संत पापा लियोः येसु का जन्म शांति का जन्म है
वाटिकन सिटी
संत पापा ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में एकत्रित सभी विश्वासियों और तीर्थयात्री का अभिवादन करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनो, खुश जन्म पर्व की शुभकामनाएं।
“हम सब ईश्वर में आनंद मनायें, क्योंकि दुनिया में हमारे मुक्तिदाता का जन्म हुआ है। आज, स्वर्ग से सच्ची खुशी हमारे लिए उतर कर आई है।” हम ख्रीस्त जयंती के जागरण धर्मविधि में यह गाते और गिरजाघर में बेतलेहम की यह गूंज ध्वनित होती हैःकुंवारी मरियम से जन्मा ईश्वर, पिता की ओर से हमें पाप और मृत्यु से बचाने को भेजा गया। वास्तव में, वे हमारी शांति हैं, उन्होंने घृणा और शत्रुता पर अपने करूणामय प्रेम से विजय पायी है। यही कारण है, “ईश्वर का जन्म शांति का जन्म है।”
येसु का जन्म
संत पापा लियो ने कहा कि येसु का जन्म गोशाले में हुआ क्योंकि उसके लिए सराय में जगह नहीं थी। जैसे ही उसका जन्म हुआ उसकी मां मरियम “उसे कपड़े में लपेटकर चरनी में सुला देती है।” (लूका. 2.7) ईश्वर का पुत्र, जिनके द्वारा सारी चीजों की सृष्टि हुई, उनका स्वागत नहीं किया गया, और गरीबों के एक गोशाला में उनकी चरनी रही।
पिता के दिव्य शब्द जिसे आकाश अपने में समाहित नहीं कर सकता है इस भांति दुनिया में आने का चुनाव करते हें। प्रेम के खातिर, वह एक नारी से उत्पन्न होने की चाह रखते हैं और इस भांति वे हमारी मानवता में सहभागी होतें है। प्रेम के खातिर वह द्ररिद्रता और परित्यक्त होना स्वीकारते हैं, वे अपनी पहचान उनके संग स्थापित करते हैं जो अपने में छोड़े दिये और अलग कर दिये गये हैं।
ईश्वर से सहयोग करें
येसु के जन्म में हम मूलभूत निर्णयों की झलक पाते हैं जो ईश पुत्र के पूरे जीवन को दिशा निर्देशन प्रदान करता है, यहाँ तक कि क्रूस पर उनकी मृत्यु तक को- वे हमें पापों में नहीं छोड़ने का निर्णय लेते हैं, बल्कि वे हमारे खातिर उन्हें अपने ऊपर लेते हैं। केवल वे हमारे लिए ऐसा कर सकते हैं। वहीं, यद्यपि वे हमें यह प्रकट करते हैं कि हम अकेले क्या कर सकते हैं, जो हमारा स्वयं के उत्तरदायित्व को वहन करना है। वास्तव में, ईश्वर जिन्होंने हमें बिना हमारी सहायता के बनाया, हमारी मदद के बिना हमें नहीं बचा सकते हैं, अर्थात हमारी स्वतंत्रता में प्रेम की चाह रखे बिना वे ऐसा नहीं कर सकते हैं। वे जो प्रेम नहीं करते अपने में बचाये नहीं जा सकते हैं, वे अपने में खो जाते हैं। और वे जो अपने भाई-बहनों को जिसे वे देखते प्रेम नहीं करते, ईश्वर को प्रेम नहीं कर सकते हैं, जिन्हें वे नहीं देखते हैं। (1 योह 4.20)
उत्तरदायित्व का मार्ग
प्रिय भाइयो और बहनों, संत पापा लियो ने कहा कि उत्तरदायित्व शांति का निश्चित मार्ग है। यदि हममें से हर कोई, हर स्तर पर दूसरों पर दोष लगाना बंद करेंगे और इसके बदले अपनी गलतियों को स्वीकार करेंगे, ईश्वर से क्षमा की याचना करेंगे और यदि सचमुच में दूसरों के दुःखों में प्रवेश करते हुए कमजोरों और प्रताड़ित लोगों के संग एकता के भाव प्रकट करेंगे तो दुनिया बदल जायेगी।
उन्होंने कहा कि येसु ख्रीस्त हमारी शांति हैं क्योंकि उन्होंने सर्वप्रथम हमें पापों से मुक्त किया और इसलिए भी क्योंकि वे हमें संघर्षों पर- सारी युद्धों चाहे वे अंतरराष्ट्रीय हों या राष्ट्रीय विजय होने का मार्ग बतलाते हैं। पाप से मुक्त हुए बिना एक हृदय, एक हृदय जो क्षमा किया गया है, हम अपने में शांति के नर और नारी या शांति निर्माता नहीं हो सकते हैं। यही कारण है कि येसु बेतलेहम में जन्मे और क्रूस पर मरे- जिससे वे हमें पापों से मुक्त कर सकें। वे हमारे मुक्तिदाता है। उनकी कृपा से, हम सब अपने में उन चीजों का परित्याग करें जो घृणा, हिंसा और प्रताड़ना के कारण हैं, और हम वार्ता, शांति और मेल-मिलाप का अभ्यास करें।
मध्य पूर्वी प्रांत को शांति
महोत्सव के इस दिन में, संत पापा ने कहा कि मैं पितातुल्य और एक गर्मजोशी शुभकामनाएं उन सभी ख्रीस्तीयों के लिए प्रेषित करता हूँ जो विशेषकर मध्य पूर्वी प्रांत में रहते हैं, जिनसे मेरी मुलाकात हाल ही की प्रथम प्रेरितिक यात्रा में हुई। उनसे बातें करते हुए मैंने उनके भय भरी बातों को सुना और मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि उन पर हावी होने वाली ताकत के सामने वे कितने बेबस हैं। आज बेतलेहम में पैदा हुआ बच्चा वही येसु है जो कहता है: “मुझमें तुम्हें शांति मिले। दुनिया में तुम्हारी तकलीफ़ें हैं, लेकिन हिम्मत रखो, मैंने दुनिया पर विजय पाई है।” (यो.16.33)
युद्धग्रस्त देशों की याद
संत पापा ने लेबनान, फिलस्तीन, इस्रराएल और सीरिया की याद करते हुए कहा कि हम ईश्वर से उनके लिए न्याय शांति और व्यवस्था हेतु प्रार्थना करें, इन दिव्य वचनों पर विश्वास करते हुए, “धार्मिकता शांति उत्पन्न करेगी और न्याय चिरस्थायी सुरक्षा।” (इसा.32:17)
उन्होंने कहा कि हम पूरे यूरोप महादेश को शांति के राजकुमार को अर्पित करें, यह प्रार्थना करते हुए कि वे सामुदायिकता और सहयोग के भाव को निरंतर प्रेरित करें, जिससे वे अपने ख्रीस्तीय जड़ों और इतिहास के प्रति वफ़ादारी में, और ज़रूरतमंदों के संग एकजुटता और उन्हें स्वीकार करते हुए, समुदाय और सहयोग की भावना से प्रेरित होते रहें। आइए हम विशेष रुप से प्रताड़ित यूक्रेन के लिए प्रार्थना करें, जिससे हथियारों की गड़गड़हाट बंद हो और वे जो इसमें शामिल हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदायों के सहयोग और निष्ठा से, सच्ची, सीधे तौर पर और सम्मानजनक वार्ता करने की हिम्मत जुटा सकें।
शांति और सांत्वना की कामना
संत पापा लियो ने कहा कि बेतलेहम के बालक से, हम दुनिया में चल रहे सभी युद्धों से पीड़ितों के लिए शांति और सांत्वना के लिए प्रार्थना करते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें भुला दिया गया है, और वे जो अन्याय, राजनीतिक अस्थिरता, धार्मिक उत्पीड़न और आतंकवाद के कारण पीड़ित हैं। मैं सूडान, दक्षिण सूडान, माली, बुर्किना फासो और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो के अपने भाइयों और बहनों को खास तौर पर याद करता हूँ।
आशा की जयंती के अंतिम दिनों में, आइए हम मानव बने ईश्वर से हैत्ती के प्रिय लोगों के लिए प्रार्थना करें, जिससे देश में व्याप्त सभी तरह की हिंसा थम सके और शांति तथा मेल-मिलाप के मार्ग प्रशस्त हो सके।
संत पापा ने लातीनी अमेरीका की याद करते हुए वहाँ के राजनेताओं के लिए प्रार्थना की जिन पर देश की जिम्मेदारियाँ हैं, जिससे वे कई चुनौतियों का सामना करते हुए, विचारधारा और पार्टी की सोच से ऊपर उठे तथा आम भलाई के लिए बातचीत को बढ़ावा दे सकें।
हम शांति के राजकुमार से म्यांमर में शांति की ज्योति हेतु प्रार्थना करें जिससे म्यांमार में मेल-मिलाप की रोशनी के साथ, नई पीढ़ी में उम्मीद जगे, जिससे सभी लोगों को शांति के रास्ते में निर्देशित किया जा सके और उन्हें सहचर्य मिल सके जो बिना घर, सुरक्षा या कल के भरोसे में जी रहे हैं।
थाईलैंड और कम्बोडिया
संत पापा ने ईश्वर से प्रार्थना की थाईलैंड और कम्बोडिया में प्राचीन मित्रता स्थापित हो सके और दल जो इस कार्य में संलग्न हैं वे निरंतर मेल-मिलाप और शांति कायम हेतु कार्य करना जारी रखें।
एशिया और ओशिनिया
उन्होंने दक्षिणी एशिया और ओशिनिया की ईश प्रजा को ईश्वर के हाथों में सुपूर्द किया जो हाल ही में आई भयानक प्राकृतिक आपदाओं ने बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसी मुश्किलों की स्थिति में, संत पापा ने कहा कि मैं सभी लोगों को हृदय में विश्वास की भावना से,पीड़ित लोगों की मदद करने हेतु निष्ठा में आगे आने का आहृवान करता हूँ।
हम उदासीन हों
प्रिय भाइयो और बहनों, संत पापा ने कहा कि रात्रि के अंधेरे में, “सच्ची ज्योति जो सभी को आलोकित करती है, इस दुनिया में आई” लेकिन उनके अपने ही लोगों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।(यो.1.11) आइए हम अपने को उनके प्रति जो दुःख के शिकार हैं उदासीन न होने दें, क्योंकि ईश्वर हमारी तकलीपों के प्रति उदासीन नहीं हैं।
मानव बनने के द्वारा, येसु अपने ऊपर हमारी सारी कमजोरियों को लिया, वे हममें से प्रत्येक जन के संग अपने को साझा करते हैं- उनके संग जिन्होंने अपना सबकुछ खो दिया है और जिनके पास कुछ नहीं रह गया है, जैसे की गाजा के निवासी, वे जो भूख और गरीबी के शिकार हैं, जैसे कि यमन के लोग, उन लोगों के संग जो अपने मातृभूमि से भागते हुए कहीं दूसरी जगह पर एक भविष्य की खोज कर रहे हैं, जैसे कि वे प्रवासी और शरणर्थीगण जो भूमध्यसागर को पार करते या अमेरीकी महादेश की ओर प्रलायन करते हैं, उसके संग जिन्होंने अपने रोजगारों को खो दिया है, वे जो रोजगार की खोज करते हैं, जैसे कि बहुत से युवगण जिन्हें नौकरी की खोज हेतु संघर्ष का सामना करना पड़ता है, उनके संग जिनका शोषण होता है, जैसे कि बहुत से लोग जिन्हें कम मजदूरी दिया जाता है, वे जो कैदखानों में हैं, जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जीना पड़ता है।
शांति की चाह
शांति की चाह जो हर मातृभूमि से ईश्वर के हृदय में पहुंचती है जैसे कि एक कवि ने लिखाः
“एक युद्ध विराम की शांति नहीं, न ही एक भेड़िये और भेड़ का दृश्य,
लेकिन वैसे जब हृदय में उत्तेजना इति हो जाती है,
और तुम सिर्फ़ बहुत ज़्यादा थकान के बारे में बात कर सकते हो...
उसे आने दे, मानो वह जंगली फूल हो, अचानक, क्योंकि भूमि में इसे होना है- जंगली शांति।
अपना हृदय खोलें
इस पवित्र दिन में, हम अपना हृदय अपने भाइयो और बहनों के लिए खोलें जो जरूरत या दुःख दर्द की स्थिति में हैं। ऐसा करते हुए, हम अपने हृदयों को बालक येसु के लिए खोलते हैं, जो हमें खुली बांहों से स्वागत करते और अपनी दिव्यता को प्रकट करते हैं-“लेकिन वे जो उन्हें स्वीकारते हैं...वे उन्हें ईश्वरीय संतान होने की शांति प्रदान करते हैं। (यो.1.12)
येसु आशा के द्वार
संत पापा न कहा कि कुछ समय के अंतराल में हम जयंती वर्ष का समापन होगा। पवित्र द्वारा बंद हो जायेंगे, लेकिन ख्रीस्त हमारी आशा सदैव हमारे संग रहेंगे। वे वह द्वार हैं जो सदैव खुले रहते हैं जो हमें अनंत जीवन की ओर ले लाते हैं। हमारे लिए आज आनंद की घोषणा यह है- बालक जिसका जन्म हुआ है वह ईश्वर है जो मानव बना है, वह हमें दोषी करार देने नहीं बल्कि बचाने आते हैं। वे थोड़े समय के लिए नहीं बल्कि हमारे संग रहने और अपने को देने आते हैं। उनमें हर घाव की चंगाई मिलती और हृदय अपने में आराम और शांति प्राप्त करता है। “ईश्वर का जन्म शांति का जन्म है।”
संत पापा ने सभों को ख्रीस्त जयंती की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए कहा कि आप सभी को, मैं शांतिपूर्ण और पवित्र क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं!
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here
