सीबीसीआई ने दिल्ली में शांति से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर क्रूर कार्रवाई की निंदा की
उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 23 जुलाई 2026 (सीबीसीआई) : सीबीसीआई ने कहा है कि देश के युवा, जो देश के भविष्य हैं, शिक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही और सुधारों की जायज मांगों के साथ सड़कों पर उतरे हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अधिक बल प्रयोग को धर्माध्यक्षों ने "हमारे लोकतंत्र की आत्मा पर दिल तोड़नेवाला हमला" बताया।
उन्होंने कार्रवाई के दौरान पीड़ित सभी छात्रों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई, और कहा कि वे एक पारदर्शी, जवाबदेही और न्यायपूर्ण शिक्षा प्रणाली की उनकी कोशिश में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
बयान में धर्माध्यक्षों ने कहा, "हम आपका दर्द समझते हैं, आपकी आवाज सुनते हैं, और एक पारदर्शी एवं न्यायपूर्ण शिक्षा पद्धति के लिए आपकी सही आवाज को दोहराते हैं।"
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने जानेमाने शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के लिए भी अपना ठोस समर्थन जताया, जो सही सुधारों की मांग को लेकर लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी सेहत को लेकर गहरी चिंता जताई और अधिकारियों से अपील की कि वे उनकी मांगों पर दबाव डालने के बजाय दया और समझदारी से जवाब दें।
संयम और रचनात्मक जुड़ाव की अपील करते हुए, सीबीसीआई ने सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और सभी संबंधित हितधारकों के साथ सही बातचीत शुरू करने की अपील की। इसने अधिकारियों से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने की भी अपील की, जिसमें शांति से एकत्रित होने और लोकत्रांत्रिक अभिव्यक्ति की आजादी शामिल है।
न्याय, शांति और हर व्यक्ति की इज्जत के लिए अपना वादा दोहराते हुए, सीबीसीआई ने उम्मीद जताई कि छात्रों की चिंताओं को सच्ची बातचीत और ठोस सुधारों के जरिए दूर किया जाएगा, जिससे देश की शिक्षा प्रणाली और लोकत्रांत्रिक मूल्य मजबूत होंगी।
भारत के धर्मसंघियों के सम्मेलन (सीआरआई) ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर क्रूर हमले की कड़ी निंदा की है।
छात्र नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में 20 जुलाई को नई दिल्ली में शांतिपूर्ण संसद मार्च में भाग ले रहे थे।
सीआरआई की मांगें
सीआरआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि “बिना उकसावे और बिना किसी वजह के ये हमले बहुत बुरे थे, जिसमें पुलिस ने बेगुनाह छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।”
जून के मध्य से ही सैकड़ों विद्यार्थी और दूसरे लोग जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वे शिक्षा मंत्री से वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि डॉक्टर बनने की चाह रखनेवालों के लिए एक जरूरी प्रवेश परीक्षा – जिसे नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) कहा जाता है, मई की शुरुआत में सवाल पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया था। 28 जून से, जाने-माने शिक्षाविद्द सोनम वांगचुक और कुछ छात्र मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं।
सीआरआई ने कहा है कि असहमति जताने, विरोध करने, किसी मकसद के लिए मार्च करने का अधिकार एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह प्रदर्शनकारियों पर हुए हमलों की निष्पक्ष जांच शुरू करे और इन हमलों में शामिल सभी अपराधियों को सजा दे; इस आंदोलन के नेताओं के साथ बातचीत शुरू की जाए और उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाए; सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो; यह गारंटी मिले कि परीक्षा प्रणाली विश्वसनीय और भ्रष्टाचार मुक्त हो; सोनम वांगचुक और दूसरे भूख हड़ताल करनेवाले छात्रों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएँ मिले; और हर नागरिक के विरोध करने के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन किया जाए।
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