अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा: सिर्फ एक हल नहीं
वाटिकन न्यूज
रोम, शनिवार, 20 जून 2026 (रेई) : “एक प्रतिबद्धता, कई पृष्टभूमि: अलग-अलग संस्कृति में सुरक्षा” इस साल के IADC सुरक्षा सम्मेलन का शीर्षक था, जो शुक्रवार को रोम में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान वाटिकन रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में फादर जोलनर ने बताया कि इसका अंतर्निहित सिद्धांत था कि सुरक्षा के जो विचार पश्चिम में काम करते हैं, उन्हें सीधे तौर पर लागू नहीं किया जा सकता। हर संस्कृति के पास सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देने और रोकथाम को लागू करने के अपने तरीके होते हैं।
पहले से अधिक अंतरराष्ट्रीय
जोलनर बताते हुए कहते हैं, "एक बात जो मैं यहाँ बार-बार सुना, वह थी: 'कोई एक तरीका सबके लिए सही नहीं है।' सुरक्षा के लिए कोई ऐसा दिशानिर्देश नहीं है जो हर जगह लागू हो। कई वाक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया।" 300 रजिस्टर्ड अतिथि और 69 देशों के ऑनलाइन प्रतिभागियों के साथ, यह सम्मेलन पहले से कहीं अधिक अंतरराष्ट्रीय थी। जोलनर, जो कई सालों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं, उनके लिए यह एक साकारात्मक विकास का संकेत है।
उन्होंने कहा, “हम इस बात से बहुत खुश हैं। इससे यह भी पता चलता है कि पिछले 15 सालों में काथलिक कलीसिया में सही विकास हुआ है। इस विषय पर पूरे समाज में, दुनिया भर में, अधिक से अधिक देशों में सक्रिय रूप से बात हो रही है। संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से काफी बढ़ी है। इसे बताने की काबिलियत है। और हमारे पास अलग-अलग शैक्षणिक और पेशेवर पृष्टभूमि के लोग भी हैं जो इस विषय पर गहराई से जुड़े हुए हैं।”
कोई एक तरीका नहीं
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में यह बात और साफ हो जाती है कि सुरक्षा के लिए कोई एक जैसा हल नहीं है। उदाहरण के लिए, यूरोपियन सुरक्षा विचार, अफ्रीका या एशिया में जल्दी ही अपनी सीमा पर पहुँच सकते हैं। जोलनर कहते हैं कि पश्चिमी दुनिया में पारदर्शिता, जवाबदेही या जिम्मेदारी लेने से जो जुड़ा है, जरूरी नहीं कि दूसरी संस्कृति में भी वैसा ही हो। और वह इस साल के सम्मेलन का एक उदाहरण देते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में, दैनिक मुख्य भाषण और विशेषज्ञों की प्रस्तुति के अलावा, अंतर-सांस्कृतिक और अंतःविषय कार्य समूहों भी थे। जोलनर के अनुसार, इनमें विविधता और व्यवहारिक बातों पर फोकस किया गया। उन्होंने जानबूझकर क्षेत्र में काम करनेवाले लोगों को अध्ययन के साथ जोड़ा। यह "बहुत सफल" रहा और इसे खूब पसंद किया गया: "लोग बहुत खुश हैं कि अभ्यास करनेवालों और शोधकर्ताओं को एक-दूसरे से बात करने का मौका मिल रहा है।"
वर्जित क्षेत्र में शोध
सुसमाचार प्रचार विभाग के प्रो-प्रीफेक्ट कार्डिनल लुइस अंतोनियो तागले ने मंगलवार को इस साल के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन, के उद्घाटन पर भाषण दी। सुरक्षा और बाल सुरक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और शोध कर्ताओं के अलावा, कार्यकर्ता और बचनेवाले लोगों ने भी सम्मेलन (16-19 जून) में हिस्सा लिया। उदाहरण के लिए, "पुरोहितों के दुराचार को खत्म करना" पहल का एक प्रतिनिधि मौजूद था। इस हफ्ते, उन्होंने नाबालिगों की सुरक्षा के लिए परमधर्मपीठीय आयोग (15-16 जून) के साथ अपनी पहली मीटिंग भी की, जिसके साथ वे भविष्य में सहयोग करने का इरादा रखते हैं।
सम्मेलन में उन संस्कृतियों के विचार से शोध की प्रस्तुति भी शामिल थी जहां लोग यौन और दुराचार के मुद्दे पर खुल कर बात नहीं करते। उदाहरण के लिए, फादर फाबियो फवाटा, जो एक इतालवी मिशनरी हैं और जिन्होंने कई सालों तक चीन में काम किया है, वे चीनी सेमिनरी में मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर अपने अध्ययन की रिपोर्ट दी।
भारत के फादर रिचर्ड दास ने भारतीय सेमिनरियों में पुरुषों के साथ होनेवाले गलत व्यवहार पर अपनी रिसर्च के नतीजों के बारे में बताया।
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