येरूसालेम में फ्रांसीसी धर्मबहन पर हमले के मामले में संदिग्ध गिरफ्तार
वाटिकन न्यूज
येरूसालेम, शनिवार, 2 मई 2026 (रेई) : येरूसालेम में बाईबिल एवं पुरातत्व पर शोध के फ्रेंच स्कूल के निदेशक फादर ओलिवियर पोक्विलॉन ने गुरुवार को X पर लिखा, “नफरत का कहर एक आम चुनौती है।”
वे मंगलवार, 28 अप्रैल को जैतून पहाड़ पर राजा दाऊद के मकबरे के पास एक धर्मबहन पर हुए हमले का जिक्र कर रहे थे।
येरूसालेम में बाईबिल एवं पुरातत्व पर शोध के फ्राँसीसी स्कूल की एक 48 साल की फ्राँसीसी धर्मबहन और शोधकर्ता को एक आदमी ने पीछा किया, उन्हें धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया और फिर लात मारी।
पुलिस द्वारा जारी एक वीडियो में धर्मबहन के चेहरे के दाहिने हिस्से पर चोट के निशान भी दिख रहे हैं।
पुरोहितों के खिलाफ हिंसा
बुधवार को, इस्राएली पुलिस ने धर्मबहन पर हमला करने के संदेह में एक 36 साल के आदमी को गिरफ्तार करने का दावा किया, और कहा कि कानून लागू करनेवाली एजेंसियाँ हिंसा के किसी भी ऐसे काम को “बहुत गंभीरता से” लेती हैं जो “संभावित नस्लवादी इरादे से प्रेरित हो और पुरोहितों के खिलाफ हो।”
हमले पर कानूनी कार्रवाई जारी है, इस बीच फादर पोक्विलन ने “हमले के दौरान मदद करने आए लोगों, और राजनयिक, शिक्षाविदों, और उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होंने मदद पहुँचायी।”
उपासना की स्वतंत्रता की रक्षा
येरूसालेम में बाईबिल एवं पुरातत्व पर शोध के फ्राँसीसी स्कूल के निदेशक ने धर्मबहन पर “अकारण हमले” की निंदा की है, और जो हुआ उसकी कड़ी आलोचना की है।
इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में इसे “शर्मनाक कृत्य” बताया, और भरोसा दिलाया कि इस्राएल “सभी धर्मों के लिए धर्म की आजादी और उपासना की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए” समर्पित है।
मंत्रालय ने बताया कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति “अभी भी हिरासत में है,” और “हिंसा के खिलाफ पक्की नीति और अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के पक्के इरादे” पर जोर दिया।
बयान में आगे कहा गया है कि, “बेगुनाह लोगों, और खासकर धर्म समुदायों के सदस्यों के खिलाफ हिंसा की हमारे समाज में कोई जगह नहीं है।”
बढ़ती दुश्मनी
येरूसालेम की इब्रानी यूनिवर्सिटी में मानवता विभाग ने भी हमले पर “गहरा सदमा” जताया और एक बयान में इसकी निंदा की।
विभाग ने कहा, “यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि ख्रीस्तीय समुदाय और उसके प्रतीकों के प्रति बढ़ती दुश्मनी के एक परेशान करनेवाले उदाहरण का हिस्सा है।”
अप्रैल के शुरु में, इस्राएली सेना ने दक्षिणी लेबनान के डेबेल गांव में येसु की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के कारण दो सैनिकों को नौकरी से निकाल दिया था – इस हरकत की बहुत निंदा हुई थी।
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