‘सिस्टर्स ब्लेंडेड वैल्यू प्रोजेक्ट’: अफ्रीका में धर्मबहनों की प्रेरिताई को बदलना
सिस्टर क्रिस्टीन मासिवो, सीपीएस
‘धर्मबहनों का मिश्रित मूल्य परियोजना’ धर्मबहनों को अपने संस्थानों को मज़बूत करने में मदद करने और एक तय स्तर पर बनाए रखने के लिए शुरू किया गया था।
स्ट्रैथमोर यूनिवर्सिटी बिज़नेस स्कूल की डॉ. एंजेला न्डुंगे, जो इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करती हैं, बताती हैं कि यह छह साल से चल रहा है और इसे कॉनराड एन. हिल्टन फ़ाउंडेशन ACWECA (एसोसिएशन ऑफ़ कॉन्सेक्रेटेड वीमेन इन ईस्टर्न एंड सेंट्रल अफ़्रीका) के साथ मिलकर समर्थन करता है। यह केन्या, युगांडा, तंजानिया और ज़ाम्बिया में शुरू हुआ और अब मलावी तक फैल गया है।
वाटिकन न्यूज़ से बात करते हुए, डॉ. न्डुंगे ने कहा कि “धर्मबहनें कई लोगों के लिए उम्मीद की किरण रही हैं, जो अक्सर हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक कार्य करती हैं।” कोविद-19 महामारी बहुत खतरनाक थी और इसने उनकी कई प्रेरितिक कार्यों की कमज़ोरियों को उजागर किया।
यह परियोजना मुख्य रूप से धर्मबहनों को उनकी सामाजिक प्रेरिताई को स्थायी सामाजिक उद्यमों में बदलने में सहायता प्रदान करता है।
जागने की पुकार
कोविद-19 महामारी धर्मसमाजों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गई: जो लोग स्कूलों और अस्पतालों पर निर्भर थे, उन्हें संचालन बंद करने या कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
डॉ. एनडुंगे ने बताया, "इस अवधि के दौरान कई धर्मबहनें धन की कमी से प्रभावित थीं।" "इसने उन कमजोर समुदायों को प्रभावित किया जिनकी धर्मबहनें सेवा करती हैं, और दीर्घकालिक स्थिरता और भविष्य के संकटों के लिए बेहतर तैयारियों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।"
इससे इन विभिन्न पहलों और सामाजिक कार्यों की स्थिरता के बारे में महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए।
क्षमता निर्माण धर्मबहनों को कौशल सिखाती है
इस प्रोजेक्ट का मकसद क्षमता निर्माण है। डॉ. न्डुंगे ने बताया कि कई धर्मबहनों को प्रबंधन का कार्य करने के लिए बुलाया जाता है, परंतु “उनके पास हमेशा ज़रूरी तकनीकी क्षमता या अपने कार्यों के लिए लंबे समय का कार्यनीतिक दृष्टि नहीं होता है।”
प्रशिक्षण के ज़रिए, धर्मबहनें बजट बनाना, रिकॉर्ड रखना, नेतृत्व और कार्यनितिक योजना बनाना सीख रही हैं। ये हुनर उन्हें प्रथागत चारिटी मॉडल से सामाजिक उद्यमवृत्ति की ओर बढ़ने में मदद करती हैं।
उन्होंने बताया, “पहले, धर्मबहनें चारिटी मॉडल पर फोकस करती थीं।” “हम उन्हें सामाजिक उद्यमवृत्ति के बारे में सोचने में मदद कर रहे हैं, आय के ऐसे तरीके बना रहे हैं जो इन सामाजिक कार्यों को लगातार समर्थन करने के लिए काफी हों।”
वित्तपोषण और मार्केट तक पहुंच
डॉ. न्डुंगे ने कहा, “धर्मबहनों को फंड पाने में बहुत बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने बताया कि इससे कई मंडलियों में डर और हिचकिचाहट पैदा हुई है, क्योंकि उन्हें आर्थिक मदद पाने में मुश्किल हो रही है और कुछ मामलों में, उधारदाताओं ने उनका फायदा उठाया है।
यह परियोजना धर्मबहनों को नैतिक और नए वित्तीय विकल्प पहचानने में मदद कर रहा है, साथ ही उनकी वित्तीय साक्षरता भी बेहतर कर रहा है। धर्मबहनों को उनकी सेवाओं और उत्पाद के लिए मार्केट तक पहुंचने में भी मदद की जा रही है।
कई धर्मसमाज फार्म, स्कूल और हेल्थ सेंटर चलाती हैं, जिनमें अपनी आर्थिक क्षमता को बढ़ाने के लिए कोई रणनीति नहीं होती है।
परियोजना की सफालता
‘धर्मबहनों का मिश्रित मूल्य परियोजना’ ने केन्या के किटुई में धर्मबहनों द्वारा चलाये जा रहे एक सिलाई सेंटर को काफी बदल दिया है।
शुरू में स्कूल यूनिफॉर्म बनाने का काम थोड़ी आय पाने के तौर पर किया जाता था, लेकिन जब धर्मबहनों को क्वालिटी सुधार, व्यपार प्रबंधन और रणनीति विकास की ट्रेनिंग मिली, जिससे उनके काम करने में दक्षता और प्रतिस्पर्धा मजबूत हुई। नतीजतन, बेहतर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करने के बाद उन्हें एक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन गाउन सप्लाई करने का टेंडर मिला।
इस उपलब्धि ने एक नया मोड़ लिया, जिससे उनका अपना साधारण प्रोजेक्ट एक प्रतियोगी सामाजिक उद्यम में बदल गया।
आर्थिक क्षमता बढ़ाने के अलावा, इस सफलता ने बड़े बाजारों के साथ जुड़ने हेतु उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया, यह दिखाते हुए कि कैसे लक्षित योग्यता निर्माण धर्मबहनों को अपने मिशन के प्रति वफादार रहते हुए अपने कामों को बढ़ाने में मदद कर सकती है।
सहयोग और प्रेरणा
डॉ. न्डुंगे ने इस बात पर ज़ोर दिया कि धर्मबहनों को अलग-अलग धर्मसमाजों के साथ मिलकर काम करने, एक-दूसरे को समर्थन करने और एक-दूसरे के कार्यों, जैसे खेती की उपज खरीदना या सिस्टरों द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य संस्थानों से स्वास्थ्य देखभाल हेतु आने के लिए बढ़ावा दिया जाता है।
यह सहयोग उनके मिशन और लंबे समय तक चलने वाली सस्टेनेबिलिटी दोनों को मज़बूत करता है। दूरी, कम इंटरनेट और बिजली की सप्लाई न होने जैसी चुनौतियों के बावजूद, कई धर्मबहनें सीखने और सस्टेनेबिलिटी के नए तरीकों को अपनाने के लिए उत्सुक रहती हैं, साथ ही अपने समुदाय को मज़बूत बनाती हैं।
भविष्य और बढ़ता मिशन
डॉ. न्डुंगे ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह परियोजना धर्मबहनों की प्रेरिताई को और मज़बूत करता रहेगा ताकि वे सुसमाचार प्रचार करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "उन्हें हमेशा अपनी बुलाहट और करिश्मे को याद रखना चाहिए, चाहे वे कितना भी छोटा या बड़ा काम क्यों न करें।"
उन्होंने मिशन को व्क्तिगत स्वास्थ्य और मूलभूत ज़रूरतों का ध्यान रखने के साथ संतुलन करने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया, साथ ही हिस्सेदारों से ज़्यादा समर्थन की उम्मीद जताई।
‘धर्मबहनों का मिश्रित मूल्य परियोजना’ धर्मबहनों के आत्मविश्वास को मजबूत कर रहा है और टिकाऊ सेवाओं एवं सुसमाचार प्रचार करने के कौशल, नेटवर्क और नेतृत्व क्षमता को बढ़ा रहा है।
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