक निसहाय को भेजते जो पुनः उठने के लिए शक्ति बनते हैं, हिंसा और जुल्म के सामने वे एक छोटी ज्योति जलाते हैं जो दुनिया के सारे लोगों को मुक्ति प्रदान करती है। जैसे संत अगुस्टीन कहते हैं, “मानव के घमंड ने तुम्हें इतना दबा दिया था कि सिर्फ़ ईश्वर की विनम्रता ही तुम्हें फिर से ऊपर उठा सकती थी”। एक विकृत अर्थव्यवस्था मानव को सिर्फ़ वस्तु समझने पर मजबूर करती है, वहीं ईश्वर हमारी तरह बनते हैं, और हर मानव के अनंत सम्मान को प्रकट करते हैं। मानवता जबकि ईश्वर बनने की चाह रखती है जिससे वह दूसरों पर शासन कर सके, ईश्वर मानव बनने का चुनाव करते हैं जिससे वे हमें सारी गुलामी से मुक्त कर सकें। क्या यह प्रेम हमारे इतिहास को बदलने के लिए काफी होगा?
प्रेम की धड़कन
संत पापा ने कहा कि इसका उत्तर हमारे लिए तब आयेगा जब हम भयनाक रात्री से नये जीवन की ज्योति में प्रवेश करेंगे और चरवाहों की भांति, बालक येसु पर चिंतन करेंगे। बेतलेहम के गोशाले में, जहाँ मरियम और योसेफ नये जन्मे बालक को पूरे आश्चर्य भरे हृदय से देखते हैं, तारों से भरा आसमान “स्वर्गीय सेनाओं की भीड़” में बदल जाता है। वे सारे हथियारहीन और निहत्थे लोग हैं क्योंकि वे ईश्वर की महिमा गाते हैं, जिसकी सच्ची अभिव्यक्ति पृथ्वी पर शांति है। वास्तव में, हम ख्रीस्त के हृदय में हम प्रेम की धड़कन को पाते हैं जो स्वर्ग और पृथ्वी, सृष्टिकर्ता और सृष्टि प्राणी को संयुक्त करता है।
कृतज्ञता और प्रेरिताई
यही कारण है कि ठीक एक साल पहले, संत पापा फ्रांसिस ने इस बात पर जोर दिया कि येसु का जन्म हमारे अंदर “जहां भी उम्मीद खो गई है, वहां उम्मीद लाने का उपहार और कार्य” है, क्योंकि “उनके साथ, खुशी बढ़ती है, उनके संग ज़िंदगी बदलती है, उनके साथ, आशा हमें निराश नहीं करती है।” इन शब्दों के द्वारा पवित्र साल की शुरूआत हुई। अब, जयंती अपनी समापन को आती है, ख्रीस्त जयंती हमारे लिए कृतज्ञता और प्रेरिताई का समय बनता है, कृतज्ञता उपहारों से लिए जिन्हें हमने पाया है और प्रेरिताई उसका साक्ष्य दुनिया को देने के लिए। जैसे कि स्तोत्र रचिता गाते हैं, “भजन गाते हुए प्रभु का नाम धन्य कहो। प्रतिदिन उसका मुक्तिविधान घोषित करो। सभी राष्ट्रों में उसकी महिमा का बखान करो।” (स्त्रो. 96.2-3)
ख्रीस्त जयंतीः विश्वास, करूणा और आशा का त्योहार
प्रिय भाइयो एवं बहनों, संत पापा ने कहा कि शब्द के शरीरधारण पर चिंतन करना सारी कलीसिया में एक नई और सच्ची घोषणा को जागृत करती है। आइए हम ख्रीस्त जयंती की खुशी को घोषित करें जो हमारे लिए विश्वास, करूणा और आशा का त्योहार है। यह हमारे लिए विश्वास का त्योहार है क्योंकि ईश्वर मानव बनते, कुंवारी से जन्म लेते हैं। यह करूणा का पर्व है क्योंकि मुक्तिदाता पुत्र के उपहार को हम उनके भ्रातृत्वमय स्वयं के दान में अनुभव करते हैं। यह आशा का महोत्सव है क्योंकि बालक येसु हमारे अंदर शांति को प्रज्वलित करते और हमें उसका संदेशवाहक बनाते हैं। इन सारे गुणों को अपने हृदय में लिए, रात्रि से भयविहीन, हम एक नये दिन की सुबह से मिलने हेतु आगे बढ़ें।
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