संत पापा लियोः हमारे कार्य सेवाभाव से प्रेरित हों
वाटिकन सिटी
संत पापा लियो ने 22 दिसम्बर को रोमन कुरिया के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मबहनों और लोकधर्मियों को ख्रीस्त जयंती की शुभकामनाएं प्रदान की।
अपने संबोधन में संत पापा लियो ने कहा कि ख्रीस्त जयंती की ज्योति, बेतलेहम के ग्रोटो से नवीनता की पुनः खोज करने का निमंत्रण लाते हुए हमसे मिलने आती है, जो पूरे मानव इतिहास के संग चलती है। इस नवीनता की ओर आकर्षित होते हुए जिसका आलिंगन सारी सृष्टि करती है, हम खुशी और आशा में चलें, क्योंकि हमारे लिए एक मुक्तिदाता का जन्म हुआ है,(लूका.2.11) ईश्वर ने मानव का रूप धारण किया है, वे हमारे लिए एक भाई बनते हैं जो हमें इस बात की याद दिलाती है कि ईश्वर सदैव हमारे संग रहते हैं।
संत पापा फ्रांसिस की याद
हृदय में खुशी और कृतज्ञता से हम घटनाओं को कलीसिया के जीवन में भी देखें। संत पापा ने कार्डिनलमंड़ली के अध्यक्ष के उत्साह भरे शब्दों के लिए कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि मैं सर्वप्रथम मेरे पूर्वाधिकारी संत पापा फ्रांसिस के वचनों की याद करने का आहृवान करता हूँ जिन्होंने इस साल पृथ्वी पर अपने जीवन को पूरा किया। “उनकी प्रेरितिक वाणी, प्रेरिताई की शैली और समृद्ध धर्मसिद्धांत ने कलीसिया की यात्रा को विगत सालों में महत्वपूर्ण बनाया है जो हमें ईश्वर की करूणा को क्रेन्द में रखने, सुसमाचार प्रचार में नई गति लाने, और एक खुशमिजाज कलीसिया बनने को प्रोत्साहित करती है जो सबों का स्वागत करती और अति गरीबों का ध्यान रखती है।
संत पापा ने विश्व प्रेरितिक पत्र एभेन्जेली गौदियुम पर आधारित कलीसिया के जीवन से संबंधित दो मुख्य बिन्दुओं- प्रेरिताई और एकता पर अपने चिंतन व्यक्त किये।
कलीसिया की प्रेरिताई
संत पापा लियो ने कहा कि अपनी प्रकृति के अनुसार कलीसिया दुनिया की ओर अपनी प्रेरितिक दृष्टिकोण रखती है। वह येसु ख्रीस्त से पवित्र आत्मा के उपहार को को वहन करती है जिससे वह सारी ईश प्रजा को ईश्वरीय प्रेम का सुसमाचार सुना सके। मानवता के लिए इस दिव्य प्रेम की निशानी स्वरुप कलीसिया सबों को उस भोज हेतु निमंत्रण देती और एकत्रित करती है जिसे प्रभु हमारे लिए तैयार करते हैं। इस मिलन में, हर व्यक्ति, अपने पड़ोसी को एक भाई या बहन में अपनी सम्मान की खोज कर सकता और मसीह में एक नई सृष्टि बनता है। इस खोज द्वारा परिणत, वे सच्चाई, न्याय और शांति के साक्षी बन जाते हैं।
कलीसिया-ख्रीस्त की प्रेरिताई
संत पापा लियो ने कहा कि एभेंजेली गौदियुम हमें कलीसिया की प्रेरिताई के विकास में परिवर्तन लाने को प्रोत्साहित करती है, जो पुनर्जीवित प्रभु येसु ख्रीस्त से खत्म न होने वाली जरूरी शक्ति को प्राप्त करती है। “येसु” की आज्ञा “जाओ और शिष्य बनाओ” हमारे लिए आज के बदलते हुए परिवेश में ध्वनित होती है, यह सुसमाचार प्रचार की नई चुनौतियों को प्रस्तुत करती है, और हमें आगे बढ़ने का निमंत्रण देती है। यह सुसमाचार प्रचार की विशेषता हमारे लिए स्वयं ईश्वर से आती है जो सर्वप्रथम हमारी ओर, हमें खोजने आते हैं। प्रेरिताई की शुरूआत पवित्र तृत्वमय ईश्वर के हृदय में होती है। वास्तव में, ईश्वर ने अपने पुत्र का अभिषेक करते हुए दुनिया में भेजा “जिससे जो कोई उसमें विश्वास करे उसका विनाश न हो लेकिन अनंत जीवन प्राप्त करे।” (यो. 3.16) अतः हम ईश्वर के प्रथम बृहृद निर्गमन को पाते हैं जहाँ वे अपने से बाहर, हम से मिलने आते हैं। ख्रीस्त जयंती का रहस्य मुख्य रुप से यही है, “पुत्र का दुनिया में प्रेरिताई हेतु आना।”
संत पापा ने कहा कि इस भांति, पृथ्वी पर येसु की प्रेरिताई, जो पवित्र आत्मा के द्वारा कलीसिया में जारी रहती है, हमारे जीवन के लिए आत्ममंथन का स्वरुप बनता है, जिसे हम अपने विश्वास की यात्रा में, कलीसिया के अभ्यासों में, और रोमन कुरिया की सेवाओं में करते हैं। संरचनाएं हमारे लिए भारी या सुसमाचार की गति को धीमी न करें या सुसमाचार के आयाम में रोड़ा उत्पन्न न करें, बल्कि हमें चाहिए कि हम “उन्हें अधिक प्रेरिताई का क्रेन्दित बनाये।”
रोमन कुरिया के कार्य
हमारे बपतिस्मा के सह-सहभागिता मनोभावों के आधार पर, इस भांति, हम सभी कलीसिया की प्रेरिताई में सहयोग करने हेतु बुलाये गये हैं। कुरिया के कार्य को इस मनोभाव के आधार पर प्रेरित होना चाहिए और उसे विशेष कलीसियाओं और उनके पुरोहितों की सेवा करनी चाहिए। हमें और अधिक प्रेरितिक रोमन कुरिया होने की जरुरत है जहाँ संस्थाएं, कार्यालय और उत्तरदायित्व आज की बड़ी कलीसिया, प्रेरिताई और सामाजिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की जाती हो, न कि सिर्फ़ साधारण प्रबंधन के आधार पर।
एक-दूसरे के भाई-बहन बनने का बुलावा
कभी-कभी कलीसिया के जीवन में, प्रेरिताई का गहरा संबंध एकता से होता है। ख्रीस्तीय जयंती का रहस्य पुत्र की प्रेरिताई पर चिंतन करना है, इसके साथ ही इसके उद्देश्य पर भी, मुख्यतः ईश्वर ने, ख्रीस्त में दुनिया का मेल अपने संग करा लिया और उनमें हमें अपनी संतानें बना लिया है।(2 कुरू. 5.19) ख्रीस्त जयंती हमें इस रहस्य की याद दिलाती है कि येसु हमें ईश्वर पिता के सच्चे चेहरे को प्रकट करने आते हैं, जिससे हम उनकी संतान बन सकें और इस भांति एक दूसरे के लिए भाई-बहनें। पिता का प्रेम, जो हमारे लिए येसु ख्रीस्त के मुक्तिदायी कार्यों और उपदेशों में व्यक्त होता है, पवित्र आत्मा में हमारे लिए मानवता की एक नयी निशानी बनती है- जहाँ हम स्वार्थ और व्यक्तिगतवाद को नहीं बल्कि आपसी प्रेम और भ्रातृत्व को पाते हैं।
संत पापा ने अंदर की ओर अर्थात कलीसिया के अंदर परिवर्तन के संदर्भ में अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे लिए एक परिवर्तन का निमंत्रण है। कभी-कभी शांतिमय प्रतीत होने वाली परिस्थिति के अंदर हम एक विभाजन को देखते हैं। हम दो अलग-अलग छोरों के बीच में पड़े रहने के प्रलोभन में पड़ सकते हैं: एकरूपता जो विभिन्नता के मूल्यों को नहीं पहचानती या एकता की खोज करने के बदले मतभेदों और हमारे दृष्टिकोणों में अंतर को बढ़ती है। अतः व्यक्तिगत संबंधों में, आंतरिक कार्यालय आयामों में या विश्वास, धर्मविधि, नौतिकता इत्यादि के संबंध में हम कठोरता या आदर्श को पाते जो हमारे लिए मतभेदों का कारण बनती है।
इसके बावजूद हम ख्रीस्त की कलीसिया, उनके शरीर के अंग हैं। हम उनमें भाई-बहनें हैं। और ख्रीस्त में यद्यपि हम अनेक और अलग-अलग होते हुए अपने में एक हैं।
संत पापा ने कहा कि रोमन कुरिया, विशेष रुप से ख्रीस्त में एकता की निर्माता हैं जो एक सिनोडल कलीसिया को आकार देती है जहाँ हम सभी एक प्रेरिताई में सहयोग करते हैं, हर कोई अपने को मिली कृपा और भूमिका के अनुरुप।
मित्रता की महत्वपूर्णतः
यह मेल जोल शब्दों और कागज़ों से उतना नहीं बनता जितना कि ठोस हाव-भाव और नज़रिए से बनता है, जो हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में, हमारे काम में भी दिखना चाहिए। संत पापा ने संत आगुस्टीन के पत्र का जिक्र करते हुए कहा जिसने प्रोबा को यह करते लिखा था, “सारे मानवीय मामलों में, दोस्त के बिना किसी भी चीज़ का लुप्फ उठाया नहीं जा सकता।” यद्यपि वे कड़वाहट के साथ पूछते हैं, “लेकिन इस ज़िंदगी में ऐसा इंसान कम ही मिलता है जिसके हौसले और व्यवहार पर पूरा भरोसा किया जा सकेॽ”
संत पापा ने कहा कि कभी-कभी यह कड़वाहट हमारे बीच भी आ जाती है, जब कुरिया में कई सालों की सेवा उपरांत, हम निराशा में- शक्ति के उपयोग, बने रहने की चाह, या व्यक्तिगत हितों की प्रधानता को पाते हैं जो धीमी गति से बदलती है। तब हम खुद से पूछते हैं: क्या रोमन कुरिया में दोस्ती संभव हैॽ क्या हम सच्चा भ्रातृत्वमय संबंध कायम रख सकते हैंॽ रोज़ की मेहनत के बीच, भरोसेमंद दोस्त को पाना एक कृपा है, जहाँ नकाब उतारे जाते हैं, किसी का इस्तेमाल नहीं होता या उसे किनारे नहीं किया जाता, बल्कि सच्चा सहयोग दिया जाता है, और हर व्यक्ति के मूल्य और योग्यता का सम्मान किया जाता है, जो हमें नाराज़गी और नाखुशी से बचाती है। ऐसे रिश्ते हमें व्यक्तिगत मन परिवर्तन की मांग करते हैं, जो हमें ख्रीस्त में प्यारे भाई-बहन बनाता है।
येसु का जन्म, शांति उपहार
संत पापा लियो ने एक निशानी स्वरुप असहमति, हिंसा और युद्ध के कारण घायल दुनिया में बाहर जाने के संदर्भ में, जहाँ कोध और बहुधा संचार और राजनीति हमें प्रभावित करती है कहा कि येसु का जन्म हमारे लिए शांति का उपहार लाता और हमें भविष्य हेतु एक निशानी बनने को निमंत्रण देता है। कलीसिया के संग हमें इसे विस्तृत दायरे में देखने की जरुरत है- हम सिर्फ़ अपने खेत की देखभाल करने वाले माली नहीं हैं, बल्कि ईश्वरीय राज्य के शिष्य और गवाह है, जिन्हें मसीह में अलग-अलग लोगों, धर्मों और संस्कृतियों के बीच दुनिया भर में भाईचारे का खमीर बनने को बुलाया गया है। ऐसा तब होता है जब हम खुद भाई-बहनों की तरह रहते और दुनिया में एकता की रोशनी को चमकने देते हैं।
ख्रीस्त जीवन का क्रेन्द
संत पापा ने कहा कि प्रेरिताई और एकता अपने में तब संभव होती है जब हम येसु ख्रीस्त को अपने जीवन के क्रेन्द में रखते हैं। यह जयंती वर्ष हमें इस बात की याद दिलाती है कि सिर्फ वे हमारी आशा हैं जो हमें निराश नहीं करते हैं। संत पापा ने दो विशेष वर्षगांठों की याद दिलाई- नाईसिया की धर्मसभा जो हमें विश्वास के जड़ों की ओर ले चलती है, और द्वितीय वाटिकन महासभा जो हमें अपनी निगाहों को येसु में केंद्रित रखने को मदद करते हुए, कलीसिया को मजबूती प्रदान करती और उसे आज की दुनिया में, लोगों की खुशियों, उम्मीदों, दुखों और चिंताओं से जुड़ने में सहायक होती है।
अपने संबोधन के अंत में सत पापा लियो ने पचास साल पूर्व निष्कलंक गर्भधारण महापर्व के अवसर पर, संत पॉल 6वें द्वारा विश्व प्रेरितिक पत्र एवेंजेली न्युशेदी की घोषणा की, जो धर्माध्यक्षों की तीसरी धर्मसभा के उपरांत जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि यह दो महत्वपूर्ण बातों पर बल देता है: पहला, कि “यह पूरी कलीसिया है जिसे सुसमाचार प्रचार की प्रेरिताई मिली है, और हर एक सदस्य का काम पूरी कलीसिया के लिए ज़रूरी है”। दूसरा, यह इस बात की पुष्टि करता है कि “सुसमाचार प्रचार का पहला तरीका एक सच्चे ख्रीस्तीय जीवन की गवाही है, जो ईश्वर को और साथ ही अपने पड़ोसी को एक ऐसी एकता में अर्पित है जिसे कुछ भी नष्ट नहीं करता सकता है।”
सेवा के भाव
संत पापा ने कहा कि हम याद रखें यह कुरिया की सेवा में भी अंकित है हममें से हर किसी का कार्य सभों के लिए महत्वपूर्ण है, ख्रीस्तीय जीवन का साक्ष्य जो एकता में व्यक्त होता है, हमारे लिए प्रथम और सबसे बड़ी सेवा है, जिसे हम देते हैं।
उन्होंने रोमन कुरिया के सदस्यों से अनुरोध करते हुए कहा कि ईश्वर स्वर्ग से उतरते और अपने को हमारे लिए नम्र बनाते हैं। जैसे कि बोनहोएफर ने ख्रीस्त जयंती के रहस्य पर चिंतन करते हुए लिखा, “ईश्वर मानवीय छोटेपन पर शर्मिंदगी का अनुभव नहीं करते हैं। ईश्वर वहाँ प्रवेश करते हैं... वे तुच्छ लोगों के पास आते हैं, वे खोये हुए, परित्यक्त, अनदेखी किये गये लोगों, कमजोरों और टूटे हुए को प्रेम करते हैं। ईश्वर हमें अपनी नम्रता प्रदान करें, अपनी करूणा और प्रेम जिससे हम उनके शिष्य बन सकें और हर दिन उनका साक्ष्य दे सकें।
सभों को ख्रीस्त जयंती की शुभकामनाएं प्रदान करते हुए संत पापा लियो ने कहा कि ईश्वर हमें अपनी ज्योति और दुनिया को शांति प्रदान करें।
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