मध्य पूर्व एवं ईरान में शांति हेतु सीसीबीआई ने की प्रार्थना की अपील
वाटिकन न्यूज
नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 5 मार्च 2026 (सीसीबीआई) : भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीसीबीआई) ने मध्य पूर्व एवं ईरान में बढ़ती अशांति एवं हिंसा के लिए गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विश्वासियों से पवित्र मिस्सा में भाग लेकर, पवित्र रोजरीमाला विन्ती और उपवास द्वारा शांति हेतु प्रार्थना करने का आह्वान किया है।
भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीसीबीआई) के अध्यक्ष एवं गोवा और दमन के महाधर्माध्यक्ष फिलीप नेरी कार्डिनल फेराओ की ओर से, राँची महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष विसेंट आईंद द्वारा जारी विज्ञप्ति में भारत की लैटिन काथलिक कलीसिया के सभी महाधर्माध्यक्षों, धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, उपयाजकों, धर्मसंघियों, धर्मबहनों और विश्वासियों को सम्बोधित किया गया।
5 मार्च को जारी विज्ञप्ति में सीसीबीआई के अध्यक्ष ने लिखा, “मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति और हिंसा के इन दिनों में, विशेष रूप से ईरान और पड़ोसी देशों के बीच हालिया शत्रुता के संदर्भ में, मैं भारत की पूरी लैटिन कलीसिया को शांति के लिए प्रार्थना एवं विन्ती में एकजुट होने के लिए ईमानदारी से आमंत्रित करता हूँ।”
उन्होंने भारत की पूरी काथलिक कलीसिया का आह्वान करते हुए रविवार 8 मार्च 2026 को शांति के लिए प्रार्थना दिवस के रूप में मनाने का प्रोत्साहन दिया है। “कृपया मध्य पूर्व में शांति के लिए प्रार्थनाएँ, विशेष रूप से पवित्र यूखरिस्त में (पवित्र बलिदान) के दौरान अर्पित करें।” विश्वासियों की प्रार्थना में शत्रुता की समाप्ति, निर्दोष जीवन की रक्षा और वैश्विक नेताओं के बीच विवेक और संयम के लिए विशेष मतलब शामिल करने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, 8 मार्च से 14 मार्च तक प्रत्येक दिन विशेष रूप से शांति के लिए पवित्र रोजरी माला विन्ती अर्पित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। जिसमें माता मरियम से वर्तमान तनावों के लिए मेल-मिलाप, संवाद और न्यायपूर्ण समाधान के लिए शांति की रानी माता मरियम की मध्यस्थता की याचना की जाए।
साथ ही, विश्व शांति के लिए त्याग तथा हिंसा एवं संघर्ष से प्रभावित सभी लोगों की सुरक्षा के लिए 13 मार्च को उपवास और प्रार्थना दिन मनाने की सलाह दी गई है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि युद्ध और अस्थिरता से होनेवाली पीड़ा मानव परिवार को गहरा घाव देती है।
धर्माध्यक्षों ने चिंता जतायी है कि भारत के हमारे कई भाई-बहन मध्यपूर्व के विभिन्न देशों में रह रहे हैं और काम कर रहे हैं। उनमें से कई दूर रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं और कलीसिया के जीवन तथा हमारे राष्ट्र के लिए उदारतापूर्वक योगदान देते हैं। उनके लिए प्रार्थना करते हुए उन्होंने कहा कि अनिश्चितता की इस घड़ी में हम उन्हें विशेष रूप से प्रभु की छत्रछाया में सौंपते हैं और उनकी सुरक्षा एवं कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं।
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