प्यार और मेहमान-नवाज़ी: दूसरों में ईश्वर की सेवा करने का बुलावा
सिस्टर अर्नेस्टिना पैट्रिक लासवे एसएसी
तंजानिया, गुरुवार 30 जुलाई 2026 : 18 जून 1652 को फ्रांस के नैन्सी में इम्मानुएल चौवेनेल ने संत चार्ल्स बोर्रोमेयो (ट्रायर) की दया की धर्मबहनों के धर्मसमाज की स्थापना की थी। यह दुनिया भर में प्यार और सेवा के अपने मिशन को जारी रखे हुए है। आज, यह धर्मसमाज तंजानिया में प्रेरितिक और सामाजिक सेवा में सक्रिय रूप से शामिल है और लोगों की आध्यात्मिक और मानवीय ज़रूरतों को पूरा कर रहा है। धर्मसमाज के जीवन के केंद्र में इसका करिश्मा है: “हमेशा रहने वाले प्यार में ईश्वर के साथ एकता।” यह करिश्मा धर्मबहनों को सभी लोगों की आध्यात्मिक और शारीरिक भलाई का ध्यान रखने के लिए कहता है।
तंजानिया का सफ़र
संत चार्ल्स बोर्रोमेयो की दया की धर्मबहनें 1985 में नीदरलैंड्स से तंजानिया पहुँचीं। उन्होंने सिंगिडा धर्मप्रांत में म्टिंको में अपनी पहला समुदाय बनाया। इतने सालों में, धर्मबहनों ने शिक्षा, धर्मशिक्षा और प्रेरितिक देखभाल जैसे अलग-अलग कामों में ईमानदारी से सेवा दिया है।
जैसे-जैसे उनका मिशन बढ़ा, धर्मबहनों ने धर्मसंघी पुरुषों और महिलाओं, पुरोहितों और आम लोगों के लिए शांति, आराम और आध्यात्मिक रूप से नई शुरुआत की जगह की बढ़ती ज़रूरत को पहचाना। इसी वजह से उन्होंने अरुशा महाधर्मप्रांत में एक आध्यात्मिक साधनालय, सेमिनार सेंटर और एक बड़ा हॉल बनाया।
यह संत मारकुस के सुसमाचार ( 6:31) के येसु ख्रीस्त के बुलावे का जवाब है: “तुम लोग अकेले किसी शांत जगह पर आओ और थोड़ी देर आराम करो” । संत कारोलुस आध्यात्मिक साधना केंद्र को एक ऐसी जगह के तौर पर देखा गया था जहाँ लोग व्यस्त कार्यक्रमों से दूर, प्रार्थना और मनन-चिंतन में ईश्वर से मिल सकें।
संत कारोलुस आध्यात्मिक साधना केंद्र टेंगरू
अरुशा के टेंगरू में संत कारोलुस आध्यात्मिक साधना केंद्र आधिकारिक तौर पर 14 अक्टूबर 2017 को खोला गया था। जैसा कि सिस्टर अगाथा बताती हैं, “हमारे समय की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए और धर्मसमाज के करिश्मे को साझा करने के लिए, यह केंद्र बनाया गया था। उनके लिए प्रार्थना की जगहें देकर उनकी आध्यात्मिक और शारीरिक देखभाल की जा सके। कुछ लोग इसलिए भी आते हैं,जिन्हें बस आराम की ज़रूरत है।”
अरुशा शहर जो तंजानिया में पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय कार्यकलापों के हब के तौर पर जाना जाता है, इसके पास मौजूद, यह साधना केंद्र दुनिया भर से मेहमानों का स्वागत करता है।
सेवा के तौर पर मेहमान-नवाज़ी
धर्मबहनों के मिशन का सबसे ज़रूरी हिस्सा मेहमान-नवाज़ी है। सेंटर में सेवा करने वाली सिस्टर जुलियाना और सिस्टर माइकेला मेहमानों के स्वागत को ईश्वर की सेवा करने का एक गहरा तरीका बताती हैं। धर्मबहनों ने कहा, “मेहमानों का स्वागत करना और उनकी सेवा करना बहुत खुशी की बात है, खासकर तंजानिया के अंदर और बाहर से आए मेहमानों का। जब कोई मेहमान आता है और बाद में खुशी और शांति के साथ जाता है, तो इससे बहुत सुकून मिलता है। इस सेवा के ज़रिए, हम अपने मेहमानों से सीखते हैं, और वे भी हमसे सीखते हैं। हम बस सेवक हैं, यह कोशिष करती हैं कि यहां आने वाला हर कोई ईश्वर से मिले।”
रहने की जगह और आध्यात्मिक साधनालय के अलावा, केंद्र में एक बड़ा बहुप्रयोजन हॉल है जिसका इस्तेमाल सेमिनार, सम्मेलन, सभा और समारोहों के लिए किया जाता है, जिसमें दृढ़ीकरण समारोह, शादियां और पुरोहिताभिषेक समारोह शामिल हैं। इस सेवा के ज़रिए, धर्मबहनें अपने प्यार, उदारता और सेवा में बेहतरीन काम के करिश्मे को दिखाती हैं।
देखभाल, स्थिरता और आत्मनिर्भरता
मेहमानों की देखभाल का मतलब यह भी है कि उन्हें पौष्टिक खाना और रहने के लिए सुरक्षित जगह मिले। इसे सपोर्ट करने के लिए, धर्मबहनें सब्ज़ियों के बगान और फलों के बगीचे रखती हैं जिससे रोज़ाना इस्तेमाल के लिए ताज़ी सब्जियाँ और फल मिल सके। सिस्टर अगाथा कहती हैं, “अपने बगान में खुद सब्जी उगाकर, हमें भरोसा है कि हम जो परोसते हैं वह ताज़ा और सुरक्षित है, क्योंकि हम नुकसानदायक रसायन से बचते हैं।”
धर्मबहनें मुर्गी, सूअर और खरगोश भी पालती हैं। इन कोशिशों से खर्च कम करने में मदद मिलती है और साथ ही यह भी पक्का होता है कि मेहमानों को पौष्टिक खाना मिले। यह धर्मबहनों के ज़िम्मेदारी से काम करने और स्थिरता की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
स्थानीय समुदाय के साथ मिशन
अपने संस्थापक के विज़न के प्रति वफ़ादार, धर्मबहनें आस-पास के समुदाय के साथ मिलकर अपना धर्म प्रचार करती हैं। वे स्कूलों और पल्लियों में धर्मशिक्षा के साथ-साथ लाइफ-स्किल्स की एजुकेशन भी देती हैं, जिससे लोग ज़्यादा आत्मनिर्भर बन पाते हैं। इस साझा मिशन के ज़रिए समुदाय की धर्मबहनें दैनिक सेवा में ज़ाहिर होने वाले ख्रीस्त की मौजूदगी और प्यार का अनुभव करती हैं।
मिशन के फ़ायदे और चुनौतियाँ
शुरुआत से ही संत कारोलुस आध्यत्मिक साधना केंद्र, टेंगरू ने दुनिया के कई हिस्सों से आध्यात्मिक साधना, सेमिनार और सभा समारोहों के लिए मेहमानों का स्वागत किया है। मेहमानों का लगातार आना तारीफ़ और भरोसे की निशानी है। सिस्टर अगाथा कहती हैं, “हम दूर-दूर से आने वाले मेहमानों की तारीफ़ करते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं। उनकी बातें और सुझाव हमें अपनी सेवा को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।” यह फ़ीडबैक हमें सही समय पर मेहमानों की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
मेहमाननवाजी में चुनौतियाँ भी होती हैं। उनमें से, मेहमानों की घटती-बढ़ती संख्या और कभी-कभी सेहत से जुड़ी परेशानियों के लिए लचीलापन और ध्यान देने की ज़रूरत होती है। अच्छी बात यह है कि आस-पास की मेडिकल सुविधाएँ यह पक्का करती हैं कि ज़रूरत पड़ने पर मेहमानों को सही देखभाल मिले।
घर से दूर एक घर
संत कारोलुस कॉन्वेंट और आध्यत्मिक साधना केंद्र वास्तव में घर से दूर घर के रूप में अपने आदर्श वाक्य का प्रतीक है। आतिथ्य, खानपान और भाषाओं में कुशल धर्मबहनें, स्वाहिली, अंग्रेजी, जर्मन और फ्रेंच बोलने वाले मेहमानों का स्वागत करती हैं। वे सभी जो आराम, नवीनीकरण और आध्यात्मिक पोषण चाहते हैं, उन्हें अरुशा शहर के ठीक बाहर शांतिपूर्ण वातावरण का अनुभव करने के लिए हार्दिक रूप से आमंत्रित किया जाता है, जहां संत चार्ल्स बोर्रोमेयो की दया की धर्मबहनें प्रेम, प्रार्थना और उदार आतिथ्य के माध्यम से ईश्वर की सेवा करना जारी रखती हैं।
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