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विश्व युवा दिवस में भाग लेनेवाले भारतीय युवा मणिपुर की पीड़ा के साथ

भारत से करीब 1000 युवा प्रतिनिधि विश्व युवा दिवस में भाग लेने के लिए लिस्बन जाने की तैयारी कर रहे हैं।

वाटिकन न्यूज

नई दिल्ली, शनिवार, 22 जुलाई 2023 (फिदेस एजेंसी) : पुर्तगाल में काथलिक कलीसिया की ओर से आयोजित विश्व युवा दिवस में भारत से 900 युवा और 200 धर्माध्यक्ष, पुरोहित और संचालक / संचालिका भाग लेंगे।

गौरतलब है कि इन आयोजनों में कलीसियाई आंदोलनों जैसे “जीजस यूथ” और धर्मसमाजों द्वारा आयोजित यात्राओं में शामिल युवा ही भाग लेते हैं।

लिस्बन में होनेवाला विश्व युवा दिवस 2022 में होनेवाला था, लेकिन महामारी के कारण स्थगित होने के बाद, अब 2023  को सम्पन्न होगा। जिसकी विषयवस्तु है, “मरियम उठी और शीघ्रता से चल पड़ी।”(लूक.1,39) इस वाक्य मरियम की अपनी कुटुम्बनी एलिजाबेथ से मुलाकात की घटना से लिया गया है।  

 भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के युवा आयोग ने गौर किया है कि “शीघ्रता से चल पड़ने की मरियम की क्रिया उन्हें एक उदार और एक मिशनरी महिला के रूप में प्रस्तुत करता है। शीघ्रता से चल पड़ना विश्व युवा दिवस के लिए पोप फ्राँसिस द्वारा बताए मनोभाव को दर्शाता है: कि वे जीवित ख्रीस्त की उपस्थिति को पहचानेंगे और उनका साक्ष्य देंगे।”

भारत के युवा, एशियाई युवा दिवस की याद करते हैं जिसमें संत पापा ने उन्हें “जागने” और “चौकस” रहने का प्रोत्साहन किया था। इस अपील का लाभ उठाते हुए, भारतीय युवा, मणिपुर के अपने साथियों की ओर विश्व युवा दिवस का ध्यान खीचेंगे, जहां दो महीने से अंतर-जातीय हिंसा जारी है।

हाल के दिनों में आयोजित विभिन्न युवा कार्यक्रमों के बीच, भारतीय राज्य मेघालय के लगभग 120 काथलिक शैक्षणिक संस्थानों के 50,000 से अधिक छात्रों ने मणिपुर में शांति के लिए प्रार्थना सभाएँ आयोजित कीं। स्कूल और कॉलेज के छात्र मणिपुर के लोगों के साथ एकजुटता के एक विशेष दिवस में सहभाग हुए, जलती मोमबत्तियों के साथ जुलूस और प्रार्थना सभा में भाग लिया, मानव श्रृंखला बनाई और भारत में मौजूद विभिन्न भाषाओं में शांति की अपील की। विश्व युवा दिवस में युवा भारतीयों की भागीदारी पूर्वोत्तर भारत के राज्य में अशांति को समाप्त करने और शांति की बहाली के लिए प्रार्थना करने एवं दुनिया भर के अन्य युवाओं के साथ प्रार्थना साझा करने का एक अवसर होगा।

फिदेस न्यूज के अनुसार, युवा, मणिपुर में निर्दोष लोगों, उनकी संपत्ति और पूजा स्थलों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ''हम अपने भारत में शांति, मेल-मिलाप और भाईचारे के लिए काम करने हेतु बुलाए गए महसूस कर रहे हैं, हम शांति, सद्भाव, एकता के निर्माता बनना चाहते हैं।''

यही अभिलाषा अन्य ख्रीस्तीय समुदायों और धार्मिक दलों के युवाओं की भी है। वे कहते हैं, "हम अपने साथ लिस्बन में पीड़ितों के प्रति एकजुटता और करुणा की ताकत एवं शांति की गहरी इच्छा लेकर आ रहे हैं, ताकि दुनिया भर से युवा पीढ़ियों के बीच सहानुभूति, समझ और साझा जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दिया जा सके।”

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22 जुलाई 2023, 14:39