2023.01.20 ख्रीस्तीय एकता 2023.01.20 ख्रीस्तीय एकता 

ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सप्ताह: एकता का अर्थ है सहयोग, हीनता नहीं

ख्रीस्तीय एकता को समर्पित सप्ताह के दौरान, अर्मेनियाई प्रेरितिक कलीसिया में पवित्र मरियम की माता ख्रीस्तीय एकतावर्धक वार्ता विभाग के निदेशक ने सच्ची एकता के बारे बात की और कहा कि इसमें हीनता की भावना नहीं है।

वाटिकन न्यूज

रोम, शुक्रवार, 23 जनवरी 26 (रेई) : 118 साल पहले, एंगलिकन धार्मिक समुदाय के संस्थापक जिन्होंने बाद में काथलिक कलीसिया में प्रवेश किया, ख्रीस्तीय एकता के लिए प्रार्थना सप्ताह का परिचय दिया। फादर पौल वॉटशन ने इस पहल को जारी किया और पोप पीयुस 10वें ने एक साथ बाद इसे आशीष दी।

साल 2026 के ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सप्ताह को मनाने के लिए अर्मेनियाई प्रेरितिक कलीसिया ने देश के अन्य स्थानीय कलीसियाओं के साथ सामग्री तैयार की है।  

वाटिकन न्यूज़ के अगुस्टीन अस्ता के साथ एक साक्षात्कार में, अर्मेनियाई प्रेरितिक कलीसिया में पवित्र मरियम की माता के ख्रीस्तीय एकता विभाग के निदेशकर, फादर गरेगिन हम्बार्डज़ुम्यान ने इस बात पर जोर दिया कि यह समय “महत्वपूर्ण चीजों की ओर लौटने” का है।

मौलिक बातों पर वापसी

फादर हम्बार्डज़ुम्यान ने कहा कि इस हफ्ते का मतलब है, “एक साथ प्रार्थना करना और एक साथ ईश्वर के वचन सुनना एवं याद रखना कि हम मसीह के एक ही शरीर हैं।”

हालांकि, निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि इसका मतलब यह नहीं है कि विविधता के लिए कोई जगह नहीं है, बल्कि, यह एकता में मदद कर सकता है।

उदाहरण के लिए, उन्होंने अर्मेनियाई और दूसरे ख्रीस्तीय कलीसियाओं को देखा, जिनकी अपनी ख्रीस्तीय पहचान है “जो अपने राष्ट्रीयता की पृष्टभूमि से जुड़ी हुए हैं।”

फिर भी फादर गरेगिन ने इस बात पर जोर दिया कि दुनियाभर का ख्रीस्तीय समुदाय अलग-अलग कलीसियाओं से योगदान दे सकता है।

मुश्किलों में भी डटे रहना

आर्मेनिया के इतिहास को देखते हुए, निदेशक ने समझाया कि यह सिखा सकता है कि “मुश्किलों से एकता कैसे मजबूत होती है।” इस बारे में, फादर गरेगिन ने आर्मेनिया की ख्रीस्तीय कलीसिया के बारे बताया कि वह विश्वास, आशा और मेल-जोल के जरिए डटे रहना सीखी है।

उन्होंने कहा, “इस तरह की मजबूती, दुनियाभर के ख्रीस्तीय समुदाय में मदद कर सकती है। हमारा मानना ​​है कि एक आम ख्रीस्तीय साक्ष्य जरूरी है।”

फादर ने समझाया कि आज की दुनिया में इस आम साक्ष्य की विशेष जरूरत है, जो लड़ाई-झगड़े, अन्याय और कई लोगों के लिए जीवन का अर्थ खोने से भरी हुई है।

ख्रीस्तीय के रूप में प्रार्थना में एक साथ आने से कई लोगों को अर्थ और मकसद खोजने में मदद मिल सकती है।

एकता का क्या मतलब है?

फादर ने बतलाया कि एकता का अर्थ एक दूसरे का समर्थन करना है और इसमें किसी की अधीनता की भावना नहीं है। हीनता की भावना भी नहीं है। ख्रीस्तीय एकता उन ख्रीस्तीयों के बीच हो सकती है जो एक समान हैं और जो एक दूसरे का समर्थन करती हैं। लेकिन इस तरह की एकता सिर्फ प्रतिबद्धता से ही संभव है जिसके बार फादर ने कहा कि यह वैकल्पिक नहीं है।

एकता के लिए पहल

प्रार्थना एवं एकता के लिए समर्पित इस सप्ताह में, फादर ने कहा कि प्राथमिकताओं में से एक कलीसियाओं की विश्व समिति, रोमन काथलिक कलीसिया और दूसरे ख्रीस्तीय समुदायों जैसे अलग-अलग संगठनों के साथ भाईचारा पूर्ण सहयोग होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि “ऐसी सोच बनाने की कोशिश की जाए जो हर ख्रीस्तीय कलीसिया की समझ के खिलाफ हो।” इसका मकसद अलग-अलग कलीसियाओं की विशेषताओं को खत्म करना या नजरअंदाज करना नहीं होना चाहिए।

बल्कि, फादर गरेगिन ने इस बात पर जोर दिया कि प्राथमिकता “कलीसियाओं के बीच सहयोग के साथ भाईचारा पूर्ण भावना को बनाए रखना और मजबूत करना होनी चाहिए, खासकर, आज की दुनिया की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए।”

ख्रीस्तीय एकता प्रार्थना सप्ताह जैसी पहल कलीसियाओं को एक साथ आने और आगे बढ़ने का मौका देती हैं।

फादर ने कहा, "यह देखकर बहुत सुकून मिला कि कैसे ख्रीस्तीय भाई-बहन एक ही परंपरा की प्रार्थना में एकत्रित होते हैं, जो कभी-कभी एक दूसरे से अनजान होती है - लेकिन फिर भी इतनी गहरी भावना और आध्यात्मिकता है जो उन सभी को एक कलीसिया के रूप में, मसीह की एक कलीसिया के रूप में एकजुट करती और बांधती है।"

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

23 जनवरी 2026, 14:46