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वाटिकन में मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधियों का सहर्ष स्वागत करते संत पापा फ्रांँसिस वाटिकन में मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधियों का सहर्ष स्वागत करते संत पापा फ्रांँसिस 

मंगोली बौद्धों से पोप ˸ मानवता को हर प्रकार की हिंसा त्यागनी चाहिए

संत पापा फ्राँसिस ने मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधिमंडल से वाटिकन में 28 मई को मुलाकात करते हुए उन्हें अंतरधार्मिक वार्ता के लिए प्रेरित किया ताकि जीवन के हर क्षेत्र में अहिंसा को अपनाने हेतु मानवता को मदद दी जा सके।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

शनिवार को संत पापा ने वाटिकन में मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधियों का सहर्ष एवं सम्मानपूर्ण स्वागत किया तथा काथलिक कलीसिया के साथ आपसी समझदारी के माध्यम से शांतिमय समाज बनाने की उनकी चाह की सराहना की।  

संत पापा ने कहा, "शांति आज मानवता की प्रबल अभिलाषा है। परिणामतः, शांति और अहिंसा की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सभी स्तरों पर बातचीत की तत्काल आवश्यकता है। यह वार्ता सभी लोगों को हर प्रकार की हिंसा को समाप्त करने का निमंत्रण दे, जिसमें पर्यावरण के प्रति की गई हिंसा भी शामिल हो।"  

संत पापा ने खेद प्रकट किया कि इस समय भी कुछ लोग हिंसा और घृणा को न्यायसंगत ठहराने के लिए धर्म को माध्यम बना रहे हैं।

येसु और बुद्ध ˸ शांति के व्यक्ति

संत पापा ने येसु और बुद्ध की शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों ही व्यक्ति "शांति निर्माता थे एवं अहिंसा को बढ़ावा दिया।"

उन्होंने कहा, "येसु ने अपने शिष्यों से कहा कि अपने शत्रुओं से प्रेम करो एवं अहिंसा का जीवन जीने के लिए क्रूस पर मृत्यु स्वीकार किया। इस तरह वे हमारी शांति बन गये और शत्रुता को शांत किया।"  

भगवान गौतम बुद्ध प्राचीन भारत के एक महान आध्यात्मिक गुरू थे जिन्होंने पहली सदी ईसा पूर्व के उत्तरार्ध में जीया और अहिंसा एवं शांति के मूल सिद्धांत पर अपनी शिक्षा की स्थापना की।  

संत पापा ने उल्लेख किया कि बुद्ध ने दूसरों को जीत और हार के स्तर से परे जाने के लिए प्रोत्साहित किया, और लोगों को जीतने की कोशिश करने के बजाय, आत्म-निपुणता की इच्छा में दोनों को त्यागने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा, "एक ऐसी दुनिया में जो संघर्ष एवं युद्ध से तबाह है, हम धर्मगुरूओं के रूप में अपनी अपनी धार्मिक शिक्षाओं में सुदृढ़ हैं, एक कर्तव्य है मानवता में हिंसा को त्यागने की दृढ़ इच्छा जागृत करने एवं शांति की संस्कृति का निर्माण करने की जरूरत है।"     

धार्मिक स्वतंत्रता एवं मित्रता का रास्ता

मंगोलिया में काथलिकों की उपस्थिति करीब 30 सालों से है अतः संत पापा ने स्वीकार किया कि वहाँ ख्रीस्तीयों की संख्या कम है करीब 1,200 स्थानीय मंगोली काथलिक हैं जहाँ, 6 गिरजाघर, 33 पुरोहित एवं 44 धर्मबहनें हैं किन्तु उन्होंने कहा कि वे मुलाकात की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।   

अतः संत पापा ने मंगोलिया के बौद्ध एवं काथलिक लोगों से कहा कि वे सभी की भलाई के लिए मित्रता के संबंध को मजबूत करें।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि मंगोलिया की शांतिपूर्ण अंतरधार्मिक सह-अस्तित्व की लम्बी परम्परा "धार्मिक स्वतंत्रता के प्रभावी कार्यान्वयन और सार्वजनिक भलाई के लिए संयुक्त पहल को बढ़ावा दे सकती है।"

उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा, "आज यहाँ आपकी उपस्थिति ही आशा का चिन्ह है। इस भावना के साथ, मैं आपको प्रोत्साहन देता हूँ कि आप शांति और सौहार्द के लिए, भाईचारापूर्ण वार्ता और देश में काथलिक कलीसिया के साथ अपने अच्छे संबंध में बढ़ते जाएँ।"  

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28 मई 2022, 15:25