कलीसिया में महिलाएँ : 'हमें एक खास भूमिका निभानी है'
वाटिकन न्यूज
दुनिया भर की महिलाएँ 9 मार्च को रोम में एकत्रित हुईं ताकि वाटिकन में ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई राजदूतावास की एक संयुक्त पहल में हिस्सा ले सकें, जिसकी विषयवस्तु थी: “विश्वास की महिलाएँ: कल की विद्यार्थी नेता।”
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के ठीक बाद, 13 अलग-अलग देशों की 15 महिलाओं ने एक दिन का कोर्स शुरू किया। यह कोर्स इस बात पर केंद्रित था कि कैसे विश्वास, मूल्य और सार्वजनिक जुड़ाव, कलीसिया और पूरे समाज में साकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।
ये महिलाएँ रोम में मौजूद अलग-अलग यूनिवर्सिटी और संगठनों से आई थीं। पूरे दिन, दल ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे विश्वास पर आधारित महिलाओं का नेतृत्व और नजरिया शांति निर्माण, गरीबी कम करने, शिक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों से निपटने में योगदान दे रहे हैं।
यह सिर्फ A या B नहीं है
शुरू में, महिला प्रतिभागियों ने वाटिकन में कनाडाई राजदूत जॉएस नेपियर; वाटिकन में ऑस्ट्रेलियाई राजदूत केइथ पिट; और वाटिकन में ब्रिटिश राजदूत क्रिस्टोफर ट्रॉट के वक्तव्य सुने।
राजदूत नेपियर के भाषण पर गौर करते हुए, कुछ प्रतिभागियों ने एक महिला को परिवार, काम और आध्यात्मिक जीवन में संतुलन बनाते हुए देखने की खूबसूरती के बारे में बताया। यह बात खास तौर पर कोलंबिया की दानिएला नीनो जिराल्दो को छू गई, जो हाल ही में शादी की हैं, और नौकरी कर रही हैं तथा अपने पहले बच्चे को जन्म देनेवाली हैं।
जिराल्दो ने समझाया कि महिलाओं को बच्चे के जन्म के बाद "क्या होगा, इससे डरना नहीं चाहिए"। कनाडाई राजदूत का उदाहरण देखकर उन्हें काम और मातृत्व में संतुलन बनाने से न डरने की हिम्मत मिली। उन्हें कलीसिया में अपने मिशन को छोड़ने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमें वास्तव में संदर्भ विन्दु की जरूरत है क्योंकि कभी-कभी हमें लगता है कि हमें A या B में से किसी एक को चुनना है। इन उदाहरणों को देखकर हमें आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।”
महिलाओं की अहम भूमिका
केन्या की मेरी वांगिथी मुगो ने कार्यक्रम के अंत में जोर देकर कहा, “जितना हम महिलाओं की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं...हमें उतना ही उन महिलाओं को भी याद रखना चाहिए जिनकी आवाज उनके बुरे माहौल ने दबा दी है।”
मानव तस्करी से लड़ने के लिए तलिथ कुम में काम करनेवाली संस्था सेमा नामी की संस्थापक और यूवा राजदूत के लिए यह कार्यक्रम “महिलाओं के शोषण के खिलाफ कुछ करने” का निमंत्रण था।
मानव तस्करी से बचे लोगों के साथ सीधे काम करते हुए, मुगो ने बताया कि महिलाएँ कैसे एक अहम और खास भूमिका निभाती हैं। बहुत से लोग अपने अनुभव के बाद मदद के लिए चर्च जाते हैं, और अक्सर उन्हें पुरोहित मिल जाते हैं।
शोषण क्या होता है, यह जानने के बावजूद, मुगो ने कहा कि पुरोहित एक महिला के अनुभव को नहीं समझ सकते। उन्होंने कहा, “यहीं पर औरतें आती हैं क्योंकि हम एक-दूसरे को समझते हैं। हालांकि मैं ठीक से नहीं समझती कि एक पीड़िता के तौर पर किसी ने क्या झेला होगा, लेकिन एक औरत होने के नाते मैं उन्हें 90% समझ सकती हूँ।”
प्रेरणा के स्रोत
समाज और कलीसिया में महिलाओं की भूमिका पुरुषों से अलग है। यह पुरोहिताई या धर्मबंधु जैसा नहीं है। लेकिन इस कार्यक्रम का मकसद इस बात पर जोर देना था कि काथलिक कलीसिया में महिलाओं की भूमिका है, स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तर पर।
मुगो ने कहा, "एक बपतिस्मा प्राप्त काथलिक के रूप में, एक महिला के तौर पर, हमारी [एक खास] भूमिका है, विशेषकर, जब महिलाओं और बच्चों के मुद्दों की बात आती है।" मुश्किल पृष्टभूमि से आनेवाली लड़कियों और महिलाओं के लिए, कलीसिया में नेतृत्व की भूमिका में महिलाओं को देखना उम्मीद जगाता है।
उन्होंने समझाया, "यह गुलाबों का रास्ता नहीं होगा, लेकिन हम आनेवाले नेताओं के लिए उम्मीद है।"
इसके अलावा, इस कार्यक्रम में कलीसिया में नेतृत्व की पदवी पर आम महिलाओं को दिखाया गया—जिसने जिराल्डो को सचमुच प्रेरित किया। उन्होंने कलीसिया के राजनयिक निकाय के रिश्ते को देखने की खूबसूरती पर जोर दिया। इससे उन्हें सच में उम्मीद मिली क्योंकि, जैसा कि उन्होंने बताया, “कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं यहाँ [रोम में] एक आम महिला के तौर पर पढ़ाई कर रही हूँ, और मुझे नहीं पता कि मैं इन सब चीजों को कैसे एक साथ जोड़ूँगी। लेकिन मुझे मालूम है कि मैं रुक नहीं सकती।”
एक नया समर्थन नेटवर्क
जिराल्डो और मुगो दोनों ने बताया कि कैसे इस कार्यक्रम ने उन्हें उन महिलाओं से जोड़कर एक समर्थन नेटवर्क दिया जो उन्हीं जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही थीं। यह एक ऐसा सिस्टम है जो महिलाओं को आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
मुगो ने कहा कि यह “मानव तस्करी और महिलाओं के शोषण से लड़ने में एक कदम आगे है।”
जिराल्डो ने जोर देकर कहा, “हमें, महिलाओं के तौर पर, एक साथ काम करने और ऐसी जगहें बनाने की जरूरत है जहाँ हम जुड़ें, बात करें और एक-दूसरे का समर्थन करें।” उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को एक साथ आगे बढ़ने और अलग-अलग नजरिए से सीखने में मदद मिलती है। यह नेटवर्क बनाना जरूरी है क्योंकि इससे महिलाओं को “यह समझने में मदद मिलती है कि हम इस प्रक्रिया में अकेली नहीं हैं।”
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