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मोस्को मोस्को  (AFP or licensors)

मॉस्को विकर जेनेरल : यूक्रेन युद्ध समाप्त होना चाहिए

मॉस्को के काथलिक धर्मप्रांत के विकर जेनरल ने वाटिकन न्यूज से यूक्रेन में लड़ाई के दौरान 'अनगिनत मौतें', 'दूसरों' के साथ हमदर्दी रखने की अहमियत और रूस के छोटे काथलिक समुदाय की हालत के बारे में बात की। यूक्रेन, शनिवार, 28 फरवरी 2026 (रेई) : रूस द्वारा फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद चार साल बीत चुके हैं।

वाटिकन न्यूज

वर्षगाँठ को चिन्हित करने के लिए, वाटिकन न्यूज ने मॉस्को में ईश माता महाधर्मप्रांत के विकर जनरल फादर किरिल गोरबुनोव से बात की।

वाटिकन न्यूज: यूक्रेन और रूस बड़े पैमाने पर लड़ाई का पांचवाँ साल शुरू कर चुके हैं। आज रूसी लोगों में क्या भावना है?

फादर किरिल गोरबुनोव: बेशक, रूस में हमारे बहुत छोटे काथलिक समुदाय की तरफ से बोलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। यह ज्यादातर लोगों की सोच से बहुत छोटा है। हम आम आबादी के 1% से भी कम हैं, और काथलिक धर्म माननेवालों की संख्या और भी कम है। कई ऐतिहासिक कारणों से, रूस में काथलिक कलीसिया को कुछ शक की नजर से देखा जाता है, विदेशियों की कलीसिया माना जाता है, एक ऐसी कलीसिया जो असल में रूसी संस्कृति का नहीं है। और यह, रूस में काथलिकों के लिए एक चुनौती है कि वे एक तरफ रूसी संस्कृति, रूसी भाषा के लोग हों, और साथ ही दुनियाभर में फैली विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया से भी जुड़े हों।

इस समय में, मैं कहूँगा कि रूस में लोग, और काथलिक भी, इस लड़ाई को लेकर वही सोच रखते हैं जो हमारी है। इसे खत्म होना चाहिए। इस लड़ाई के दौरान गई अनगिनत मौतें खुद ही सब कुछ बयां करती हैं। हिंसा खुद ही सब कुछ बतलाती है, और इच्छा है कि इसका कोई नतीजा निकले। यह नतीजा एक सही और हमेशा रहनेवाली शांति होनी चाहिए, और यही रूसी कैथोलिकों की उम्मीद है।

सवाल: दुर्भाग्य से, पिछले चार सालों में मरनेवालों की संख्या काफी बढ़ गई है। कब्रिस्तान बढ़ गए हैं। क्या मौतों की संख्या इस बात पर असर डालती है कि रूसी इस लड़ाई को कैसे देखते हैं?

जवाब: मैं सभी रूसियों की तरफ से नहीं बोल सकता। यह मुश्किल होगा। मैं उन लोगों की तरफ से बोल सकता हूँ जिनसे मैं मिलता हूँ, जो एक पुरोहित के रूप में मुझसे बात करते हैं। एक तरफ, इनकार करने की बात है। दुर्भाग्य से, बहुत से लोग इस सच्चाई को दबाना पसंद करते हैं, जो हो रहा है उस पर ध्यान नहीं देते और कहते हैं, “ हम इस पर असर नहीं डाल सकते। हम इस बारे में कुछ नहीं कर सकते। बस दिखावा करते हैं कि कुछ नहीं हो रहा है। बस ध्यान नहीं देते हैं” और फिर उम्मीद होती है: “चलो पहले जैसी हालत में वापस चलें। यही चाहते हैं कि चीजें फिर से सामान्य हो जाएँ।” जो संभव है।

मैं पोप फ्राँसिस के साहस से हमेशा बहुत प्रभावित रहा हूँ, जो 2014 की शुरुआत में ही टुकड़ों में लड़े गए तीसरे विश्व युद्ध के बारे में बोलना शुरू कर दिया थे। बहुत से लोगों के लिए ये शब्द सुनना बहुत अजीब था। और मुझे लगता है कि ये भविष्यवाणी के शब्द थे, जिन्होंने कुछ भयांकर घटना होने का अंदाजा लगा लिया था। हम इस सच्चाई को नजरअंदाज नहीं कर सकते। एक पुरोहित के रूप में, मुझे लोगों से कहना है, “आप बस यह दिखावा नहीं कर सकते कि कुछ नहीं हो रहा है।”

दूसरी तरफ, कुछ लोगों के लिए, [झगड़ा] उनके पूरे दिमाग पर छा जाता है। उन्हें इस भयानक सच्चाई के अलावा कुछ नहीं दिखता। इसलिए वे उम्मीद खो देते हैं। वे निराश हो जाते हैं। वे सवाल करते हैं कि क्या ईश्वर (यह महामारी के दौरान शुरू हुआ) सच में अच्छे हैं, अगर वे इन चीजों को होने देते हैं। लेकिन अब वे इस पर और भी ज्यादा सवाल करते हैं: क्या कलीसिया ईश्वर के बारे जो सिखाती है कि वे दयालु, अच्छे, करुणावान हैं, सच है, अगर ऐसी चीजें होती हैं? तब हमें निश्चय ही मुक्ति के इतिहास को देखना होगा। हमें देखना होगा कि धर्मग्रंथ क्या कहते हैं। और धर्मग्रंथ हमेशा कहते हैं कि जब ऐसी चीजें होती हैं, तो ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अन्याय का प्याला छलक रहा होता है, और कुछ बदलना जरूरी है। हमारा जीवन बदलना है। सिर्फ नेताओं, राजनीतिक पार्टियों, देशों की ही नहीं, बल्कि हर एक इंसान का जीवन बदलना है।

हमारे कई परिवार एक साथ हैं, लेकिन हमारे पास कई रूसी-यूक्रेनी परिवार भी हैं, खासकर, काथलिकों में, और ये परिवार अब बँट गए हैं या बिखर भी गए हैं। यह लोगों के लिए बहुत दुःख की बात है। उन्हें किसी तरह इससे निपटना होगा।

प्रश्न : रूस में इस लड़ाई के बारे में क्या कहानी दिखायी जा रही है, रूसियों के पास किस तरह की जानकारी है?

जवाब: मैं कहूँगा कि रूस की कहानी काफी हद तक इस लड़ाई में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी दूसरे देशों की कहानी जैसी ही है। कहानी यह है कि सच हमारे साथ है। हम सही हैं और दूसरे गलत हैं और, क्योंकि मैं अलग-अलग भाषाओं में, इंग्लिश, जर्मन और इटालियन भाषाओं में समाचार देख सकता हूँ, और मैं देख सकता हूँ कि कहानी लगभग सभी तरफ एक जैसी है: कि विपक्ष, दुश्मन है, दोषी है। दूसरे लोग बुरे हैं, सिर्फ इस मायने में नहीं कि उन्होंने कुछ गलत किया है। बल्कि इसलिए कि उनकी संस्कृति बुरी है, बिगड़ा हुआ मानवीय स्वभाव है, जो सच में शांत नहीं रह पाते, समझदार नहीं हो पाते। विपक्ष के साथ शांति से रहने की असलियत पर बहुत गहरा शक है। मैं कहूंगा कि यही एक ऐसी कहानी है जो अभी सभी तरफ दिखाई जा रही है।

कलीसिया के संदेश में जरूरी बात यही है कि हमें इसी भावना से ऊपर उठना है। उदाहरण के लिए, जब मैंने, पोप लियो के साथ यूक्रेनी महिलाओं से मुलाकात के बारे में खबर सुनी और उन्होंने कहा: “हम इस झगड़े के लिए रूसी लोगों को दोष नहीं दे सकते, क्योंकि हम खुद नहीं जानते कि अगर हम उसी स्थिति में, उसी जानकारी वाले माहौल और उसी जानकारी वाली परिस्थिति में रह रहे होते, तो हम कैसा व्यवहार करते, हमारा नजरिया क्या होता। अगर हम वही खबरें, वही विचार सुनते। इसलिए हम उनके दृष्टिकोण के लिए उन्हें दोष नहीं दे सकते।”

यही शुरुआत है। यही वह बिन्दु है जहाँ से हमें शुरू करना है: यह समझना कि लोग दुर्भाग्य से लोग सिर्फ वही देखते हैं, जो वे जानते हैं, उसी तक सीमित रहते हैं, और फिर हमें वहाँ से आगे बढ़ना होगा, यह देखने के लिए कि हम एक-दूसरे को और गहराई से जानते हुए शांति की ओर कैसे बढ़ सकते हैं।

सवाल: आपने रूस में काथलिक लोगों के छोटे समुदाय का जिक्र किया। यह समुदाय कैसे सामना कर रहा है?

जवाब: आम तौर पर, मैं कहूँगा कि सच्चाई यह है कि किसी न किसी तरह जीवन चलती रहती है। कलीसिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं, पवित्र संस्कार, सामुदायिक प्रार्थनाएँ और मिस्सा बलिदान। यह हमेशा की तरह चलता रहता है। लेकिन मैं कहूंगा कि जो बदलता है वह यह है कि कलीसिया के लिए एकता कितनी जरूरी है, इसकी नई समझ आई है, क्योंकि हमें लगता है कि सिर्फ इसी लेवल पर कलीसिया की एकता को चुनौती नहीं दी जाती है। हम सब जानते हैं कि धर्मविधि, कुछ नैतिक मामलों, भविष्य में कलीसिया कैसी होनी चाहिए, कलीसिया में अलग-अलग प्रार्थनाओं के बारे में मतभेद है। हमारे पास बहुत सी ऐसी बातें हैं जो कलीसिया में लोगों को बांटती हैं।

लेकिन, ऐसी हथियारों वाली लड़ाई भी फूट का एक कारण है। लोग कभी-कभी गहरे झगड़े में होते हैं। मैं मॉस्को में रहता हूँ, रूसी कलीसिया की सबसे बड़ी पल्ली में, मॉस्को के कथिड्रल पैरिश में, इसलिए शायद यह उतना दिखाई नहीं देता, लेकिन जब आप एक सामान्य रूसा काथलिक पल्ली के बारे में बात करते हैं, जो आमतौर पर बहुत छोटे होते हैं, तो हाँ, कभी-कभी विभाजन समुदाय के लिए बहुत बुरा हो सकता है। और [यह जरूरी है] कि हम दूसरे लोगों को स्वीकार करें, दुनिया को देखने का नजरिया, राय में अंतर होने के बावजूद एक साथ प्रार्थना कर सकें, यह समझें कि ईश्वर उन चीजों से बड़े हैं जो हमें बाँटती हैं। उनका प्यार बड़ा है। मुक्ति के लिए उनकी योजना बड़ी है। और यह हम सभी के लिए एक जैसा है। हम अलग नहीं हैं। वे हमें अलग नजरों से, अलग नजरिए से नहीं देखते। वे हम सभी को बचाना चाहते हैं। यह सब बहुत जरूरी है: इसे सिर्फ एक विचार के तौर पर स्वीकार करना नहीं, बल्कि इसे सच में दिल से लेना, दूसरे लोगों को ईश्वर की नजरों से देखना है। यह बहुत, बहुत जरूरी बात है।

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28 फ़रवरी 2026, 15:37