संत फ्रांसिस के अवशेषों को देखने के लिए तीर्थयात्री असीसी में उमड़ पड़े
वाटिकन न्यूज
असीसी, शनिवार 14 मार्च 2026 : यह वर्ष असीसी के संत फ्रांसिस की मत्यु की 800वी सालगिरह है इससे पहले, उनकी अस्थियां सिर्फ़ एक बार 1978 में सिर्फ़ एक दिन के लिए विश्वासियों के दर्शन के लिए रखी गई थीं।
अब इस वर्ष, संत फ्रांसिस की मृत्यु की 800वीं सालगिरह मनाने हेतु पूरे एक महीने के लिए उनकी अस्थियों को प्रदर्शन के लिए रखा गया है। असीसी, जो इटली का सेंट्रल हिलटाउन है और जहां संत फ्रांसिस रहते थे और जहां अब उनकी अस्थियां हैं।
महागिरजाघर के देखभाल करने वाले फ्रायर्स का कहना है कि संत फ्रांसिस महागिरजाघर के मुख्य वेदी के सामने रखी गई संत फ्रांसिस की अस्थियों का दर्शन करने लगभग 220,000 तीर्थयात्री आ चुके हैं, उनकी उम्मीद है कि यह संख्या 400,000 तक पहुंच सकती है।
ऑस्ट्रेलिया के फ्रांसिस्कन फादर बेनेडिक्ट ला वोल्पे, जो असीसी में तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं, कहते हैं कि इनमें से हर यात्री शहर से यह जानकर निकलता है कि “उनकी संत फ्रांसिस से मुलाकात हुई है।” “उनका संत फ्रांसिस की आत्मा से, फ्रांसिस के व्यक्तित्व से सामना हुआ है, जो आज, उनकी मृत्यु के 800 साल बाद, उनसे बात करते हैं।”
एक प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि महागिरजाघऱ, जहाँ संत फ्रांसिस को दफ़नाया गया है, अवशेषों का प्रदर्शन “फ्रांसिस द्वारा हमें दी गई विरासत को फिर से खोजने का एक न्योता था, एक ऐसे व्यक्ति जिनका शांति और भाईचारे का संदेश आज भी इंसानियत के दिल से बातें करता है।”
जंग में डूबी दुनिया में मन की शांति
संत फ्रांसिस ने असीसी की शहर की दीवारों के बाहर, नरक की पहाड़ी (कोलो डी'इनफर्नो) नाम की जगह पर दफ़नाने का फ़ैसला किया, जहाँ अपराधियों को मौत की सज़ा दी जाती थी। आज का अनोखा महागिरजाघऱ, जिसमें दो तल्ले हैं और जिस पर जोत्तो के दुनिया भर में मशहूर भित्ति-चित्र बने हैं, उनके अवशेषों को रखने के लिए बनाया गया था।
महागिरजाघर के निचले तल्ले में, संत फ्रांसिस की अस्थियों का दर्शन करने के लिए तीर्थयात्री लाइन में लगते हैं। तीर्थयात्री, जिनमें से कई व्हीलचेयर पर भी होते हैं, अस्थियों के सामने चुपचाप प्रार्थना करने के लिए कुछ सेकंड रुकते हैं और फिर आगे बढ़ते हैं।
आज संत का जीवन हमारे लिए क्या संदेश देता है? उनकी विरासत पर सोचते हुए, फादर ला वोल्पे उस “मन की शांति” पर ज़ोर देते हैं जो फ्रांसिस को येसु से मुलाकात करने पर मिली – वह शांति, जो उनके अनुसार, उस राजनीतिक शांति की नींव है जो आज पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल लगती है।
फादर ला वोल्पे ने कहा कि संत फ्रांसिस हमें यही सिखाते हैं कि ईश्वर से मिलने से जो अंदरूनी शांति मिलती है, वह "हमारे दिलों में बढ़ सकती है, और हमारे पूरे समुदाय में और फिर दुनिया में भी फैल सकती है।"
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