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अमरीकी धर्माध्यक्ष : आप्रवासन प्रवर्तन में मानव जीवन का सम्मान होना चाहिए

हाल ही में आव्रजन प्रवर्तन से जुड़ी कई ऐसी घटनाओं के संदर्भ में, जिनमें लोगों की जान चली गई, अमेरिका के धर्माध्यक्ष दानियल ई. गार्सिया और ब्रेंडन जे. कहिल ने एक प्रेरितिक चिंतन जारी किया। इसमें उन्होंने ऐसी आव्रजन प्रवर्तन व्यवस्था का आह्वान किया है जो प्रत्येक व्यक्ति की ईश्वर-प्रदत्त गरिमा का सदैव सम्मान करे तथा प्रवासियों के अमानवीकरण (मानवीय गरिमा से वंचित करने) को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

देबोरा कस्तेलानो लुबोक

अमरीका, मंगलवार, 21 जुलाई 2026 (रेई): “काथलिक होने के नाते, हम मानते हैं कि सभी लोग ईश्वर की छवि और स्वरूप में बनाए गए हैं और इसलिए, हम उन सभी परिस्थितियों में दुःखी होते हैं जहाँ मानव जीवन का अंत अप्राकृतिक तरीके से होता है।”

इन्हीं शब्दों के साथ, अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की जातीय न्याय एवं मेलमिलाप को बढ़ावा देने के लिए गठित उप समिति के अध्यक्ष बिशप डानिएल ई. गार्सिया और आप्रवासन पर समिति के अध्यक्ष बिशप ब्रेंडन जे. काहिल ने हाल ही में अमेरिका में हुई आव्रजन प्रवर्तन की वजह से हुई कई लोगों की मौत के मद्देनजर अपने प्रेरितिक चिंतन शुरू किए हैं।

अमरीकी काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की वेबसाइट पर 20 जुलाई, 2026 को प्रकाशित, धर्माध्यक्ष के चिंतन में, मारे गए लोगों के लिए दुःख जताया गया। सिविल अधिकारियों के महत्वपूर्ण काम की पुष्टि करते हुए, इस बात पर जोर दिया गया है कि कानून लागू करनेवाली एजेंसियों को कभी भी मानव प्रतिष्ठा या मावन जीवन से समझौता नहीं करना चाहिए।

'सरकार की ताकत का इस्तेमाल नैतिक कानून के दायरे में होना चाहिए'

बयान में, धर्माध्यक्षों ने दोहराया, “हम सिविल अधिकारियों की सही भूमिका की पुष्टि करते हैं कि वे कानून को मानवीय तरीके से और बुनियादी मानवाधिकारों, जिसमें जीवन और सही प्रक्रिया का अधिकार शामिल है, का सम्मान करते हुए लागू करें।”

बिशप गार्सिया और बिशप काहिल ने जोर देकर कहा, “सरकार की ताकत का इस्तेमाल हमेशा नैतिक कानून के दायरे में होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “इसके लिए, हम जवाबदेही, पारदर्शिता और न्याय की मांग करते हैं, जिसके लिए हमारे पलायन प्रणाली में अच्छे सुधार किए जाने चाहिए।”

नस्लीय आधार पर पहचान (रेशियल प्रोफाइलिंग) को लेकर चिंता

पिछले वर्ष नवंबर में अमेरिकी बिशपों द्वारा कही गई बात को स्मरण करते हुए उन्होंने दोहराया, “जब हम अपने लोगों के बीच नस्लीय आधार पर पहचान (रेशियल प्रोफाइलिंग) और आव्रजन प्रवर्तन से जुड़े प्रश्नों को लेकर भय और चिंता का वातावरण देखते हैं, तो हम अत्यंत व्यथित होते हैं।”

उन्होंने कहा कि नस्लीय आधार पर पहचान, “न सिर्फ ईश्वर की दी हुई इज्जत का उल्लंघन करती है, बल्कि डर को बढ़ावा देकर, भरोसा कम करके और गलत और यहां तक ​​कि दुखद नतीजों के खतरे को बढ़ाकर लोगों, परिवारों और समुदायों को गहरा नुकसान भी पहुंचाती है।”

बिशप ने माना कि उनकी प्रेरिताई से जुड़ी चिंताएँ सिविल लॉ की इजाजत से अलग थीं।

मानव प्रतिष्ठा को कम करना या उसकी अनदेखी करना सामान्य नहीं हो सकता

बिशप गार्सिया और बिशप काहिल ने जोर देकर कहा, “ऐसे काम जो किसी इंसान या लोगों के ग्रुप की इज्ज़त को कम करते हैं या उसकी अनदेखी करते हैं, उन्हें हमारे समाज में कभी भी सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।”

उन्होंने “आप्रवासन के साथ उनके न्यायिक स्थिति की परवाह किए बिना अमानवीय बर्ताव” और “कानून प्रवर्तन  अधिकारियों की बुराई” को ऐसे दो उदाहरण बताया जिन्हें कभी भी नॉर्मल नहीं किया जाना चाहिए।

अंत में, उन्होंने मारे गए लोगों की आत्मा की शांति, उनके परिवारों, देश और उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना की जिन्हें सार्वजनिक सेवा का कर्तव्य सौंपा गया है। उन्होंने “अमानवीय बयानबाजी, नस्लीय भेदभाव और हिंसा के खत्म होने और हर इंसान की ईश्वर की संतान के तौर पर अंदरूनी गरिमा को पहचानने के लिए नए सिरे से कमिटमेंट” के लिए भी प्रार्थना की।

उन्होंने आखिर में कहा, “हम हमारी माता मरियम से दुआ करते हैं, जो दुख, मुश्किल और अनिश्चितता के समय में पूरे विश्वास की मिसाल हैं।”

(अनुवाद- सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)

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21 जुलाई 2026, 16:25