ग्लोबल हाऊस ऑफ फ्रेन्डशिप एण्ड होप नामक घर के समक्ष, 05.08.2026 ग्लोबल हाऊस ऑफ फ्रेन्डशिप एण्ड होप नामक घर के समक्ष, 05.08.2026   (ANSA)

पवित्रभूमि के ख्रीस्तीय थक चुके हैं, शांति चाहते हैं, पित्साबाल्

सन्त पापा लियो 14 वें की प्रेरितिक यात्रा तथा "मैत्री एवं आशा के विश्वव्यापी घर", नामक एक अन्तरराष्ट्रीय योजना के तहत, असीसी में उपस्थित, कार्डिनल पित्साबाल्ला ने कहा कि पवित्रभूमि के ख्रीस्तीय लोग थक चुके हैं तथा शांति चाहते हैं।

वाटिकन सिटी

असीसी, शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): इटली के असीसी नगर में सन्त पापा लियो 14 वें की प्रेरितिक यात्रा तथा "मैत्री एवं आशा के विश्वव्यापी घर", नामक एक अन्तरराष्ट्रीय योजना के तहत, असीसी में उपस्थित, जैरूसालेम के लैटिन प्राधिधर्माध्यक्ष, कार्डिनल पियरबतिस्ता पित्साबाल्ला ने कहा कि पवित्रभूमि के ख्रीस्तीय लोग थक चुके हैं तथा शांति चाहते हैं।

वाटिकन मीडिया से बातचीत में उन्होंने पवित्र भूमि पर चर्चा करते हुए “न युद्ध, न शांति” की मौजूदा स्थिति पर गहन चिंता व्यक्त की।

नये नेताओं की जरूरत   

आगामी 27 अक्टूबर के लिये निर्धारित इस्राएली चुनावों पर बोलते हुए कार्डिनल पित्साबाल्ला ने कहा कि "हर कोई चुनावों को ऐसे देख रहा है जैसे वे सभी समस्याओं का समाधान कर देंगे, जबकि सच तो यह है कि मध्यपूर्व की समस्याएं ऐसी हैं जिनके लिए बहुत समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि इस समय "हमें नए चेहरे, नए नेता चाहिए और मतदाता इसका फैसला करेंगे।"

जैरूसालेम की वर्तमान स्थिति को उन्होंने "बहुत अधिक तनावों" वाली निरूपित किया। हालांकि, उन्होंने कहा, "इस समय हम अन्धाधुन्ध बमबारी वाली जंग की हालत में नहीं हैं, तथापि गाज़ा, वेस्ट बैंक तथा इस्राएल और फ़िलिस्तीन में हिंसा सर्वत्र देखी जा रही है।"

थकावट और अविश्वास

पवित्र भूमि में ख्रीस्तीयों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "शेष जनता की तरह, ख्रीस्तानुयायी भी इस कभी न खत्म होने वाली घोषणाओं से बहुत थक गए हैं, जो बाद में घटनाओं से उलट जाती हैं। यह रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। दुर्भाग्यवश, इससे लोगों में अविश्वास की भावना लगातार बढ़ रही है, यहाँ तक कि लोग अब किसी भी बात पर यकीन नहीं करते, भले ही वह सच निकले।" उन्होंने कहा कि लोगों में अब अच्छी खबर देखने की आदत नहीं रही है, जो कि बहुत ही मुश्किल और दुखद स्थिति है।

निराशा के बावजूद आशा

कार्डिनल महोदय ने कहा कि तनावों और निराशाओं के बावजूद उन्होंने आशा का परित्याग नहीं किया है। वे कहते हैं, "आशा बरकरार है क्योंकि गाज़ा, वेस्ट बैंक और इस्राएल में बहुत से लोग हैं जो खुद को खतरे में डाल रहे हैं। मैं लगातार युवाओं से मिलता, वयोवृद्धों से मिलता हूँ, प्राध्यापकों से भी मिलता हूँ जो सब कुछ खो देने के बावजूद शामिल होना, मुलाकात करना और दूसरों का बचाव करना चुन रहे हैं। उस समाज में अभी भी एंटीबॉडीज़ या प्रतिरक्षी हैं जो पूरे शरीर को हिंसा के इस वायरस से बचने में मदद करती हैं।"

चिन्ताजनक बात  

कार्डिनल ने कहा कि सबसे बड़ी चिन्ता यह है कि हम ऐसी स्थिति में फंसे हुए हैं जहाँ न तो युद्ध और न ही शांति। उन्होंने कहा कि इस उलझन भरी स्थिति में लोग यथार्थ समाधान बनाए बिना ही समाधान के बारे में बात करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति परेशान करने वाली है क्योंकि  इससे लोगों के दिलों में अविश्वास बढ़ता है और आज लोगों में मुझे यही सबसे बड़ा खतरा दिखता है।

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07 अगस्त 2026, 11:56