लेबनान में युद्ध की वापसी
वाटिकन न्यूज
लेबनान, बृहस्पतिवार, 12 मार्च 26 (रेई) : 5 मार्च को इस्राएली सेना के खाली करने के आदेश जारी करने के बाद से बेरूत के दक्षिणी इलाकों के लोग हजारों की संख्या में भाग रहे हैं। इस्राएल के वित्तमंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने चेतावनी दी है कि ये इलाके जल्द ही गज़ा पट्टी के तबाह हुए शहर "खान यूनिस" जैसे दिखेंगे।
जिन जगहों को खाली करने के लिए चुना गया है, वहाँ 700,000 से ज्यादा लोग रहते हैं।
इस आदेश के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत में अफरा-तफरी और भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई, क्योंकि लोग उन इलाकों में भाग रहे हैं जहाँ आमतौर पर बमबारी नहीं होती। यह एक हफ्ते में विस्थापन का तीसरा दौर है।
2 मार्च से लोग कारों में या फुटपाथ पर गद्दों पर सो रहे हैं, जब हिज्बुल्लाह ने 28 फरवरी को ईरान पर इस्रराइली-अमरीकी बमबारी और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के जवाब में इस्राएल में रॉकेट दागे थे। इस्राएल ने दक्षिणी लेबनान, बेका और बेरूत के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की – ये सभी इलाके शिया मुस्लिम आबादी वाले हैं।
बेरूत के दक्षिणी इलाके में रहनेवाले अली सौएदा ने कहा, “यह बहुत डरावनी रात थी।” इस रात मैं, मेरी पत्नी और मेरा 18 महीने का बेटा हुसैन, इस्राएली मिसाइलों से जाग गए। तब से, परिवार एक दोस्त से उधार ली गई कार में सो रहा है।
रमजान के दो हफ्ते बाद, 5 मार्च को उनकी पत्नी रूबना ने कहा, “मैं सो नहीं सकती, मैं रोजा नहीं रख सकती, और मैं खा नहीं सकती।”
उनके आस-पास, परिवार कुर्सियों पर, जमीन पर या अपनी कारों में बैठे थे, उनका जरूरी सामान प्लास्टिक की थैलियों में पैक था।
पूरे लेबनान में, 8 मार्च तक 500 से ज्यादा शेल्टर खुल गए, जिनमें लगभग 1,10,000 बेघर लोग बहुत खराब हालात में रह रहे हैं, जिनके पास सिर्फ खाना पकाने के लिए किचन और बाथरूम ही हैं।
बासम यूनुस ने अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ बेरूत के पूर्वी इलाके डेकवानेह में शरण ली। वे इस्राएली बॉर्डर से तीन मील दूर डिबल गांव में अपने घर से भाग गये हैं। 70 मील के इस सफर में उन्हें 24 घंटे लगे।
उन्होंने कहा, “सड़कें भाग रहे लोगों से भरी हुई थीं।” “हमें डर था कि इस्राएल हम पर बमबारी कर देगा। ऐसे पलों में, आपके पास सिर्फ भगवान ही होते हैं।”
मिस्टर यूनुस, जिनका परिवार 2023 और फिर 2024 में युद्ध के कारण बेघर हो गया था, ने कहा, “अभी के लिए, हम रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। मुझे किराए पर 500 डॉलर का एक फ्लैट मिला है, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं इसे कैसे चुकाऊंगा।”
5 मार्च को, यूनुस ने बेरूत के नाबा इलाके में संत जीन-एंटाइड थौरेट की सिस्टर्स ऑफ चैरिटी के सेंटर में मदद मांगी।
मुश्किल समय में, लेबनानी परिवार एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं; सरकार बहुत कम मदद करती है। हालांकि, सिस्टर फेरयाल करम, जो नबा में समाज सेवा कार्यक्रम का संचालन करती हैं कहा, “जब बेघर लोगों को उनके रिश्तेदार अपनाते हैं, तब भी वे गरीब होते हैं और लंबे समय तक जगह देने का खर्च नहीं उठा सकते।
उन्होंने कहा, “अब तक, 25 परिवारों ने हमसे संपर्क किया है। ये वही परिवार हैं जो 2024 में तनाव बढ़ने के दौरान दक्षिण से नबा भाग आए थे।”
“यह नया तनाव इतना अचानक था कि हमारे पास उनकी मदद करने के लिए कुछ भी नहीं है। राहत के काम के लिए फंड देनेवाले संगठन अभी जरूरतों का आंकलन कर रहे हैं।”
4 मार्च को, बेरूत में CNEWA के प्रांतीय कार्यालय ने कम से कम 6,000 परिवारों को कंबल, गद्दे, खाने के पैकेट, इंधन और रूपये मदद देने का खर्च 1 मिलियन डॉलर बताया।
घर के अलावा, मिस्टर यूनुस ने कहा कि उन्हें दवा और अपनी कार के इंधन के लिए तुरंत रकम चाहिए।
इस्राएल के खाली करने के आदेश जारी करने के बाद, मे करम 5 मार्च को हदाथ में अपने घर से भाग गईं और छह मील दूर रूमीह में एंटोनिन सिस्टर्स के कॉन्वेंट में शरण ली, जहाँ उनकी बेटी भी धर्मबहन हैं।
करम कॉन्वेंट के बेसमेंट में एक बेडरूम वाले कमरे में अपने परिवार के आठ सदस्यों के साथ रहती हैं, जिसमें उनके ससुराल वाले और तीन पोते-पोतियां शामिल हैं।
करम ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कल बेहतर होगा।”
दक्षिणी लेबनान के सबसे बड़े शहरों में से एक, नाबातिह में एंटोनिन की धर्मबहनें हाई स्कूल चलाती हैं। वहाँ की चार धर्मबहनें भी यहाँ आयी हुई हैं।
एंटोनिन धर्मबहनों की सुपीरियर सिस्टर मेरी तौमा ने कहा, “जब हम स्कूल से निकले तो मैं रो पड़ी।”
उन्होंने कहा, “हम क्लास रूम में खिड़कियाँ खोलने गए, ताकि वे बमबारी में टूट न जाएँ, जो दिल तोड़नेवाला था।” स्कूल में 1,100 विद्यार्थी हैं; जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं।
2024 में 66 दिन चले युद्ध के ज्यादातर समय, वे और एक दूसरी धर्मबहन बेघर हुए लोगों की मदद करने के लिए स्कूल में ही रहीं।
उन्होंने कहा, “इस बार, बमबारी बहुत ज्यादा हो रही हैं, इसलिए हम चले आये।” नवंबर 2024 में युद्धविराम के बाद से, धर्मबहनें स्कूल लौट आई थीं, जबकि इस्राएली सेना ने 15,400 से ज्यादा बार युद्धविराम समझौता तोड़ा, युद्धक विमानों की लगातार मौजूदगी और ड्रोन निगरानी थी।
उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानती कि हम कब वापस जा पायेंगे।”
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