संत  पापा लियो आमदर्शन समारोह में संत पापा लियो आमदर्शन समारोह में  (@Vatican Media)

संत पापा लियोः जीवन की सारी चीजों के लिए ईश्वर को धन्य कहें

संत पापा लियो 14वें ने 2025 के अपने अंतिम आमदर्शन समारोह में लोगों को ईश्वर से मिले कृपादानों के लिए कृतज्ञता के भाव अर्पित करने का आहृवान किया।

वाटकिन सिटी

संत पापा लियो 14वें ने साल 2025 के अंतिम दिन 31 दिसम्बर को आमदर्शन समारोह में सहभागी हो रहे सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात और सुस्वागतम्।

हम वर्ष के आखिरी दिन, जयंती खत्म होने के करीब और क्रिसमस महौल के मध्य इस समय चिंतन हेतु जमा हुए हैं।

वर्ष जो गुजर गया है निश्चित ही हमारे लिए महत्वपूर्ण घटनाओं की यादगारी छोड़ जाता है- उनमें कुछ खुशी के पल हैं, जैसे कि जयंती वर्ष के अवसर पर असंख्य विश्वासियों की तीर्थयात्रा, तो वहीं दूसरा जो हमारे लिए दुखदायी रहा जैसे कि संत पापा फ्रांसिस का हमारे बीच से गुजर जाना, और युद्ध के परिदृश्य जो पृथ्वी को झंकझोरते हैं। साल के अंत में, कलीसिया हमें सारी चीजों को ईश्वर के सम्मुख रखने हेतु निमंत्रण देती है, जहाँ हम अपने को उनकी दिव्य योजना में सुपुर्द करते हुए, उनकी कृपा और करूणा के आश्चर्य से अपने को और अपने निकट रहने वालों को, आने वाले दिनों के लिए नवीन करने की याचना करते हैं।

ते देऊम-कृतज्ञता का भजन

इस संदर्भ में ते देऊम गाने की परंपरा शुरू होती है, जिसके द्वारा हम आज की शाम ईश्वर को उनसे मिले आशीर्वादों के लिए धन्यवाद देंगे। हम अपने भजन में गायेंगे, “तू ईश्वर है, हम तेरी महिमा करते हैं”, तुझमें, हे ईश्वर हमारी आशा है।” “हम पर दया कर।” इस संदर्भ में संत पापा फ्रांसिस ने हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित कराया कि दुनियावी कृतज्ञता, दुनियावी आशा हमारे लिए प्रत्यक्ष हैं...जिसके केन्द्र बिन्दु में हम स्वयं को और अपने हितों को पाते हैं। जबकि इस धर्मविधि में एक व्यक्ति पूरी तरह से एक अलग परिदृश्य में अपने को सम्माहित पाता है, महिमा के पल में, आश्चर्य में,कृतज्ञता के भाव में”। (संत पापा फ्रांसिस का प्रवचन 31 दिसम्बर 2023)

विश्वासियों का अभिवादन करते हुए संत पापा लियो
विश्वासियों का अभिवादन करते हुए संत पापा लियो   (ANSA)

जीवन का मूल्यांकन

संत पापा लियो ने कहा कि हम अपने में इन मनोभावों के संग आज ईश्वर के कार्य पर चिंतन करने को बुलाये जाते हैं जिन्हें उन्होंने हमारे लिए विगत साल किया है, इसके साथ ही हम ईमानदारीपूर्वक अपने अंतःकरण की जाँच करने को, उन उपहारों के प्रति अपने प्रत्युत्तर का मूल्यांकन करते हुए उन क्षणों के लिए क्षमा माँगने को कहे जाते हैं जहाँ हमने उनकी प्रेरणाओं को संजोकर रखने और उनके द्वारा मिले उपहारों का सही तरीके से उपयोग करने में अयोग्य रहे हैं। (मत्ती. 25.14-30)

मानव जीवन एक तीर्थ

यह हमें एक अन्य बड़ी निशानी पर चिंतन करने को अग्रसर करता है जो हाल ही के महीनों में पूरी हुई है, जो हमारे लिए “तीर्थ” और “लक्ष्य” स्वरूप हैं। इस वर्ष असंख्य तीर्थयात्रियों ने विश्व के हर कोने से आकर संत पेत्रुस की कब्र में प्रार्थना की और अपने जीवन को ख्रीस्त के संग संयुक्त किया। यह हमें इस बात की याद दिलाती है कि हमारे सम्पूर्ण जीवन एक तीर्थ है जिसका अंतिम लक्ष्य समय और स्थान के परे है, जहाँ हमारा मिलन ईश्वर से अनंत काल के लिए होगा। संत पापा ने कहा कि हम इसकी कामना भी अपनी ते देऊम की प्रार्थना में यह कहते हुए करेंगे, “हमें अपने संतों के संग अनंत निवास के सहभागी बना।” यह हमारे लिए कोई संयोग की बात नहीं जब हम इस जयंती को संत पापा पौल 6वें के द्वारा विश्वास का एक बड़ा कार्य रुप परिभाषित पाते हैं,“भविष्य की नियति का अंदाज़ा... जिसका हमने पहले से ही अनुभव किया है और... उसके लिए तैयारी कर रहे हैं” (आमदर्शन 17 दिसम्बर 1975)।

संत पापा लियोः ईश्वर का धन्यवाद करें

संत पापा ने कहा कि इस युगांत की ज्योति में जहाँ हम नश्वर और अनश्वर के मेल को देखते हैं हमारे लिए एक तृतीय निशानी-पवित्र द्वार से प्रवेश को प्रकट करता है, जिससे होकर असंख्य लोगों ने, अपने लिए और अपने प्रियजनों के लिए प्रार्थना करते हुए और पापों की क्षमा याचना करते हुए प्रवेश किया है। यह ईश्वर के प्रति  हमारे “हाँ” को व्यक्त करता है जो अपनी क्षमाशीलता में हमें एक नये जीवन में प्रवेश करने हेतु निमंत्रण देते हैं, जहाँ हम उनकी कृपा से सजीव, सुसमाचार के अनुरूप “उस पड़ोसी के लिए प्रेम से भरा हुआ, जिसकी परिभाषा में... हर वह व्यक्ति शामिल है... जिसे समझ, मदद, आराम, त्याग की ज़रूरत है, भले ही वह हमें व्यक्तिगत रूप में पता न हो, भले ही वह परेशान करने वाला और दुश्मन हो, लेकिन एक भाई की बेमिसाल इज़्ज़त से भरा हो” (संत पापा पौल 6वें प्रवचन 25 दिसम्बर 1975)। यह वर्तमान में निष्ठापूर्ण जीवन जीने और अंनत जीवन हेतु हमारा “हाँ” है।

ख्रीस्त जन्मः आनंद का संदेश

प्रिय मित्रों, संत पापा लियो ने कहा हम ख्रीस्त जयंती के प्रकाश में इन सारी निशानियों पर चिंतन करते हैं। संत लियो दा ग्रेट, ने इस संदर्भ में, येसु ख्रीस्त के जन्म को सभों के लिए एक आनंद की घोषणा स्वरुप देखा,“हम संत को आनंदित होने दे” वे घोषित करते हैं क्योंकि उसे उसका पुरस्कार मिलनेवाला है, हम पापी को आनंदित होने दे क्योंकि उसे क्षमा मिलने वाला है, गैर-ख्रीस्तीय को साहस मिले क्योंकि उसे जीवन का निमंत्रण दिया जाता है” (ख्रीस्त जयंती का प्रथम प्रवचन)।

उनका निमंत्रण आज हम सबों के लिए लिए दिया जाता है, जो बपतिस्मा के द्वारा पवित्र किये गये हैं, क्योंकि ईश्वर सच्चे जीवन की यात्रा में हमारे मित्र बने हैं, हम पापियों को क्षमा मिली है जिससे हम उनकी कृपा के माध्यम खड़े हो सकें और पुनः आगे बढ़ सकें और अंततः हम जो दरिद्र और कमजोर हैं, क्योंकि वे हमारी कमजोरी को अपना बनाते हैं, उसे मुक्ति प्रदान करते हुए अपनी मानवता की सुन्दरता और शक्ति को हमें दिखलाते हैं। (यो.1.14)

संत पापा का अभिवादन
संत पापा का अभिवादन   (@Vatican Media)

संत पापा लियो ने संत पापा पौल 6वें के शब्दों की याद की जिसे उन्होंने सन् 1975 की जयंती के समापन में अपने मूल संदेश स्वरुप दिया था, जिसका सार एक शब्द “प्रेम” में अभिव्यक्त होता है। “ईश्वर प्रेम हैं। यह वह अकथनीय रहस्योद्घाटन है जिसे जयंती ने अपनी शिक्षा, अपने अनुग्रह, अपनी क्षमा और अंततः अपनी शांति, जो आँसुओं और खुशी से भरी है, के ज़रिए आज हमारी आत्मा और हमारे भविष्य को भरने की कोशिश की है: ईश्वर प्रेम हैं। ईश्वर मुझसे प्रेम करता है। ईश्वर ने मेरा इंतज़ार किया, और मैंने उसे पा लिया है। ईश्वर करूणा हैं। ईश्वर क्षमा हैं। ईश्वर मुक्ति हैं। ईश्वर, हाँ, ईश्वर जीवन हैं।”(आमदर्शन 17 दिसम्बर 1975) ये शब्द हमें पुराने साल से नये साल में प्रवेश करने हेतु मदद करें, और सदैव हमारे जीवन में बने रहें।

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31 दिसंबर 2025, 13:25