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जापान में हिरोशिमा पर बमबारी की 81 वीं पुण्य तिथी पर प्रार्थना, 06.08.2026 जापान में हिरोशिमा पर बमबारी की 81 वीं पुण्य तिथी पर प्रार्थना, 06.08.2026  (ANSA)

हिरोशिमा और नागासाकी: शांति के लिए दस दिनों की प्रार्थना शुरू

जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बमबारी की बरसी के अवसर पर, जापान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने "नेवर अगेन" शब्दों की अहमियत पर मनन-चिन्तन के लिये सबको आमंत्रित किया है।

वाटिकन सिटी

जापान, शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 (रेई, वाटिकन रेडियो): जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बमबारी की बरसी के अवसर पर, जापान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने  "नेवर अगेन" शब्दों की अहमियत पर मनन-चिन्तन के लिये सबको आमंत्रित किया है। यह नारा 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के अन्त में सम्पूर्ण विश्व में शुरू किया गया नारा था।

शांति हेतु प्रार्थना

जापानी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल इसाओ टार्सिसियो किकुची इस अवसर पर अपनी अपील में परमाणु बम विस्फोटों के कारण हुए कई पीड़ितों और पर्यावरण से जुड़ी आपदाओं को याद करने के लिए सभी को आमंत्रित कर, "आज भी शांति के लिए प्रार्थना का आग्रह करते हैं।"

सन् 1945 में, 6 अगस्त को हिरोशिमा पर एटम बम गिराया गया था तथा 15 अगस्त को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसी के स्मरणार्थ, 06 अगस्त से 15 अगस्त तक प्रतिवर्ष "शांति हेतु  दस दिवसीय प्रार्थना" आयोजित की जा ती है। 1981 में शुरू हुई इस पहल में जापान के सभी ईसाई शामिल होते हैं तथा युद्धग्रस्त पीड़ितों की स्मृति में प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं।

वर्तमान स्थिति पर चिन्ता

जापानी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल इसाओ टार्सिसियो किकुची द्वारा इस अवसर पर प्रकाशित सन्देश में स्मरण दिलाया गया कि आज भी विश्व के कई हिस्से युद्ध से पीड़ित हैं। उन्होंने लिखा, “युद्ध और संघर्ष सम्पूर्ण विश्व में फैल रहे हैं। हिंसा से घायल या मारा गया हर व्यक्ति ईश प्रतिरूप में रचा गया इंसान है। सबसे दुखद तथ्य यह कि ऐसी हिंसा को 'ज़रूरी' बताकर सही ठहराया जाता है, और अन्तरराष्टीय मानवीय कानून के सिद्धांतों को नज़रअंदाज़ कर जिया जाता है।”

मानव प्रतिष्ठा के सम्मान का आग्रह

कार्डिनल किकुची आगे कहते हैं, "हमें 80 साल पहले के अनुभव से सीखना चाहिए।" वे आग्रह करते हैं कि हम प्रतिपल सचेत रहें, अपनी सावधानी को कम न करें और मानव गरिमा के सम्मान पर आधारित शांति की संस्कृति का निर्माण करें। कार्डिनल महोदय का आमंत्रण स्पष्ट है: अतीत के अनुभव का इस्तेमाल कर भविष्य पर सवाल उठायें तथा आज और भावी पीढ़ियों के लिए शांति हेतु  पूरी तरह से समर्पित रहें।

जीवन अनमोल वरदान

धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सन्देश में कहा गया, "प्रत्येक जीवन ईश प्रदत्त एक अनमोल वरदान है, जो सभी को सम्मान योग्य बनाता है। जीवन के सम्मान की रक्षा करना ही शांति की शुरुआत है।" अस्तु,  शांति स्थापित करना एक साझा इच्छा और एक मिलकर किया जाने वाला काम होना चाहिए: "आइए हम सब मिलकर शांति का निर्माण करें! आइए हम शांति के लिए प्रार्थना करें।" उन लोगों के लिये विशेष प्रार्थना करें जो आज भी युद्धों के भयानक परिणामों को भुगत रहे हैं।

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07 अगस्त 2026, 12:01