कोंगो के महाधर्माध्यक्ष ने निरस्त्र शांति हेतु पोप के आह्वान का स्वागत किया
जॉन-पॉल कांबा, एसजे
लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में – एक ऐसा देश जो दशकों से संघर्ष और अस्थिरता से गुजरा है – पोप लियो 14वें की “बिना हथियार और निहत्थी” शांति की अपील को लोगों ने विशेष रूप से सुना है। लुबुम्बाशी के महाधर्माध्यक्ष और कांगो के राष्ट्रीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष फुलजेंस मुटेबा बताते हैं कि पोप के संदेश का “बहुत खुशी और कृतज्ञता के साथ” स्वागत किया गया है क्योंकि “शांति का विचार हमारे लिए एक सच्चाई है जिसकी हम बहुत इच्छा रखते हैं।”
वाटिकन न्यूज के साथ बात करते हुए महाधर्माध्यक्ष ने पोप लियो के शब्दों के सार्वभौमिक दायरे पर जोर दिया जो अफ्रीका की सीमा के परे जाते हैं। वे मानते हैं कि शांति पर निरंतर चर्चा के द्वारा पोप एक बहुत महत्वपूर्ण बिन्दू पर प्रहार करते हैं जो न केवल हमारे महादेश बल्कि पूरे विश्व के लिए आवश्यक है।
महाधर्माध्यक्ष मुटेबा का कहना है कि कलीसिया की सामाजिक शिक्षा पर नए सिरे से जोर देने और विश्वपत्र लौदातो सी’ को जारी रखने से वे विशेष रूप से उत्साहित हैं। वे चेतावनी देते हैं, “दुनिया का भविष्य पर्यावरण की सुरक्षा और हमारे आस-पास की हर चीज की तबाही से लड़ने पर निर्भर करता है।”
लुबुम्बाशी में आशा की जयन्ती साल
जब आशा की जयन्ती समाप्त हो रही है, महाधर्माध्यक्ष बताते हैं कि कैसे उनके महाधर्मप्रांत ने इस साल को “गहरे विश्वास के साथ” जिया, जिसमें ख्रीस्तीयों, शिक्षकों, काथलिक आंदोलनों और दूसरों का मजबूत प्रतिबद्धता देखने को मिला।
उन्होंने बताया कि लुबुम्बाशी में, समुदायों ने जुबली के सफर को बहुत जोश के साथ जिया, अपने विश्वास को मजबूत किया और मिशनरी जोश को फिर से जगाया।
आशा का एक नया साल
पोप लियो के आह्वान पर महाधर्माध्यक्ष मुटेबा ने अपनी इच्छा जाहिर की कि आनेवाला साल सच्चाई और विश्वास से भरा हो। उन्होंने कहा, “दुखद हालात” और सच्ची शांति की कमी को देखते हुए, उम्मीद एक बहुत जरूरी चीज है। हमें विश्वासियों के विश्वास को फिर से जगाने के लिए इसी आश की जरूरत है,” और साथ ही वे प्रभु से “ज्यादा शांति और ज्यादा उम्मीद” के लिए प्रार्थना करते हैं।
कोंगो काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने मेलजोल के रास्ते के तौर पर सिनोडालिटी के महत्व पर भी जोर दिया। वे याद करते हैं कि कैसे “सिनोडालिटी हमें भाषा, तकनीक और दूसरी रुकावटों से परे, एक साथ अपनी जिदगी को मजबूत करने देती है।”
क्रिसमस, शरीरधारण, मानव प्रतिष्ठा, और शांति के लिए जरूरी आह्वान
महाधर्माध्यक्ष मुटेबा बताते हैं कि क्रिसमस ख्रीस्तयाग के लिए अपने प्रवचन में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि येसु के जन्म की खुशी मनाना सिर्फ एक याद नहीं है, बल्कि विश्वास का एक जीता-जागता अनुभव है—ख्रीस्त का स्वागत करना, उनकी उपासना करना, और उन्हें अपने दिलों में जन्म लेने देना।
महार्माध्यक्ष के लिए शरीरधारण का रहस्य ईश्वर के असीम प्रेम और हर इंसान की अहमियत को दिखाता है, जिससे उन्होंने तीन मुख्य संदेश दिए।
पहला, क्रिसमस मानव प्रतिष्ठा पर जोर देता है: मानव किसी भी भौतिक सम्पति से ज्यादा कीमती है। इस मायने में, महाधर्माध्यक्ष मुटेबा लोकतांत्रिक गणराज्य कोंगो के संसाधनों के गलत इस्तेमाल की बुराई करते हैं, और इसकी तुलना एक नए तरह के आर्थिक उपनिवेशवाद से करते हैं। इसके अलावा, वे कांगो के लोगों के लिए सम्मान, शांति और सबके विकास की अपील करते हैं।
दूसरा, चरनी में पड़ा बालक, बच्चों की प्रतिष्ठा के सम्मान और सुरक्षा का चिन्ह है, जिसमें सड़कों पर रहनेवाले बच्चे भी शामिल हैं। लुबुम्बाशी के महाधर्माध्यक्ष ने बच्चों द्वारा सामना की जा रही हिंसा, अपहरण और जबरदस्ती भर्ती की कड़ी निंदा की।
अंत में, येसु “शांति के राजकुमार” हैं। दशकों से अपने देश को तबाह कर रहे युद्ध के सामने, महाधर्माध्यक्ष मुटेबा ने हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत, मेलमिलाप और माफी की अपील की। वे चेतावनी देते हैं कि शांति से इनकार करना ईश्वर की योजना को इंकार करना है।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here